फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   confluence of ancient heritage space and defense technology has enthralled young Tamil minds

BHU: प्राचीन विरासत...अंतरिक्ष-रक्षा तकनीक का संगम देख खिल उठा तमिल युवा मन, जानें क्या है तीसरी भाषा

Thu, 04 Dec 2025 05:53 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 04 Dec 2025 05:53 AM IST
सार

Kashi Tamil Sangamam 2025: काशी तमिल संगमम् को लेकर वाराणसी में विभिन्न आयोजन हो रहे हैं। तमिल मेहमानों ने नमो घाट के साथ बीएचयू कैंपस का भ्रमण किया। यहां उन्हें काफी रोचक चीजें देखने और जानने को मिलीं।

विज्ञापन
confluence of ancient heritage space and defense technology has enthralled young Tamil minds
नमो घाट पर तमिल व काशी की जनता ने एक साथ सुना भजन। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: घाट पर गंगा स्नान और शिव दर्शन कर 216 तमिल छात्र जब बीएचयू पहुंचे तो यहां पर धर्म शिक्षा और तकनीक का मिश्रण देख आश्चर्यचकित हो उठे। 1300 एकड़ के कैंपस में मूर्ति कला, महामना की विरासत का साक्षात दर्शन किया तो दूसरी ओर सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर और आईआईटी के लैब में जाकर कैंसर, अंतरिक्ष, रक्षा और एथिकल हैकिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीक पर हो रहे रिसर्च को जाना। भारत कला भवन, दृश्य कला संकाय के साथ ही वीटी भी गए।

विज्ञापन


वहीं, पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में पूरे तीन घंटे के एकेडमिक कार्यक्रम में उपस्थित हो कर तमिलनाडु और काशी के हजारों साल के पौराणिक और साहित्यिक इतिहास को जाना। यहां पर मंचासीन वक्ताओं ने “तमिल कल्पना में काशी: महाकवि सुब्रमण्य भारती और उनकी विरासत” विषय पर संवाद किया तो उनका रियल टाइम अनुवाद भी स्क्रीन पर दिखता रहा। लेखक अमीश त्रिपाठी, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, एनसीईआरटी के कार्यवाहक प्रमुख प्रो. मेगनाथन और प्रो. पीवी राजीव को सुनने के लिए तमिल छात्र श्रोता बन गए।
विज्ञापन


प्रो. मेगनाथन ने बीएचयू में एकेडमिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सभी भारतीयों को एक तीसरी भाषा जरूर सीखनी चाहिए। ये एक भाषा जिसके अनेक फायदे होंगे। गैर-तमिल भाषी लोगों के बीच तमिल भाषा सीखने के लिए एनसीईआरटी ने तमिल भाषा ट्यूटोरियल विकसित किया है। उन्होंने सभी तमिल छात्रों को एनसीईआरटी द्वारा भारती पर तैयार की गई एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई। ये भी बताया कि कवि भारतियार को 25 से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान था। भारतीय भाषा विभाग के डॉ. जगदीशन टी ने कहा कि भारत की वास्तविक समझ के लिए तमिल और संस्कृत दोनों का ज्ञान जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

confluence of ancient heritage space and defense technology has enthralled young Tamil minds
लेखक अमिश त्रिपाठी को सम्मानित करते हुए। - फोटो : संवाद

एआई ट्रांसलेटर में भी हुईं गलतियां
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में ‘शब्द’ नाम के एआई-आधारित अनुवाद डिवाइस की बात कही। उनके वक्तव्य को इसी डिवाइस से हिंदी से अंग्रेजी और तमिल में रियल टाइम अनुवाद कर पीछे बड़ी स्क्रीन पर डिस्प्ले किया गया। हालांकि अनुवादित वाक्यों में कई त्रुटियां भी थीं। हालांकि, प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भारत के राज्यों के बीच समानताएं विविधता को कम नहीं करतीं। बल्कि वे भारतीय पहचान को और मजबूत बनाती हैं।

रामेश्वरम है दक्षिण का काशी
प्रबंधन अध्ययन संस्थान के प्रो. पीवी राजीव ने दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाले प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को बताया। कहा कि रामेश्वरम को अक्सर “दक्षिण का काशी” कहा जाता है। इस दौरान नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित तमिल में बच्चों की पुस्तकों के अनुवाद का कुलपति ने लोकार्पण किया।

confluence of ancient heritage space and defense technology has enthralled young Tamil minds
बीएचयू में जानकारियां लेते तमिल युवा। - फोटो : संवाद

चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं देख हुए मुग्ध
भारत कला भवन और दृश्य कला संकाय की आर्ट गैलरी पहुंचे तमिल छात्रों ने चंबू (गंगा–जमुनी कलश), चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं, दक्षिण भारतीय पाषाण मूर्तिकला, कांचीपुरम ब्रोकेड वस्त्र और मैसूर शैली में निर्मित दुर्गा सप्तशती के लघुचित्र आदि देख उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद और मेलमिलाप को महसूस किया। 

इस दौरान अमीश त्रिपाठी भी साथ रहे। इसके बाद भारतीय भाषा विभाग में पैनल चर्चा की गई। इस दौरान डॉ. जगदीशन ने 1945 में स्थापित तमिल खंड की समृद्ध विरासत का परिचय देते हुए तमिल भाषा अध्ययन, शैव सिद्धांत और तमिल दर्शन में इसके योगदानों को बताया। 

प्रो. गंगाधरण ने बताया कि तमिल भाषा को काशी में विशेष स्थान प्राप्त है। भरतियार के विचारों ने जाति और भाषा के विभाजनों को पार कर भारत की एकता को आकार दिया। सुब्रह्मणयम भारती की पोती डॉ. जयंती मुरली ने भरतियार के 16 वर्ष की आयु में काशी आगमन, उनके प्रसिद्ध गीत “वेल्लै तमरै पूविन्निले” की रचना, कई भाषाओं में उनकी दक्षता के बारे में बताया।

आईआईटी–बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनोज कुमार मेशराम ने जोस्टेल, क्रिकबज़, शॉपक्लूज और क्लीन इलेक्ट्रिक सहित आईआईटी–बीएचयू के पूर्व विद्यार्थियों द्वारा संचालित स्टार्टअप्स के बारे में बताया। सत्र का समापन आर्यो ग्रीन टेक लैब में भ्रमण के साथ हुआ।

अटल इन्क्यूबेशन सेंटर में जानी डेटा प्राइवेसी
सीडीसी के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर में स्टार्टअप इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर-सुरक्षा और कृषि में नई तकनीक को जाना। श्वेता सिंह ने विकसित लिक्विड बायोप्सी पर आधारित उन्नत तकनीकों पर प्रस्तुति दी। मृत्युंजय सिंह ने डिजिटल युग में डेटा प्राइवेसी, अकाउंट हैकिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मिथिलेश सिंह ने एग्रो-टूरिज्म और कृषि में नवीनतम प्रथाओं पर बात की।

तमिल छात्रों ने मां गंगा का किया पूजन, दक्षिण भारतीय मंदिरों का जाना इतिहास
संगमम के दूसरे दिन बुधवार को तमिलनाडु से आए छात्रों का समूह हनुमान घाट पहुंचा। यहां सभी ने गंगा में स्नान कर मां का पूजा पाठ करते हुए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। गंगा स्नान के बाद सभी मेहमानों ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।

पं वेंकट रमण घनपाठी ने बताया कि सभी मेहमानों को मंदिरों के इतिहास दिव्यता, भव्यता और इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद तमिल मेहमानों ने हनुमान घाट स्थित सुब्रह्मण्य भारती के घर उनके परिवार के सदस्यों से उन्होंने मुलाकात की। साथ ही सुब्रह्मण्य भारती के घर के समीप पुस्तकालय का भी भ्रमण किया। छात्रों ने कांची मठ में वहां के इतिहास के बारे में भी जाना।

डेलीगेट्स ने देखी गंगा-कावेरी समप्रवाह प्रदर्शनी
डेलीगेट्स ने भारत कला भवन में गंगा-कावेरी समप्रवाह शीर्षक विशेष प्रदर्शनी देखी। प्रदर्शनी में संग्रहालय के संग्रह से चयनित चम्बू (गंगा-जमुनी कलश), चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं, दक्षिण भारतीय पाषाण मूर्तिकला, कांचीपुरम ब्रोकेड वस्त्र और मैसूर शैली में निर्मित दुर्गा सप्तशती के लघुचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसे देखकर डेलीगेट्स गदगद हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed