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सांस्कृतिक राजधानी काशी में अाज दिखेगा 'मिनी इंडिया'
टीम डिजिटल / अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 17 Dec 2016 03:08 PM IST
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संस्कृति महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में शनिवार से आठ दिन तक देश की विविध संस्कृतियों का संगम होगा। संस्कृति मंत्रालय की ओर से काशी हिंदू विश्वविद्यालय में होने जा रहे तीसरे राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के शानदार आगाज का साक्षी बनेगा बीएचयू का स्वतंत्रता भवन।
स्वतंत्रता भवन देश भर की लोक संस्कृतियों और कलाओं के प्रतिरूपों से सज चुका है। वहीं पूरे महोत्सव को लेकर पूरे परिसर में अलग ही उल्लास नजर आ रहा है। शुक्रवार देर रात तक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा। झारखंड, कोलकाता, ओडिशा, महाराष्ट्र के कलाकार पूरी तन्मयता से स्वतंत्रता भवन सजाने-संवारने में लगे रहे।
पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह से लेकर केएन उडुप्पा सभागार, भारत कला भवन तक संस्कृति महोत्सव के रंग में पूरी तरह से रंग चुका है। बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने शुक्रवार को केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों को बताया कि महोत्सव का उद्घाटन शाम सात बजे मुख्य अतिथि संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा करेंगे।
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विशिष्ट अतिथि के तौर पर पद्मविभूषण गिरिजा देवी की खास मौजूदगी होगी। महोत्सव में देश भर के ख्यात कलाकारों की बेजोड़ प्रस्तुतियां होंगी। बच्चों के लिए फिल्म महोत्सव, युवाओं के लिए गांधी दर्शन और अभिनय की कार्यशालाएं होंगी। उन्होंने बताया कि महोत्सव में उदीयमान कलाकारों को भी मंच दिया जा रहा है। बताया कि स्वतंत्रता भवन समेत आठ दिन तक परिसर में आठ जगहों पर कार्यक्रम होंगे।
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स्वतंत्रता भवन देश भर की लोक संस्कृतियों और कलाओं के प्रतिरूपों से सज चुका है। वहीं पूरे महोत्सव को लेकर पूरे परिसर में अलग ही उल्लास नजर आ रहा है। शुक्रवार देर रात तक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा। झारखंड, कोलकाता, ओडिशा, महाराष्ट्र के कलाकार पूरी तन्मयता से स्वतंत्रता भवन सजाने-संवारने में लगे रहे।
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पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह से लेकर केएन उडुप्पा सभागार, भारत कला भवन तक संस्कृति महोत्सव के रंग में पूरी तरह से रंग चुका है। बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने शुक्रवार को केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों को बताया कि महोत्सव का उद्घाटन शाम सात बजे मुख्य अतिथि संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा करेंगे।
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विशिष्ट अतिथि के तौर पर पद्मविभूषण गिरिजा देवी की खास मौजूदगी होगी। महोत्सव में देश भर के ख्यात कलाकारों की बेजोड़ प्रस्तुतियां होंगी। बच्चों के लिए फिल्म महोत्सव, युवाओं के लिए गांधी दर्शन और अभिनय की कार्यशालाएं होंगी। उन्होंने बताया कि महोत्सव में उदीयमान कलाकारों को भी मंच दिया जा रहा है। बताया कि स्वतंत्रता भवन समेत आठ दिन तक परिसर में आठ जगहों पर कार्यक्रम होंगे।
पीएम के मन भाएगी मधुबनी, कांगड़ा, आंध्र की कलमकारी
संस्कृति महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
संस्कृति मंत्रालय की ओर से बीएचयू में होने जा रहे संस्कृति महोत्सव में बिहार की मधुबनी, हिमाचल की कांगड़ा, आंध्र की कलमकारी, महाराष्ट्र की वर्ली चित्रशैली और अवध लोक कला के रंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन भाएगी।
इन सबके बीच काशी की माटी भी पूरी रंगत भी उन्हें यहां देखने को मिलेगी। 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां शिरकत कर रहे हैं। स्वतंत्रता भवन में महाराष्ट्र के कलाकार पोट्रेट रंगोली के जरिये पूरी काशी को यहां जीवंत करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
काशी के गंगा घाट, साधु संतों के अलावा भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, संत रैदास, कबीरदास और महामना को भी रंगों में उकेरा जा रहा है। स्वतंत्रता भवन के बाहर खुले मैदान में आपको इन सभी संस्कृतियों का मेल आपके दिल को जरूर सुकून देगा।
यहां मध्य प्रदेश की मंडना शैली, ओडिशा की सौरा व फाड़ शैली के अलावा पट चित्रों का नजारा भी दिखेगा। इसी तरह आंध्र की चेरियाल शैली, राजस्थान के पिथौरा चित्र और छत्तीसगढ़ की रजवाड़ी शैली के रंग भी मन मोहेंगे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 22 दिसंबर को आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी उम्मीदें हैं। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री बीएचयू के अपने इस तीसरे दौरे में विश्वविद्यालय को सौगात दे सकते हैं। हो सकता है कि पूर्वांचल को एम्स का तोहफा मिल सकता है।
पिछले दिनों सर सुंदरलाल अस्पताल को एम्स की तर्ज पर अपग्रेड करने और यहां के बजट और संसाधन बढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर पीएमओ ने सकारात्मक संकेत दिए थे। अस्पताल के अधिकारियों को पीएमओ भी बुलाया था। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री यहां उसकी घोषणा कर सकते हैं।
इन सबके बीच काशी की माटी भी पूरी रंगत भी उन्हें यहां देखने को मिलेगी। 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां शिरकत कर रहे हैं। स्वतंत्रता भवन में महाराष्ट्र के कलाकार पोट्रेट रंगोली के जरिये पूरी काशी को यहां जीवंत करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
काशी के गंगा घाट, साधु संतों के अलावा भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, संत रैदास, कबीरदास और महामना को भी रंगों में उकेरा जा रहा है। स्वतंत्रता भवन के बाहर खुले मैदान में आपको इन सभी संस्कृतियों का मेल आपके दिल को जरूर सुकून देगा।
यहां मध्य प्रदेश की मंडना शैली, ओडिशा की सौरा व फाड़ शैली के अलावा पट चित्रों का नजारा भी दिखेगा। इसी तरह आंध्र की चेरियाल शैली, राजस्थान के पिथौरा चित्र और छत्तीसगढ़ की रजवाड़ी शैली के रंग भी मन मोहेंगे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 22 दिसंबर को आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी उम्मीदें हैं। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री बीएचयू के अपने इस तीसरे दौरे में विश्वविद्यालय को सौगात दे सकते हैं। हो सकता है कि पूर्वांचल को एम्स का तोहफा मिल सकता है।
पिछले दिनों सर सुंदरलाल अस्पताल को एम्स की तर्ज पर अपग्रेड करने और यहां के बजट और संसाधन बढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर पीएमओ ने सकारात्मक संकेत दिए थे। अस्पताल के अधिकारियों को पीएमओ भी बुलाया था। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री यहां उसकी घोषणा कर सकते हैं।