बच्चों को सीने से लगा जलते घरों से नंगे पांव बाहर भागे लोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आग की प्रचंड लपटों में धू-धू जलते मकान। अफरातफरी के साथ हर तरफ मची चीख-पुकार। कोई बच्चे को उठाकर बाहर भागता तो कोई चिल्ला-चिल्ला कर सभी को आग से आगाह करता।
घर के बड़ों को सबसे पहले बच्चे बचाने की फिक्र खाए जा रही थी। लिहाजा, आंखों के सामने जलते घर-सामान को नजरअंदाज कर हर कोई परिवार सदस्यों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाने में जुटा रहा। अंधेरे में गांव को रोशनी जलते घरों की लपटों से मिल रही थी।
ज्यादातर लोग नंगे पांव इधर-उधर भागते रहे। जो, जिन कपड़ों में सोया था, उसी में जान बचाकर बाहर की ओर भागा। जिन घरों के परिवार सदस्यों को खुद को बचाने के बाद कुछ वक्त मिला, वे दौड़कर जलते घरों से बिस्तर बाहर घसीटकर ले आए।
आंखों में बेबसी के आंसू छलक रहे थे
इस सामान को फिर खेतों में फेंक कर रोते-बिलखते बच्चों को चुप कराने की कोशिश में जुट गए। एक ही रात में सब कुछ राख होते देखती आंखें बाहर आने तक खौफ में थीं। और जब लोग घरों से बाहर आकर सुरक्षित दूरी पर पहुंचे तो उन्हीं आंखों में बेबसी के आंसू छलक रहे थे।
रोते बच्चे, सिर पीटते परिजन इस आपदा की घड़ी का कैसे सामना करें, उन्हें समझ नहीं आ रहा था। दर्जनों परिवारों के सामने एक जैसे हालात और दर्द था, जिसे वे एक दूसरे को ढांढस बंधाकर सहारा देते रहे।
रात के अंधेरे में तबाही की रोशनी में सब कुछ गंवाने वालाें का दर्द सुबह होने पर और भी बढ़ गया। आग की लपटें कुछ थम चुकी थीं, लेकिन मलबे से उठते धुएं से उनकी टीस और भी गहरी हो गई।
दिन चढ़ने पर रात की तबाही के मंजर देख आंखों से आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। इस बीच नेता, रिश्तेदारों की भीड़ भी बढ़ती गई। पीड़ित परिवाराें के लिए प्रशासन ने लंगर लगा दिया लेकिन कई लोगाें के गले से निवाला उतरना भी मुश्किल था।
अधिकांश लोगों को गांव के ही लोगों ने अपने घरों में पनाह दे दी, लेकिन उनके चेहरों पर नया आशियाना बनाने, दो वक्त की रोटी, तन के कपडे़ और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े सवालों की फिक्र साफ झलकती रही।
अग्निकांड में ये हुए बेघर
दुष्यंत पुत्र सरजन दास
प्रदीप पुत्र रघुनंद
सुरेश पुत्र रघुनंद
हरिंद्र पुत्र कन्हैया लाल
भगत चंद पुत्र नरैण चंद
बृजपाल पुत्र गिरजानंद
राजिंद्र पुत्र गूदड़ूमल
रघुनंद पुत्र गूदड़ूमल
प्रेम लाल पुत्र गिरजानंद
अनिल कुमार पुत्र गोपाल दास
राजिंद्र सिंह पुत्र भगत राम
दिग्विजय पुत्र दयानंद
गीता राम पुत्र करमचंद
प्रेम राज पुत्र भजनदास
तपेंद्र पुत्र धनसुख
धर्मेंद्र पुत्र धनसुख
तिलकराज पुत्र भगत राम
हरिराम पुत्र नैणू
गिरधारी लाल पुत्र कृष्णदास
रमेश पुत्र गीता राम
धर्मचंद पुत्र जाजरू
पूर्णचंद पुत्र जाजरू
ओमकार पुत्र नरैण चंद
राजिंद्र पुत्र काना सिंह
नरेश पुत्र काना सिंह
जगदीश चंद पुत्र गोपाल दास
सुंदर लाल पुत्र भजन दास
मेहरचंद पुत्र अमर नाथ
प्रेम प्रकाश पुत्र प्यारे लाल
राकेश पुत्र गीता राम
तुमड़ी देवी पत्नी भगत राम
रामकृष्ण पुत्र नंद लाल
गिरजानंद पुत्र धर्मदास
हेमराज पुत्र अमर प्रकाश
अशोक पुत्र ज्वाला दास
राजेश पुत्र मंगत राम
दमोदर दास पुत्र जयकरण दास
राजिंद्र पुत्र दयानंद
हरपाल पुत्र अमर प्रकाश
सतीश पुत्र रघुनंद
हीरा लाल पुत्र गिरजानंद
बृजलाल पुत्र गिरजानंद
रूंगली देवी पत्नी कन्हैया लाल
बलबीर पुत्र भगवान दास
कमलकृष्ण पुत्र केसरी नंद
अमृत पुत्र केशव राम
सतीश पुत्र ज्वाला दास
अश्वनी पुत्र केशव राम
नरवीर पुत्र भजनदास
परमेश्वर दास पुत्र गोपी चंद
मिसी देवी पत्नी धनसुख
भागचंद पुत्र दान दास
प्रशासन ने जलने से बचाया आधा गांव
कशैणी गांव में आग पर काबू पाने के लिए और राहत के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम की लोगों में सराहना हो रही है। अग्निशमन विभाग के प्रयासों से कशैणी का आधा गांव आग की चपेट में आने से बचा है।
एसडीएम रोहड़ू बीआर शर्मा को सुबह करीब तीन बजे अग्निकांड की सूचना मिली। सूचना के बाद उन्होंने सुबह होने से पहले अपने स्टाफ के साथ राशन, कंबल, तंबू, लाखों रुपये घटना स्थल तक पहुंचाए। रोहड़ू उपमंडल मुख्यालय से कशैणी गांव करीब 30 किलोमीटर दूर है। दमकल वाहन सूचना के बाद एक घंटे में मौके पर पहुंच गया।
सैकड़ों लोगों ने आग पर काबू पाने में किया सहयोग
स्थानीय लोगों का भी आग पर काबू पाने में भारी योगदान रहा। पुजारली चार, थाना, टिक्कर, खंगटा, नरैण शरौंथा सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों लोगों ने आग पर काबू पाने में सहयोग किया।
सिविल अस्पताल रोहड़ू से प्रभारी चिकित्सक डॉ. रविंद्र शर्मा भी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर दिन भर प्राथमिक उपचार के लिए डटे रहे। डीसी, एसपी भी कुछ घंटों के भीतर मौके पर पहुंच कर आग बुझाने के लिए दिशा-निर्देश देते रहे। खाद्य आपूर्ति निरीक्षक लीली ठाकुर अपनी टीम के साथ सुबह से ही रसोई गैस व राशन लेकर मौके पर पहुंच गईं।