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कॉफी टेबल बुक ‘शिल्पी’ का लोकार्पण
Updated Sun, 04 Nov 2018 02:05 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
डॉ. भगवती प्रसाद नौटियाल द्वारा संकलित और संपादित कॉफी टेबल बुक ‘शिल्पी’ के हिंदी, अंग्रेजी संस्करण और इंडियन बटर ट्री का लोकार्पण आईआरटीडी आडीटोरियम में किया गया। इस पुस्तक में प्रस्तर शिल्प, काष्ठ शिल्प, ड्रिफ्ट वुड शिल्प, रेशा आधारित शिल्प, रिंगाल एवं बांस शिल्प, घास आधारित शिल्प, हथकरघा आधारित शिल्प, लौह व इस्पात, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, आभूषणों, वस्त्रों और मोम शिल्प के बारे में चित्रों सहित विस्तार से बताया गया है। इसके अतिरिक्त पुस्तक में देवभूमि के पारंपरिक खानपान, लोक कलाओं से संबंधित शिल्प का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर पद्मश्री प्रो. एएन पुरोहित ने कहा कि यह उत्तराखंड राज्य गठन के बाद तैयार ऐसा पहला दस्तावेज है, जो उत्तराखंड की कला और हस्तशिल्प को सही मायने में सामने रखता है। पद्मश्री अनिल जोशी ने कहा कि यह पुस्तक उन सभी युवाओं और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पहाड़ों में स्वरोजगार के अवसर खोज रह हैं।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. एसी श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता बैसाखी लाल, पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी आदि ने भी पुस्तक पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुसुम नौटियाल ने किया। बुक का सह संपादन राकेश उनियाल और शार्दुल नौटियाल ने किया है। पुस्तक के चित्र पीके आंगरा द्वारा लिए गए हैं। इस अवसर पर रानू बिष्ट, प्रवीन कुमार भट्ट, आशीष सुंदरियाल, वंदना वर्मा, डॉ. बृजमोहन शर्मा, तारादत्त कांडपाल, दिनेश कंडवाल आदि उपस्थित रहे।
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डॉ. भगवती प्रसाद नौटियाल द्वारा संकलित और संपादित कॉफी टेबल बुक ‘शिल्पी’ के हिंदी, अंग्रेजी संस्करण और इंडियन बटर ट्री का लोकार्पण आईआरटीडी आडीटोरियम में किया गया। इस पुस्तक में प्रस्तर शिल्प, काष्ठ शिल्प, ड्रिफ्ट वुड शिल्प, रेशा आधारित शिल्प, रिंगाल एवं बांस शिल्प, घास आधारित शिल्प, हथकरघा आधारित शिल्प, लौह व इस्पात, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, आभूषणों, वस्त्रों और मोम शिल्प के बारे में चित्रों सहित विस्तार से बताया गया है। इसके अतिरिक्त पुस्तक में देवभूमि के पारंपरिक खानपान, लोक कलाओं से संबंधित शिल्प का भी उल्लेख किया गया है।
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर पद्मश्री प्रो. एएन पुरोहित ने कहा कि यह उत्तराखंड राज्य गठन के बाद तैयार ऐसा पहला दस्तावेज है, जो उत्तराखंड की कला और हस्तशिल्प को सही मायने में सामने रखता है। पद्मश्री अनिल जोशी ने कहा कि यह पुस्तक उन सभी युवाओं और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पहाड़ों में स्वरोजगार के अवसर खोज रह हैं।
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नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. एसी श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता बैसाखी लाल, पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी आदि ने भी पुस्तक पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुसुम नौटियाल ने किया। बुक का सह संपादन राकेश उनियाल और शार्दुल नौटियाल ने किया है। पुस्तक के चित्र पीके आंगरा द्वारा लिए गए हैं। इस अवसर पर रानू बिष्ट, प्रवीन कुमार भट्ट, आशीष सुंदरियाल, वंदना वर्मा, डॉ. बृजमोहन शर्मा, तारादत्त कांडपाल, दिनेश कंडवाल आदि उपस्थित रहे।
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