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एम्स के डॉक्टरों की बड़ी सफलता, अब बिना साइड इफेक्ट दूर होगा जोड़ों का दर्द

Wed, 20 Apr 2016 12:34 PM IST
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Apr 2016 12:34 PM IST
सार

  • छह साल के शोध के बाद एम्स के चिकित्सकों का दावा तैयार दवा से नहीं होंगे साइड इफेक्ट्स 
  • सुरंजन, हड़जोड़, दारु हल्दी और धनिया के पौधों से तैयार की गई है दवा 
  • एथिकल क्लीयरेंस के बाद तैयार दवा का मानव पर किया जाएगा परीक्षण 
  • आईसीएमआर के सहयोग से एम्स फार्माकोलॉजी विभाग ने तैयार की दवा

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aiims doctor gets success in pre-clinical trial of arthritis medicine

विस्तार

रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस (जोड़ों का दर्द) से पीड़ित लोगों के लिए एम्स से अच्छी खबर है। पहली बार रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस के इलाज के लिए ऐसी कारगर दवा तैयार की गई है जिसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है और दवा भी बेहद कारगर है।

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दवा पर किया जा रहा प्री-क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है और अब एथिकल क्लीयरेंस के बाद दवा का मानव पर परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों के लिए दवा बाजार में उपलब्ध हो सकेगी।
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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की मदद से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉर्मोकोलॉजी विभाग ने इस दवा को तैयार की है। सबसे अच्छी बात है कि यह दवा औषधीय पौधों से तैयार की गई है। दवा बनाने में सुरंजन, हड़जोड़, दारु हल्दी और धनिया के पौधों का प्रयोग किया गया है। फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से किए गए इस शोध को फरवरी-2016 में इंडियन जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी में प्रकाशित भी किया गया है।
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शोध में शामिल फार्माकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. वाई.के. गुप्ता और डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि पिछले करीब छह वर्षों से रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस बीमारी के इलाज के लिए दवा पर शोध किया जा रहा है। अब इसके सकारात्मक परिणाम आ गए हैं। प्री-क्लीनिकल ट्रॉयल में सफलता भी मिल गई है।  एथिकल क्लीयरेंस के बाद तैयार दवा का मानव पर उपयोग किया जाएगा।

aiims doctor gets success in pre-clinical trial of arthritis medicine
जोड़ों के दर्द के लिए आ गई 'करामाती दवा' - फोटो : getty

डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस के इलाज के लिए कोई भी कारगर दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है। जोड़ों के दर्द से राहत के लिए दर्द कम करने अथवा शरीर में इम्यून पावर बढ़ाने के लिए दवा दी जाती है जिसका शरीर पर साइड इफेक्ट्स ज्यादा पड़ता है। इसकी वजह से दूसरी बीमारियों का भी खतरा रहता है।

डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि दवा के शोध के लिए चूहों के ग्रुप पर अध्ययन किया गया। पहले चूहों में केमिकल के माध्यम से जोड़ों का दर्द विकसित किया गया, इसके बाद जोड़ों का अल्ट्रासाउंड कर उसका परीक्षण किया गया। इसके बाद चूहों के उस ग्रुप को तैयार की दवा दी गई। इसके बाद देखा गया कि नई दवा से चूहों के जोड़ों के दर्द को राहत मिली।

अंतरराष्ट्रीय फोरम से सहमति के बाद की शोध
शोध में शामिल चिकित्सक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय फोरम पर इस दवा के शोध को लेकर बात हुई थी। इसपर यह सामने आया कि रिमोट्यॉड आर्थ्राइटिस की अभी तक कहीं भी कोई कारगर व साइड इफेक्ट न करने वाली दवा नहीं है। यानि फोरम से जुड़े देशों में इस तरह की दवा उपलब्ध नहीं है, तभी शोध की अनुमति मिली। इसके बाद भारत ने इस बीमारी के इलाज के लिए दवा विकसित करने का मन बनाया। छह साल की मेहनत के बाद इसमें उसे प्री-क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिली है।

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