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कश्मीर में वार्ता के दौर के बीच ही अलगाववादियों पर कसेगा शिकंजा

Fri, 26 Aug 2016 10:15 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/श्रीनगर
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 26 Aug 2016 10:15 AM IST
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प्रेस वार्ता के दौरान महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह - फोटो : PTI
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के क्रम कश्मीर में शांति प्रयासों पर स्थानीय दलों की सियासी प्रतिस्पर्धा हावी दिखी।
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पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस में हालात बिगाड़ने के लिए परस्पर दोषी ठहराने की नीति और इस मुद्दे पर शुरू हुई जंग से शांति मिशन का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

वैसे राजनाथ ने सभी पक्षों से साफ कर दिया है कि शांति प्रयासों के नाम पर उपद्रवियों को कई छूट नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ अलग से हुई बैठक में राजनाथ ने हालात से निपटने में रियासत सरकार के प्रयासों पर असंतोष भी जाहिर किया।
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हालात नहीं सुधरने पर राज्यपाल शासन

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घाटी में हिंसा - फोटो : PTI
गृह मंत्री ने दौरे में स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि संविधान के दायरे में बातचीत से मसले के हल के सभी प्रयास जारी रहेंगे। लेकिन, हालात नहीं सुधरते तो राज्यपाल शासन का विकल्प खुला है।

केंद्र ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से दो टूक कह दिया है कि किसी भी हालत में उपद्रव को बढ़ावा देने वाले अलगाववादियों से नरमी नहीं बरती जाएगी। पीडीपी अलगाववादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के पक्ष में नहीं रही है। लेकिन, केंद्र ने पाकिस्तान और अन्य देशों से उपद्रव के लिए फंडिंग की जांच तेज कर इरादे जाहिर कर दिए हैं।

प्रारंभिक जांच में उजागर हो चुका है कि हर्रियत के सभी धड़ों के नेताओं को खाड़ी देशों के माध्यम से पाकिस्तान ने फंडिंग की है। राजनाथ ने अपने दौरे में जांच एजेंसियों को कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। इससे पीडीपी असहज है। 

हिंसक भीड़ पर सुरक्षा बलों ने बरती नरमी

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kashmir protest - फोटो : PTI
शासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार केंद्र मानता है कि आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद शुरुआत में रियासत सरकार की ओर से उपद्रवियों के खिलाफ त्वरित सख्ती नहीं किए जाने से हालत बिगड़े।

महबूबा मुफ्ती अब भी कही रही हैं कि 95 प्रतिशत कश्मीरी शांति चाहते हैं और पांच प्रतिशत उपद्रवियों के लिए उन्हें दंड नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन, केंद्र सभी पक्षों से वार्ता जारी रखने के क्रम में भी उपद्रवियों से कठोरता से निपटने के पक्ष में है।

सुरक्षा एजेंसियों ने राजनाथ को अलग से हुई बैठक में ब्रीफ किया कि उपद्रवियों से नरमी के कारण आतंकियों को गांवों में फैलकर एके 47 लहराने और सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करने का मौका मिला। पेलेट गन विवाद के कारण सुरक्षा बलों ने भी नरमी बरती। इस कारण सेना द्वारा गांवों में आतंकियों की तलाशी थम गई।

एलओसी और बार्डर पर घुसपैठियों से मुठभेड़ होती रहीं और अंदरूनी हिस्सों में आतंकियों का आतंक लोगों को डराकर पत्थरबाजी बढ़ाता रहा। राजनाथ ने अब इसे हार हाल में रोकने के निर्देश दिए हैं। 
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