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विश्व अहिंसा दिवस विशेष: अहिंसा महान शक्ति का लक्षण है..!

Sri Sri Ravi Shankar श्री श्री रविशंकर 
Updated Fri, 01 Oct 2021 10:02 PM IST
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International Day of Non Violence 2021 non violence is a sign of great power
महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

अहिंसा एक व्यक्ति की प्रतिबद्धता है कि वह किसी व्यक्ति या वस्तु को हानि नहीं पहुंचाएगा। भारतीय परंपरा में यह एक व्यक्तिगत नियम है जिसका पालन एक पूर्ण जीवन जीने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए। 'अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' की अवधारणा के अस्तित्व में आने से बहुत पहले अहिंसा को प्राथमिक नैतिक मूल्य  के रूप में मान्यता दी गई थी जिसे आत्मसात और प्रचारित किया जाना था। एक अर्थ में यह स्वीकार किया गया था कि जो व्यक्ति अहिंसा के नियम का पालन नहीं कर रहा है, वह कालांतर में प्रसन्न और सफल नहीं हो सकता।

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हिंसा और अहिंसा

पतंजलि योग सूत्र अहिंसा को व्यक्तिगत नैतिकता के पहले सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत करता है। कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में भी जहां अत्यधिक उग्र संघर्ष चल रहा था, अहिंसा पालन की एक आधारभूत नियम के रूप में प्रशंसा की गई थी।

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हिंसा तब होती है जब कोई व्यक्तिगत लाभ के लिए दूसरों को हानि पहुंचाता है या क्रोध और रोष में कार्य करता है। स्वयं को अन्यायपूर्ण दंड देना भी एक प्रकार की हिंसा है। अहिंसा मन की एक ऐसी स्थिति की अभिव्यक्ति है जो किसी को हानि  पहुंचाना नहीं चाहती। जब कोई व्यक्ति अहिंसा के अभ्यास को सिद्ध कर लेता है, तो उसकी उपस्थिति में ही सारी हिंसा लुप्त हो जाती है।

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कुछ व्यक्तियों को अहिंसा एक आदर्शवादी और अव्यवहारिक नियम के रूप में प्रतीत हो सकती है, लेकिन बात ऐसी नहीं है। मन में थोड़ा सा गहरे जाएं और इसे किसी क्रिया के पीछे के इरादे या बीज के संदर्भ में देखें। जो कुछ भी क्रोध से या जानबूझकर हानि पहुंचाने के इरादे से नहीं किया जाता है, वह अहिंसा का उल्लंघन नहीं होगा, भले ही वह क्रिया अन्य लोगों को हानि पहुंचा रही हो। दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति किसी को हानि पहुचाने का विचार रखता है, लेकिन उस पर कार्य नहीं करता है, तो वह विचार ही हिंसा का कार्य होगा।


असजग व्यक्ति अपने भय, दुर्बलता और अभाव  को दूर करने के प्रयास में हिंसा का सहारा लेते हैं। हिंसा आंतरिक शक्ति की कमी का लक्षण है। यह तनाव व परेशानी, भय व असुरक्षा अथवा लोभ व क्रोध के कारण होती है। पीड़ित होने की भावना तथा धर्म और पहचान का गलत विचार भी हिंसा पैदा कर सकता है। अधिकांश विद्रोही समूह और गुरिल्ला लड़ाके न्याय और निष्पक्षता के अपने विचार को लागू करने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं।

International Day of Non Violence 2021 non violence is a sign of great power
महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

एक अजीब सी उलझन

कभी-कभी, जब हम दुनिया में अपने चारों ओर देखते हैं, तो हम पाते हैं कि हिंसा और नकारात्मक मानसिकता हावी हो गई है, लेकिन यह दीर्घ काल तक रहने वाली नहीं है। प्रत्येक मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति शांति में रहने की होती है। संघर्ष हमारा स्वभाव नहीं है और इसलिए हम संघर्ष से बाहर निकलना चाहते हैं लेकिन हम नहीं जानते कि कैसे, कहां और क्यों?

यहीं पर योग, ध्यान और अन्य साधनाओं का ज्ञान लोगों को हिंसक प्रवृत्तियों से छुटकारा पाने में मदद करता है। उच्च जागरूकता की स्थिति में हिंसा नहीं हो सकती। जब आपके पास अपने और अपने जीवन के बारे में एक व्यापक दृष्टिकोण होता है, तो अहिंसा स्वाभाविक रूप से आपके अंदर पनपती है। अहिंसा और धैर्य आत्मा की महान शक्ति के लक्षण हैं।

अशांत को सुख कहां?

हिंसा के प्रति झुकाव रखने वाला मन जिसके पास है, ऐसा व्यक्ति कभी भी स्वयं से प्रेम नहीं कर पाएगा। जो शांत नहीं है, वह अपने भीतर और आसपास के देवत्व से नहीं जुड़ सकता। भगवद गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, "अशांतस्य, कुत: सुखम।" यदि आप अशांत हैं, तो सुख नहीं हो सकता और हिंसा ही लोगों को अशांत करती है।

आज दुनिया में हम पाते हैं कि अज्ञानी जन कट्टर धार्मिक हैं, तथाकथित बुद्धिजीवी नास्तिक होने में गर्व महसूस करते हैं, और बुद्धिमान व्यक्ति ही वास्तव में आध्यात्मिक हैं। यह समय है कि हम अपने युवाओं को सीमित पहचान से परे देखने और उस सामान्य मानवता के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें जिसका हम सभी हिस्सा हैं। आइए हम अहिंसा के सार्वभौमिक मूल्य का आह्वान करें और देश, धर्म, लिंग और जाति  के नाम पर हो रही व्यर्थ  हिंसा को समाप्त करें।

 

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