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ताबड़तोड़ तबादलों पर सरकार की सफाई, दो मंत्रियों ने जारी किया संयुक्त बयान

Wed, 07 Feb 2018 09:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Wed, 07 Feb 2018 09:35 AM IST
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himachal govt two minister gave clarification on transfer issue

प्रशासनिक अधिकारियों के ताबड़तोड़ तबादलों पर हिमाचल सरकार ने सफाई दी है। कैबिनेट बैठक में तबादलों पर रोक के फैसले के दो दिन बाद ही बीते सोमवार को पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि महकमों में तबादला आदेशों से फजीहत के बाद जयराम सरकार ने मंगलवार को सफाई दी है।

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स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार और परिवहन एवं वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने संयुक्त बयान में कहा है कि अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले पहले से ही सरकार के विचाराधीन थे। इन तबादलों पर प्रशासनिक और नीतिगत औपचारिकताओं से संबंधी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही फैसला लिया गया है। 
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दोनों मंत्रियों के मुताबिक कैबिनेट बैठक में सामान्य तबादलों पर रोक से संबंधित फैसले को पूरी तरह से लागू किया गया है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसी भी तबादले में अब मुख्यमंत्री की अनुशंसा लेना अनिवार्य है।

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मंत्रियों ने तबादलों को लेकर ये कहा

himachal govt two minister gave clarification on transfer issue

मंत्रियों ने कहा कि राज्य के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में सेवारत अधिकारियों व कर्मचारियों के सामान्य सेवाकाल की अवधि पूरी होने पर उनका तबादला किया जा सकता है। चिकित्सा आपात या अन्य प्रकार के मानवीय आधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

यही नहीं, एक ही स्थान पर कई वर्षों से कार्यरत अधिकारियों का तबादला करना प्रशासनिक आवश्यकता है और जनहित में भी अनिवार्य है। न्यायालयों से जुड़े मामलों और दिव्यांगजनों के तबादलों संबंधी आदेशों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सेवानिवृत्ति की दहलीज पर अधिकारियों और कर्मचारियों को यथासंभव उनके जिले में रिक्त पद पर समीपवर्ती स्टेशन उपलब्ध करवाना और दंपती मामले में तबादलों पर सकारात्मक रवैया अपनाना भी दिशा-निर्देशों और नीति का हिस्सा है।

ऐसा पिछली सरकार के समय में भी होता रहा है। सामान्य तबादले नहीं किए जा रहे हैं और अति आवश्यक वाले मामलों में प्रशासनिक सचिवों को मुख्यमंत्री से संस्तुति लेना अनिवार्य है। 

सरकार पर तबादलों का दबाव

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सरकारी कर्मचारियों और अफसरों के तबादलों में राजनीतिक दखल कम होता नहीं दिख रहा है। राजनीतिक रसूखदार अपने रिश्तेदारों के तबादलों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

रोजाना हर विभाग में तबादलों के दर्जनों मामले आ रहे हैं, जिसमें सर्वाधिक शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, सिंचाई आदि महकमों के कर्मचारियों के हैं। तबादलों पर रोक लगाने के बाद सरकार ने मंगलवार को तबादलों के लिए पात्र श्रेणियां घोषित कर विकल्प खुला रखा है।

पुरानी सरकार की तरह मुख्यमंत्री की संस्तुति अनिवार्य कर दी है, जिससे अब मुख्यमंत्री कार्यालय में तबादले करवाने वालों की बाढ़ आ गई है। भले ही सामान्य तबादलों पर रोक का एलान बरकरार है, लेकिन विशिष्ट मामलों की आड़ तबादलों का खेल रोकना आसान नहीं है। 

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