जेएनयू-कन्हैया विवाद का फायदा उठाकर भारत मे हिंसा फैलना चाहता था ISIS- NIA
यह शंका तो बहुत पहले से ही जताई जा रही है कि भारत में आतंकी संगठन आईएसआईएस में गतिविधियां बढ़ाने की जुगत में है लेकिन एक संदिग्ध आईएस रिक्रूटर ने इस बात को और पुख्ता कर दिया है।
आईएस के लिए भारतीय युवकों को भर्ती करने वाले संदिग्ध आतंकियों का कहना है कि उन्हें हाल ही में जेएनयू-कन्हैया विवाद में शामिल होकर उसका फायदा उठाने के लिए कहा गया था। आईएस से जुड़े आतंकी संगठन जुनुद अल खलीफा-ए-हिंद (JKH) के लिए रिक्रूटर का काम करने वाले आशिक अहमद उर्फ राजा, मोहम्मद अब्दुल अहद और मोहम्मद अफजल के दिए बयानों से बात सामने आई है।
जेकेएच को आईएसआईएस का भारतीय मॉड्यूल भी कहा जा रहा है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार 19 साल का अहमद उर्फ राजा को कन्हैया को जेल भेजे जाने के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल हो गाड़ियों को आग के हवाले करने और तोड़-फोड़ के लिए कहा गया था।
इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी को छुड़ाना चाहते थे संदिग्ध आतंकी
संदिग्ध आईएस के तीनों आतंकियों के बयान एनआईए ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किया है। बता दें कि यह पहली बार है जब आईएस से जुड़े किसी आतंकी का बयान किसी एजेंसी द्वारा दर्ज किया गया है। अपने बयान में इन संदिग्धों ने जेकेएच के गठन और तुमकुर, बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल और पंजाब में इसकी बैठकों में शामिल होने की बात कबूल की है।
एनआईए को दिए बयान में संदिग्ध आतंकी आशिक ने कहा कि अहमद अली जो खुद को तौहीद बिलाद अल-हिंद का सरगना बताता था, उसने आशिक से इसी साल 19 फरवरी को ट्रिलियन ऐप के माध्यम से संपर्क किया था।
आशिक ने बताया कि उसे बताया गया था कि जांच एजेंसियां उसपर नजर बनाए हुए हैं। देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे उसका फायदा उठाते हुए उनमें शामिल होकर आशिक को गाड़ियां जलाने को भी कहा गया था।
जांच एजेंसियों को तो ये भी शक है कि अहमद अली कोई और नहीं भारत में आईएस का सरगना शफी अरमार ही है। माना जा रहा था कि वह हाल ही में हुए एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा जा चुका है।
आशिक ने तो ये भी बताया कि उसे छिपकर रहने के साथ ही तैराकी और नक्शे बनाना सीखने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही उनका टारगेट भारत में शिया समुदाय के लोगों पर हमला और इंडियन मुजाहिदीन के पूर्व सरगना यासीन भटकल को जेल से आजाद कराना भी था।