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दिल्ली: सिग्नेचर ब्रिज पर कपड़े उतारने वाले कौन- लड़कियां या ट्रांसजेंडर्स?

Thu, 15 Nov 2018 06:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 15 Nov 2018 06:11 PM IST
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Delhi, who is becoming naked on signature bridge- girls or transgenders 
सिग्नेचर ब्रिज - फोटो : Amar Ujala

निर्माण से लेकर उद्घाटन तक और उद्घाटन से लेकर इस खबर को लिखे जाने तक दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज अलग-अलग वजहों से चर्चाओं में बना हुआ है।

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दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज आम लोगों के लिए खुला हुआ है। सफ़र को आसान बनाने के लिए बना ये ब्रिज अब लोगों के लिए इंग्लिश का सफर यानी दिक़्क़त बना हुआ है। बीच ब्रिज में गाड़ियों को रोककर जिंदगी को खतरे में डालते हुए सेल्फी लेने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। 
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इसी क्रम में ताजा घटना वो वीडियो हैं जिसमें कुछ लोग अपने कपड़े उतारकर सिग्नेचर ब्रिज में मस्ती करते हुए दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो के बारे में दो तरह की बातें की जा रही हैं। पहली ये कि वीडियो में कपड़े उतारने वाली लड़कियां हैं। दूसरी ये कि कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर्स हैं।
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कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर या लड़कियां?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ये स्पष्ट नहीं है कि कपड़े उतारने वाले कौन हैं? ये वीडियो कुछ दूरी से बनाए गए हैं। वैसे सिग्नेचर ब्रिज पर बने वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता फैलाने का केस दर्ज कर लिया है। अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की पुष्टि की गई है।

धारा 294 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। जल्दी गिरफ्तारी की जाएगी। ये दोनों धाराएं सार्वजनिक स्थलों पर अश्लीलता फैलाने पर लगाई जाती हैं। 

अभी जांच की जा रही है। इस धारा में दोषी पाए जाने पर तीन महीने की सजा होती है। ये केस पुलिस की तरफ से खुद दर्ज किया गया है। अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिख रहे लोग ट्रांसजेंडर्स हैं या लड़कियां।  

दिल्ली पुलिस ने बताया कि ये कोई तीन चार लोग थे, जो सिग्नेचर ब्रिज पर मौजूद थे। फिलहाल हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। घटना की सही तारीख और वक्त क्या है, इसकी जांच बाकी है। 
 

क्या है अश्लीलता क़ानून?

Delhi, who is becoming naked on signature bridge- girls or transgenders 
signature bridge - फोटो : फोटो: कुमार संजय

ये केस ऑबसिनिटी यानी अश्लीलता के तहत दर्ज किया गया है। ऐसे केस आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज किए जाते हैं। ये धारा है क्या और इसके तहत कितनी सज़ा का प्रावधान है?

इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की वकील अवनि बंसल ने बताया, 'कोई भी इंसान अगर सार्वजनिक स्थल पर नग्नता करता या करती है। या फिर ऐसा कुछ करता है, जो अश्लील हो तो ये केस दर्ज किया जाता है। अश्लीलता क्या है, इसको लेकर कई मत हैं। इसे समझने की ज़रूरत है। अश्लीलता की परिभाषा वक्त के साथ बदली भी है। किसी भी सार्वजनिक जगह पर कोई भी ऐसा काम करना जो अश्लील है, वो दंडनीय है।'

अवनि बंसल के मुताबिक़, 'इस कानून के पीछे का मकसद ये है कि समाज के नैतिक मूल्यों की रक्षा की जा सके। कोई कुछ भी अश्लील हरकत सार्वजनिक जगहों पर न करे। अगर कोई सार्वजनिक जगहों पर कपड़े उतारकर नाचने लगता है तो ये किसी को भी अश्लीलता लग सकता है। सिग्नेचर ब्रिज में लोगों ने ऐसा क्यों किया, ये पता लगाने का विषय है। हो सकता है कि किसी अभियान के तहत ऐसा किया गया हो।'

