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पार्किंग में लूट, तय दामों से पांच गुणा ज्यादा वूसली
दीपक मेहता/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 23 May 2016 11:33 AM IST
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पार्किंग फीस मनमर्जी से वसूल की जा रही है।
- फोटो : अमर उजाला
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राजधानी शिमला में पार्किंग संचालकों ने ‘अतिथि देवो भव:’ के मायने ही बदल दिए हैं। यहां आने वाले टूरिस्टों को लूटने का ये कोई मौका नहीं छोड़ रहे। स्थानीय लोग भी इस लूट का शिकार हो रहे हैं। पार्किंग फीस मनमर्जी से वसूल की जा रही है। आगे से सवाल किया तो संचालक और इनके कर्मचारी मारने को दौड़ रहे हैं।
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राजधानी की पार्किंगों में कायदे-कानून ताक पर हैं। सैलानियों सहित स्थानी लोग लुटने को मजबूर हैं। इन पर शिकंजा कसने वाला कोई नहीं। नगर निगम भी इस लूट के आगे लाचार है। कार्रवाई के नाम पर चालान किए जा रहे हैं। पर संचालकों को चालान की परवाह नहीं। चालान कटवाने के बाद फिर से संचालकों ने पार्किंगों में जंगलराज मचा रखा है।
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पार्किंगों में जंगलराज, सो रही सरकार
मैट्रोपोल के पास स्थित नगर निगम और होटल होली डे होम के सामने स्थित टूरिज्म की पार्किंगों में सैलानियों से मनमानी वसूली की जा रही है। पार्किंग संचालक निर्धारित दरों के मुकाबले लोगों से दो से पांच गुणा तक अधिक वसूली कर रहे हैं। नगर निगम की नाक के नीचे मैट्रोपोल पार्किंग में ठेकेदार ने फर्जी रसीदें तक छाप रखी हैं।
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इन रसीदों के जरिये लोगों से गाड़ी खड़ी करने के एवज में मनमानी वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं कोई विरोध करे तो पार्किंग संचालक दबंगई पर उतर आते हैं। पार्किंग संचालकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि गाड़ी पार्क करने आए लोगों की गाड़ियां मौज मस्ती के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
न्यूयार्क में रहने वाले मनदीप सिंह रविवार को चंडीगढ़ से शिमला घूमने पहुंचे। गाड़ी पार्किंग के लिए गेट के पास खड़ी की लेकिन पार्किंग संचालक गाड़ी लेकर सामने सामने ही फुर्र हो गया। करीब 20 मिनट बाद गाड़ी वापस पहुंची। इस दौरान मनदीप सिंह और उनके परिजनों को पार्किंग में खड़े रहकर भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
पार्किंग संचालक के खिलाफ होगी एफआईआर
लोगों से ओवर चार्जिंग करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने पहले भी कड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करवाई है। मैट्रोपोल पार्किंग में अवैध रसीद देने वाले संचालक के खिलाफ भी तुरंत एफआईआर करवाई जाएगी। -पंकज राय, आयुक्त नगर निगम शिमला
पार्किंग का किया जाएगा निरीक्षण
पार्किंग में ओवर चार्जिंग को लेकर हमें कोई शिकायत नहीं मिली है। पहले शिकायतें आई थीं जिसके बाद ठेकेदार को कड़ी चेतावनी जारी की गई थी। पार्किंग का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांची जाएगी।
- बीएस ओक्टा, सीनियर मैनेजर, होटल हाली डे होम
केस-1 टूरिज्म पार्किंग
170 नहीं 200 रुपये लगेंगे
दिल्ली से शिमला आए अंकुर ने टूरिज्म की पार्किंग में गाड़ी पार्क की थी। रविवार सुबह अंकुर गाड़ी निकालने पार्किंग पहुंचे। अंकुर ने बताया कि गाड़ी पार्क करने के एवज में उनसे 170 के स्थान पर 200 रुपये वसूले गए। पिछले महीने भी वह शिमला आए थे इसी पार्किंग में गाड़ी खड़ी की थी उस समय भी 600 रुपये लिए गए थे। उन्होंने मामले की पुलिस में शिकायत भी की थी।
केस-2 टूरिज्म पार्किंग
डेढ़ घंटे के 50 रुपये
ओम प्रकाश और शिल्पा दिल्ली से शिमला आए थे। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह दस बजे पार्किंग में गाड़ी लगाई। साढ़े ग्यारह बजे गाड़ी निकाल दी। डेढ़ घंटे गाड़ी खड़ी करने के एवज में 50 रुपये वसूल लिए गए। शनिवार को भी गाड़ी इसी पार्किंग में लगाई गई थी और दो घंटे के 50 रुपये वसूले गए थे।
केस-3 एमसी पार्किंग
20 रुपये रेट, वसूल लिए 150
अमृतसर से आए हरिचंद ने नगर निगम की पार्किंग में गाड़ी खड़ी की थी। दो घंटे गाड़ी खड़ी करने के एवज में उनसे 150 रुपये लिए गए। जबकि नगर निगम के रेट 20 रुपये हैं। अमर उजाला ने जब पार्किंग संचालक की ओर से दी गई पर्ची देखी तो वह फर्जी थी। नगर निगम की ओर से पार्किंग संचालकों को जारी की गई पर्ची की जगह यहां फर्जी पर्ची दी जा रही थी।
केस-4 एमसी पार्किंग
सवाल किया तो दुर्व्यवहार पर उतरा संचालक
अर्जुन अपने दोस्तों के साथ पंजाब से शिमला आए थे। नगर निगम की पार्किंग में दो घंटे आल्टो गाड़ी खड़ी करने के एवज में 100 रुपये वसूल लिए गए। अर्जुन ने बताया कि पार्किंग से गाड़ी निकालने के लिए करीब एक घंटा इंतजार करवाया गया। पार्किंग संचालक दुर्व्यवहार पर उतर आए।
‘अमर उजाला’ की टीम के सामने पार्किंग संचालक ने फाड़ दी रसीद
नगर निगम की पार्किंग में ठेकेदारों के हौसले बुलंद है। रविवार को अमर उजाला की टीम के सामने पार्किंग संचालक ने गाड़ी पार्क करने वाली की पर्ची फाड़ दी। पार्किंग के द्वितीय तल पर चंडीगढ़ के सुशील कुमार अपनी गाड़ी निकालने पहुंचे थे। जैसे ही अमर उजाला की टीम ने उनसे बातचीत शुरू की।
कांउटर पर बैठे पार्किंग संचालक ने सुशील कुमार की पर्ची फाड़ दी। सुशील और उनकी पत्नी अश्वनी ने बताया कि गाड़ी पार्क करने के एवज में उनसे 170 की जगह 200 रुपये मांगे गए। इतना ही नही उन्हें करीब एक घंटे तक पार्किंग में रोक कर रखा गया। हालांकि ‘अमर उजाला की पड़ताल के बाद पार्किंग संचालक ने बकाया 30 रुपये सुशील कुमार को वापस लौटा दिए।