{"_id":"5725b1bf4f1c1bad075cceb5","slug":"possession-of-property-of-the-elderly-officials-the-police-came-down-court","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बुजुर्ग की संपत्ति पर अधिकारियों का कब्जा, पुलिस से निराश होकर पहुंचा कोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुजुर्ग की संपत्ति पर अधिकारियों का कब्जा, पुलिस से निराश होकर पहुंचा कोर्ट
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 01 May 2016 01:05 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : file photo
दिल्ली पुलिस से निराश होकर 74 वर्षीय बुजुर्ग ने कोर्ट की शरण ली है। पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि सरकारी अधिकारियों ने करोल बाग स्थित करोड़ों की संपत्ति पर फर्जी दस्तावेज बनाकर कब्जा करवा दिया, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
विज्ञापन
बुजुर्ग का यह प्लॉट करोल बाग थाने से चंद कदम की दूरी पर है, जिस पर बिल्डर ने कब्जा कर बिल्डिंग बना दी है। हालांकि पुलिस ने प्रधानमंत्री कार्यालय व उपराज्यपाल कार्यालय के दबाब में एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन कब्जा करने वाले बिल्डर को उसमें नामजद आरोपी नहीं बनाया। कोर्ट ने बुजुर्ग की शिकायत पर करोल बाग थाना पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है।
विज्ञापन
तीस हजारी अदालत की महानगर दंडाधिकारी ने उत्तम नगर निवासी राम फल माथुर (74) की शिकायत पर करोल बाग थाना एसएचओ को एटीआर पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 मई को होगी।
विज्ञापन
पुलिस को एटीआर पेश करने का निर्देश
पुलिस
- फोटो : Demo pic
बुजुर्ग की शिकायत पर बहस करते हुए अधिवक्ता रंजन कुठमरिया ने कहा कि उनके मुवक्किल की देशबंधु गुप्ता रोड पर करोड़ों रुपये का प्लॉट है। इस संपत्ति पर इवैक्यू प्रॉपर्टी सेल के अधिकारियों ने बिल्डर से कब्जा करवा दिया।
पुलिस ने भारी दबाव के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज तो कर दी लेकिन इन तीन अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया। पुलिस ने रिपोर्ट में केवल फर्जीवाड़े व धोखाधड़ी की धाराएं लगाई हैं जबकि यह पूरा मामला आपराधिक साजिश व धोखाधड़ी का है।
पीड़ित पक्ष ने कहा कि पुलिस ने बिल्डर व उसकी पत्नी को नामजद नहीं किया। अदालत ने इन दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया हुआ है और यह लोग खुले घूम रहे हैं लेकिन जांच अधिकारी इन्हें गिरफ्तार नहीं कर रहा है। पेश मामले में शिकायतकर्ता राम फल माथुर का आरोप है कि तीन सरकारी अधिकारियों ने देशबंधु गुप्ता रोड स्थित उसके 205 गज के प्लॉट पर कब्जा करवा दिया है।
इन अधिकारियों ने प्रॉपर्टी के फर्जी कागज तैयार कर प्लॉट बिल्डर के नाम ट्रांसफर करवा दिया। इसके बाद बिल्डर ने वहां निर्माण करके बिल्डिंग बनवा दी। अब उसने बिल्डिंग के बाहर अपने पहलवान बैठा दिए हैं।
पुलिस ने भारी दबाव के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज तो कर दी लेकिन इन तीन अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया। पुलिस ने रिपोर्ट में केवल फर्जीवाड़े व धोखाधड़ी की धाराएं लगाई हैं जबकि यह पूरा मामला आपराधिक साजिश व धोखाधड़ी का है।
पीड़ित पक्ष ने कहा कि पुलिस ने बिल्डर व उसकी पत्नी को नामजद नहीं किया। अदालत ने इन दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया हुआ है और यह लोग खुले घूम रहे हैं लेकिन जांच अधिकारी इन्हें गिरफ्तार नहीं कर रहा है। पेश मामले में शिकायतकर्ता राम फल माथुर का आरोप है कि तीन सरकारी अधिकारियों ने देशबंधु गुप्ता रोड स्थित उसके 205 गज के प्लॉट पर कब्जा करवा दिया है।
इन अधिकारियों ने प्रॉपर्टी के फर्जी कागज तैयार कर प्लॉट बिल्डर के नाम ट्रांसफर करवा दिया। इसके बाद बिल्डर ने वहां निर्माण करके बिल्डिंग बनवा दी। अब उसने बिल्डिंग के बाहर अपने पहलवान बैठा दिए हैं।