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गूगल की मदद से दरोगा ने किया डकैती का खुलासा: जानिए क्यों मोबाइल ऑन करना डकैतों के लिए पड़ा भारी

Mon, 25 Oct 2021 02:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 25 Oct 2021 02:31 PM IST
सार

कानपुर के गोविंदनगर में पड़ी डकैती का खुलासा करने के लिए क्राइम ब्रांच दरोगा सुनीत शर्मा ने गूूूगल को हथियार बनाया। वहीं डकैत अपनी एक गलती की वजह से पुलिस की गिरफ्त में आ गए। 

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Kanpur: With the help of google crime branch sub inspector revealed robbery case
गाेविंद नगर डकैती कांड: पीड़िता आशा गुप्ता - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के गाेविंद नगर स्थित शिवम अपार्टमेट में पड़ी डकैती का खुलासा क्राइम ब्रांच के एक दरोगा की सक्रियता व सूझबूझ की वजह से हुआ। एक तरह से दरोगा ही खुलासे के सूत्रधार रहे। एक मोबाइल को चंद सेकेंड के लिए ऑन करना डकैतों के लिए भारी पड़ गया। यहीं से वह जाल में फंसे और फिर परतें खुलती गईं। क्राइम ब्रांच उन तक आसानी से पहुंच गई। 
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डीसीपी क्राइम के मुताबिक दरोगा सुनीत शर्मा ने इंटरनेट की मदद से डकैती की वारदातों के बारे में सर्च किया। इसमें नालंदा और झारखंड में पड़ीं दो डकैतियों को चिह्नित किया। इन दोनों वारदातों को ठीक उसी तरह से अंजाम दिया गया था जिस तरह से गोविंद नगर की घटना को।
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दरोगा ने नालंदा व झारखंड पुलिस से संपर्क किया। नालंदा पुलिस ने बताया कि उन्होंने सुधीर महतो व जोगेंद्र को डकैती के मामले में जेल भेजा है। इसमें वांछित मुन्ना यादव देवरिया जेल में बंद है। दरोगा ने नालंदा व झारखंड पुलिस से तमाम जानकारी ली। उसमें 20 आईएमईआई नंबर भी थे।
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जब तफ्तीश की तो पता चला कि 16 सितंबर की रात वारदात के बाद इनमें से एक आईएमईआई नंबर करीब 13 मिनट तक घटनास्थल के आसपास एक्टिव रहा था। उसमें एक नंबर भी चालू था। उसी आधार पर क्राइम ब्रांच ने किशोर को गिरफ्तार किया। जिसके बाद उससे पूछताछ में पूरी घटना खुल गई। 

झारखंड में मंत्री के रिश्तेदार के घर डाली थी डकैती 
गिरोह ने 15 जुलाई 2021 नालंदा में 50 लाख की डकैती डाली थी। इसके बाद झारखंड के एक मंत्री के रिश्तेदार के फ्लैट व उसके पड़ोसी के यहां तकरीबन एक करोड़ की डकैती डाली थी। इस वारदात को चार सितंबर को अंजाम दिया था। ठीक इसके 12 दिन बाद कानपुर में डकैती डाली। डीसीपी के मुताबिक इसी तरह से गिरोह अलग-अलग राज्यों में जाकर वारदात को अंजाम देता है। अंजाम देने के बाद तुरंत शहर छोड़ देते हैं। सरगना जोगेंद्र व सुधीर दो चार दिन पहले वहां पहुंचकर रेकी करते हैं। 

नोएडा के एक व्यापारी की हत्या की लेने वाले थे सुपारी 
क्राइम ब्रांच ने जब आरोपी किशोर के नंबर को ट्रेस कर लिया था तो उसको लिसनिंग पर लिया। इस दौरान एक शख्स से किशोर बातचीत करता है जिसमें वह नोएडा में एक व्यापारी की हत्या करने की बात कहता सुनाई देता है। सुपारी की रकम भी तय करता है। क्राइम ब्रांच पता कर रही है कि आखिर सुपारी कौन दे रहा था और किसी हत्या की साजिश की जा रही थी।
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