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उत्तराखंड में बनेंगी 11 सौ किलोमीटर सीमांत सड़कें
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 10 Aug 2016 08:59 AM IST
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उत्तराखंड में सामरिक महत्व की सीमांत सड़कों (इंडो चाइना बार्डर रोड) के अलावा साथ 11 सौ किलोमीटर लंबी 27 सड़कों का निर्माण होगा।
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चीन और नेपाल बार्डर से लगते पांच सीमांत जनपदों में इन सड़कों का निर्माण बीआरओ को दिया गया है। सीमा क्षेत्र तक सैन्य व सिविल यातायात को सुगम बनाने के लिए यह परियोजना शुरू हुई है। इसके तहत देश के सभी 14 राज्यों जिनकी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं वहां 22 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें बननी है।
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अंतरराष्ट्रीय बार्डर वाले सीमांत राज्यों में सैन्य दृष्टि से बार्डर तक पहुंच बनाने के लिए दीर्घावधिक सतत कार्य योजना (एलटीआरओडब्ल्यूपी) में नई सड़कें बनेंगी। 22 हजार किलोमीटर लंबी 519 सड़कें इंडो चाइना बार्डर रोड (आईसीबीआर) की साढ़े तीन हजार किलोमीटर सामरिक 73 सड़कों से इतर है।
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उत्तराखंड के अलावा इसके तहत 14 राज्यों में निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य सामरिक सड़क परियोजना को सुदृढ़ करने का है। उत्तराखंड के चमोली, पिथौरागढ़, चंपावत, उत्तरकाशी और चमोली में इनका निर्माण किया जाएगा। इसमें वन भूमि और अन्य भूमि संबंधित मसलों का निस्तारण के लिए राज्यों से सहमति बनाई जाएगी।
तेजी से निर्माण के लिए सीमा सड़क संगठन निर्माण के कार्य आउटसोर्र्सिंग के माध्यम से भी कर सकता है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए बीआरओ को बजट आवंटन कर दिया है। लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में इनका निर्माण हो जाए।
सर्वाधिक सीमांत सड़कें जम्मू कश्मीर में
सीमांत सड़कों में सर्वाधिक सड़कें 231 जम्मू कश्मीर के हिस्से हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में सर्वाधिक लगभग दस हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण होना है, जबकि सेंट्रल सेक्टर उत्तराखंड सिक्कम और हिमाचल में लगभग 60 सड़कें बनेगी। इसके अलावा पाकिस्तान और बंगलादेश से सटी सीमांत राज्यों में परियोजना के तहत निर्माण होना है।
तेज होगी आईसीबीआर की रफ्तार
सामरिक महत्व की सड़कों के निर्माण की रफ्तार तेज करने के लिए बीआरओ के प्रोजेक्ट अधिकारियों को संबंधित राज्यों से समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। राज्यों में आईसीबीआर के लिए गठित एम्पॉवर कमेटी भूमि, निर्माण सामग्री सहित अन्य लंबित प्रकरणों का निस्तारण तेजी से करने को भी पत्राचार किया जा रहा है। उत्तराखंड में 19 सामरिक महत्व की सड़कें बन रही हैं।