नवजोत सिद्धू और आशु में ठनी, सरकारी जमीन को गलत हाथों में दिए जाने से जुड़ा है मामला
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पंजाब के कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु और नवजोत सिंह सिद्धू लुधियाना में निगम की सम्पत्ति को इस्तेमाल के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट में दिए जाने को लेकर आमने-सामने है। बता दें नवजोत सिंह सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निगम की सम्पत्ति को हाउसिंग प्रोजेक्ट को दिया है।
उधर सिद्धू के बयान पर बिफरे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री आशु ने शनिवार को स्थानीय निकायों के मंत्री सिद्धू को पूर्व में कथित सीएएलयू विवाद में अपनी भागीदारी को साबित करने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाने की बात कही। उन्होंने सिद्धू से सीधे कहा यदि इस मामले में जांच रिपोर्ट में उनका नाम सामने आया है तो वह इस पर कार्रवाई करने की हिम्मत भी दिखाए।
आशु ने कहा “ मेरा सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड) विवाद से जुड़ी संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है। यह सिद्धू को बताना चाहिए कि मेरा नाम कैसे खींचा जा रहा है? और अगर वह (सिद्धू) जांच रिपोर्ट में ऐसा कुछ पाते हैं, तो उन्हें मामले की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को सौंपनी चाहिए और मेरे सहित तमाम लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन अगर मेरा नाम किसी शरारती इरादे के साथ जोड़ा जाता है, तो इस पर मेरी ओर से अधिकारिक कार्रवाई के लिए भी तैयार रहें। ”
अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक आशु ने यह बात पटियाला में ऑल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। आशु और सिद्धू लुधियाना में विकास कार्यों में देरी के लिए लंबे समय से एक-दूसरे के आमने-सामने हैं।
आशु पर मढ़े गए सिद्धू के आरोपों के एक दिन बाद आम आदमी पार्टी (आप) के उप-नेता सरबजीत कौर मनुके ने शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा "कोई मंत्री या संतरी (मंत्री या अधिकारी)" नहीं बख्शा। इसके साथ ही मनुके ने सिद्धू को 'ईमानदार मंत्री' करार दिया और अधिकारियों पर उंगली उठाई व आशु का इस्तीफा मांगा।
बता दें सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाया था कि लुधियाना के ईशर नगर क्षेत्र में एक आवासीय परियोजना ग्रैंड मैनर होम्स को सीएलयू की सम्पत्ति दे दी गई हालांकि इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में उसे "जाली" दस्तावेजों का उपयोग करके हासिल कर लिया गया।
वहीं आशु से पूछे जाने पर कि क्या जांच रिपोर्ट में उनका नाम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है, आशु ने कहा, "सिद्धू इसे बेहतर तरीके से समझा सकते हैं।" सिद्धू ने बताया कि सीएलयू के लिए आवेदन 17 जनवरी, 2018 को प्रस्तुत किया गया था और संलग्न दस्तावेज जाली थे। उन्होंने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री दो दिन बाद 19 जनवरी को की गई थी, जबकि सीएलयू के लिए आवेदन करते समय रजिस्ट्री के कागजात संलग्न करना अनिवार्य है। "इसका मतलब है कि आवेदक सीएलयू के लिए आवेदन करने के समय जमीन का मालिक नहीं था।
सिद्धू ने प्रमुख सचिव से 7 जुलाई, 2018 को उनके द्वारा जारी किए गए आदेशों की अवहेलना करने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है जिसमें सीएलयू अनुमोदन के मामले को रखने की बात भी सामने आई।