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देहरादून : सुप्रीम कोर्ट और सेबी के फर्जी दस्तावेज बनाकर 100 करोड़ की धोखाधड़ी, कंपनी के डायरेक्टर समेत तीन गिरफ्तार

Fri, 07 Jan 2022 06:07 AM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Fri, 07 Jan 2022 06:07 AM IST
सार

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि उन्हें दून में एक संगठित भू-माफिया के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। पता चला कि भाऊवाला, धोरणखास, तरला आमवाला, बड़ोवाला और मसूरी में मौजूद संपत्तियों को एक कंपनी एसपीके वर्ल्डकॉम प्राइवेट लिमिटेड बेच रही है। इसके लिए कंपनी की डायरेक्टर पूजा मलिक व संजीव मलिक ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विक्रमजीत सैन व सेबी के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर कागजात बनाए गए हैं।
 

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100 crore fraud by making fake documents of Supreme Court and SEBI
demo pic - फोटो : istock

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय और सेबी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर संगठित भूमाफिया ने 100 करोड़ रुपये की भूमि का फर्जीवाड़ा कर डाला। एसटीएफ ने इस मामले में एक कंपनी के डायरेक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने पीजीएफ लिमिटेड की सीज संपत्तियों को अपनी बताकर लोगों को रजिस्ट्रियां की हैं। मामले में एसटीएफ की जांच के बाद डालनवाला में कुल 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

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एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि उन्हें दून में एक संगठित भू-माफिया के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। पता चला कि भाऊवाला, धोरणखास, तरला आमवाला, बड़ोवाला और मसूरी में मौजूद संपत्तियों को एक कंपनी एसपीके वर्ल्डकॉम प्राइवेट लिमिटेड बेच रही है। इसके लिए कंपनी की डायरेक्टर पूजा मलिक व संजीव मलिक ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विक्रमजीत सैन व सेबी के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर कागजात बनाए गए हैं।
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इन दस्तावेजों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि सेबी ने इस संपत्ति का मालिकाना हक इस कंपनी केे दिया है। जांच में मालूम हुआ कि यह लोग पहले भी जमीन संबंधी धोखाधड़ी में जेल जा चुके हैं। यह विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों से सांठगांठ कर दस्तावेज तैयार करातेे हैं। इस मामले में देहरादून और आसपास के कुल आठ लोग एसटीएफ के सामने आए।
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इनसे बातचीत और जांच के बाद 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा डालनवाला में दर्ज किया गया। जब मलिक को यह पता चला कि उसके खिलाफ जांच चल रही है तो वह लुधियाना (पंजाब) भाग गया। वहां से एसटीएफ के इंस्पेक्टर अबुल कलाम और उनकी टीम ने संजीव मलिक निवासी डिफेंस कॉलोनी और उसके दो साथियों शुभम निवासी केहरी गांव प्रेमनगर व टिंकू निवासी अकबरपुर पथरी, अमरोहा उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया है।

सीबीआई की जांच के बाद बनी थी समिति
पीजीएफ और पीएसीएल कंपनी ने देशभर के लोगों से धन दोगुना करने का लालच देकर रुपये जमा कराए थे। इनसे इन दोनों कंपनियों ने अरबों रुपये की संपत्तियां खरीदीं। लोगों को लालच दिया गया था कि वह भी इन संपत्तियों के मालिक हैं, लेकिन बाद में न तो लोगों को पैसा मिला और न ही संपत्तियां। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।

सीबीआई की जांच के बाद उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार देश भर में विभिन्न स्थानों पर करोड़ो रुपयों की अचल सम्पत्ति सीज कर दी गई। इनमें जिसमें 348 संपत्तियां पीजीएफ और 14,000 संपत्ति पीएसीएल की थी। इसके बाद इन संपत्तियों के निस्तारण के लिए सेबी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल करते हुए समिति बनाई। यह समिति ही इन संपत्तियों की नीलामी कर रही है। संजीव मलिक ने इन जमीनों को नीलामी में खरीदना दर्शाया था।

समिति के खातों में दिखाया फर्जी लेनदेन
आरोपी संजीव मलिक ने अपने नाम जमीनों को दर्शाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति के खातों में फर्जी लेनदेन भी दिखाया। इससे लगता था कि यह वाकई उसने नीलामी में खरीदी हैं। इसके बाद सेबी के फर्जी प्रमाणपत्र भी बना लिए गए। आरोपी करीब 160 बीघा की जमीन, जिसकी अनुमानित लागत करीब 100 करोड़ से ज्यादा है, को अपने नाम बताकर बेचा रहे थे।


एसटीएफ ने सेबी से पत्राचार किया तो पता चला कि संजीव मलिक व पूजा मलिक द्वारा जो सेबी व सुप्रीम कोर्ट के एग्रीमेंट दिखाए हैं वह पूरी तरह से फर्जी हैं। उन्होंने इस तरह के न तो कोई प्रमाणपत्र जारी किए हैं और न ही इस कंपनी को जमीन नीलाम की है।

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