हालांकि अश्लीलता क्या है, ये एक व्याख्या का विषय है। लेकिन क्या अश्लीलता फैलाने वालों के बीच सजा दिए जाने को लेकर कोई फर्क है?
अवनि बताती हैं, 'इस कानून में सभी के लिए एक सी सजा है। फिर चाहे अश्लीलता फैलाने वाला लड़का हो या लड़की या ट्रांसजेंडर। ऑबसिनिटी आईपीसी का ही हिस्सा है। ऑबसिनिटी एक ऐसा मुद्दा है जिसे उठाए जाने की ज़रूरत है। आप किसे अश्लील मानते हैं? यह साल 1858 का कानून है, वो अभी तक क्यों मान्य है।'
 

एम एफ हुसैन पर भी लगी थी धारा 294

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hussain - फोटो : file foto
वकील जसप्रीत सिंह राय के मुताबिक़, कोई भी इंसान अगर सार्वजिनक जगहों पर अश्लीलता करता है फिर चाहे ये किसी कला के जरिए हो या किसी काम की वजह से। जिसका मकसद किसी को परेशान करना हो या कोई इसकी वजह से परेशान हो तो धारा 294 के तहत केस दर्ज होता है। इस धारा के तहत तीन महीने की सजा होती है और जमानत मिल सकती है।

जसप्रीत सिंह कहते हैं, 'मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन को भी इसी धारा के तहत नोटिस भेजा गया था, जिसे हाईकोर्ट में उन्होंने चुनौती दी थी। कोर्ट ने हुसैन को बरी करते हुए कहा था कि इन्होंने जो भी आर्टिस्टिक काम किया है, वो सार्वजिनक स्तर पर नहीं किया। पेंटिंग बनाई और उसे किसी को बेच दिया। ऐसे मामलों में 294 की धारा नहीं लगेगी।'

यह एमएफ हुसैन की चर्चित 'भारत माता' पेंटिंग थी। लेकिन क्या किसी बार में कैबरे डांस करने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं? वकील जसप्रीत सिंह के मुताबिक, 'कैबरे डांस जब कोई देखने जाता है तो वो टिकट खरीदकर जाता है। ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता है कि इससे देखने वाले को कोई परेशानी हुई होगी।'

 

कितने रुपये में बना सिग्नेचर ब्रिज?

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signature bridge - फोटो : फोटो: कुमार संजय
दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की सरकार के समय 2004 में सिग्नेचर ब्रिज बनाने की योजना बनी थी। यह वो दौर था जब दिल्ली में मेट्रो शुरू हुए दो साल हो चुके थे। साथ ही शीला दीक्षित सरकार अपने फ्लाइओवर बनाने के कामों में तेजी ला रही थी।

इसी दौरान वजीराबाद बैराज के पास ही सिग्नेचर ब्रिज की योजना बनी। अब तक उत्तरी दिल्ली से उत्तर-पूर्वी दिल्ली को जोड़ने के लिए केवल अकेला ब्रिज था।

यह देश का पहला असिमेट्रिकल ब्रिज है जो तारों पर टिका हुआ है। इसकी कुल ऊंचाई 575 मीटर है और 154 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लास व्यूइंग बॉक्स है जहां से दर्शक दिल्ली का नजारा ले सकते हैं। ब्रिज को बनाने में 1500 करोड़ रुपए लगे हैं।

लेकिन ब्रिज के खुलने के बाद से जिस तरह जोखिम लेते हुए सेल्फी लेने और कपड़े उतारकर तस्वीरें खिंचवाने की घटनाएं हो रही हैं, ये पुलिस के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।

दिल्ली पुलिस ने सिविक अथॉरिटी से कहा है कि सेल्फी लेने और नियमों का उल्लंघन करने वालों को चेतावनी देते हुए बोर्ड लगाए जाएं ताकि सिग्नेचर ब्रिज खराब वजहों से चर्चा में न रहे।
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