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कैबिनेट मंत्रियों को भी जजों की तरह खुलकर बोलना चाहिए: यशवंत सिन्हा
अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
Updated Sun, 14 Jan 2018 09:13 AM IST
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यशवंत सिन्हा
सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के बहाने असंतुष्ट चल रहे वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने शनिवार को केंद्रीय नेतृत्व और सरकार पर हमला बोला। उन्होंने पार्टी सहयोगियों और कैबिनेट मंत्रियों से कहा कि उन्हें डर को भुलाकर जजों की तरह लोकतंत्र की भलाई के लिए सामने आकर खुलकर बोलना चाहिए। नोएडा सेक्टर 15ए स्थित अपने आवास पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई कैबिनेट मंत्री डरकर काम कर रहे हैं।
उन्हें भय है कि अगर वह अपना मुंह खोलेंगे तो उनका राजनीतिक करियर खतरे में पड़ जाएगा लेकिन इन मंत्रियों को प्रजातंत्र को बचाने के लिए आगे आकर कदम उठाने चाहिए। कौन मंत्री किससे डरा हुआ है, के जवाब को उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि हर बात पर मुंह खोलना अच्छी बात नहीं। कौन-कौन मंत्री डरा हुआ है और कौन उन्हें डराकर रखे हुए है, यह जनता सब जानती है।
पढ़ें- सुप्रीम संग्राम सुलझाने आगे आया बार काउंसिल, सात सदस्यों की टीम बनाई
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उन्होंने कहा कि चार वरिष्ठ जजों ने जिस तरह से मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है, उससे साफ है कि कुछ गड़बड़ है। जज अगर कहते हैं कि देश में लोकतंत्र खतरे में है तो हमें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। जजों ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन पर सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को मिलकर आम सहमति बनानी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर देश की जनता का विश्वास बना रहे।
उन्होंने संसद के शीत सत्र और बजट सत्र के छोटा रखने पर भी चिंता जताई। भाजपा नेता ने कहा कि यदि संसद के कामकाज से समझौता किया जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है तो लोकतंत्र वाकई में खतरे में है।
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उन्हें भय है कि अगर वह अपना मुंह खोलेंगे तो उनका राजनीतिक करियर खतरे में पड़ जाएगा लेकिन इन मंत्रियों को प्रजातंत्र को बचाने के लिए आगे आकर कदम उठाने चाहिए। कौन मंत्री किससे डरा हुआ है, के जवाब को उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि हर बात पर मुंह खोलना अच्छी बात नहीं। कौन-कौन मंत्री डरा हुआ है और कौन उन्हें डराकर रखे हुए है, यह जनता सब जानती है।
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उन्होंने कहा कि चार वरिष्ठ जजों ने जिस तरह से मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है, उससे साफ है कि कुछ गड़बड़ है। जज अगर कहते हैं कि देश में लोकतंत्र खतरे में है तो हमें इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। जजों ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन पर सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को मिलकर आम सहमति बनानी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर देश की जनता का विश्वास बना रहे।
उन्होंने संसद के शीत सत्र और बजट सत्र के छोटा रखने पर भी चिंता जताई। भाजपा नेता ने कहा कि यदि संसद के कामकाज से समझौता किया जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है तो लोकतंत्र वाकई में खतरे में है।