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न्यायिक सेवा में पहुंची तीसरी पीढ़ी, एडीजे के बेटे ने पाई 58वीं रैंक, आयुषी ने हासिल की 181वीं रैंक
Sun, 21 Jul 2019 11:22 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 21 Jul 2019 11:22 PM IST
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पीसीएस जे 2018 में सफल होने वाले उन्नाव के अनुभव
- फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव मे अपर जिला जज प्रथम मृदुलेश कुमार के बेटे अनुभव सिंह ने पीसीएस-जे 2018 में सफलता हासिल की है। अनुभव को 58वीं रैंक मिली है। अनुभव के बाबा हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। पिता उन्नाव जिले में एडीजे हैं। अनुभव ने बाबा व पिता के बाद न्यायिक सेवा में कदम रखा है।
मूलरूप से हरदोई जिले की शाहाबाद तहसील के टेनौरा गांव के रहने वाले अनुभव सिंह ने इंटर की पढ़ाई गाजियाबाद के डीपीएस स्कूल से की थी। लखनऊ से उन्होंने एलएलबी की और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके बाद उन्होंने पीसीएस-जे के लिए प्रयास शुरू किया। हालांकि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली।
दूसरे प्रयास में उन्होंने 58वीं रैंक हासिल की। अनुभव ने बताया कि उनके बाबा गंगा बख्श सिंह हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। पिता मृदुलेश कुमार मौजूदा समय में उन्नाव में अपर जिला जज प्रथम हैं। बाबा व पिता को प्रेरणा मान अनुभव ने भी न्यायिक सेवा में ही आने का निर्णय लिया था। लक्ष्य तय कर वह कदम बढ़ाते रहे। अनुभव की मां सुधा सिंह गृहणी हैं।
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मूलरूप से हरदोई जिले की शाहाबाद तहसील के टेनौरा गांव के रहने वाले अनुभव सिंह ने इंटर की पढ़ाई गाजियाबाद के डीपीएस स्कूल से की थी। लखनऊ से उन्होंने एलएलबी की और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके बाद उन्होंने पीसीएस-जे के लिए प्रयास शुरू किया। हालांकि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली।
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दूसरे प्रयास में उन्होंने 58वीं रैंक हासिल की। अनुभव ने बताया कि उनके बाबा गंगा बख्श सिंह हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। पिता मृदुलेश कुमार मौजूदा समय में उन्नाव में अपर जिला जज प्रथम हैं। बाबा व पिता को प्रेरणा मान अनुभव ने भी न्यायिक सेवा में ही आने का निर्णय लिया था। लक्ष्य तय कर वह कदम बढ़ाते रहे। अनुभव की मां सुधा सिंह गृहणी हैं।
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पीसीएस जे 2018 में सफल होने के बाद विजयलक्ष्मी
- फोटो : अमर उजाला
तीन बार की असफलता के बाद विजयलक्ष्मी को पीसीएस-जे 2018 की परीक्षा में सफलता मिली। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस-जे 2018 की परीक्षा में उन्हें 503वीं रैंक मिली। पुरवा के भीखमपुर निवासी विजयलक्ष्मी लखनऊ एसजीपीजीआई में स्टाफ नर्स हैं।
पति राजीव वर्मा प्रदूषण नियंत्रण विभाग लखनऊ में अकाउंटेंट हैं। उन्होंने बताया कि आठ घंटे की नौकरी के बाद वह घर में बेटी अनिवेषा (13) व प्रत्युषा (11) को भी समय देती थी। इसके बाद रात में 10 से 1 व नौकरी के समय में जो खाली समय मिलता था उसमें वह अपनी पढ़ाई करती थी। लगातार तीन बार उन्होंने पीसीएस-जे क्वालिफाई करने की कोशिश हालांकि वह सफल नहीं हुई।
चौथे प्रयास में सफलता उनके हाथ लगी। कानपुर से एलएलबी करने के बाद विजयलक्ष्मी ने लखनऊ से एलएलएम किया था। इसके बाद उन्होंने पीसीएस जे की तैयारी शुरू की। सफलता का श्रेय वह मामा सियाराम व सीताराम को देती हैं। बड़े मामा सियाराम सीतापुर में वाणिज्य कर अधिकारी व सीताराम चित्रकूट में सिविल कोर्ट में बाबू हैं। पिता कमलचंद्र हसनगंज में कानूनगो हैं। जबकि मां कलावती गृहणी हैं।
पति राजीव वर्मा प्रदूषण नियंत्रण विभाग लखनऊ में अकाउंटेंट हैं। उन्होंने बताया कि आठ घंटे की नौकरी के बाद वह घर में बेटी अनिवेषा (13) व प्रत्युषा (11) को भी समय देती थी। इसके बाद रात में 10 से 1 व नौकरी के समय में जो खाली समय मिलता था उसमें वह अपनी पढ़ाई करती थी। लगातार तीन बार उन्होंने पीसीएस-जे क्वालिफाई करने की कोशिश हालांकि वह सफल नहीं हुई।
चौथे प्रयास में सफलता उनके हाथ लगी। कानपुर से एलएलबी करने के बाद विजयलक्ष्मी ने लखनऊ से एलएलएम किया था। इसके बाद उन्होंने पीसीएस जे की तैयारी शुरू की। सफलता का श्रेय वह मामा सियाराम व सीताराम को देती हैं। बड़े मामा सियाराम सीतापुर में वाणिज्य कर अधिकारी व सीताराम चित्रकूट में सिविल कोर्ट में बाबू हैं। पिता कमलचंद्र हसनगंज में कानूनगो हैं। जबकि मां कलावती गृहणी हैं।
पीसीएस जे 2018 में सफल होने के बाद आयुषी
- फोटो : अमर उजाला
उन्नाव के गंगाघाट के बिंदानगर निवासी आयुषी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में पीसीएस-जे में 181वीं रैंक हासिल कर जज बनने का सपना पूरा किया। शनिवार को जब पीसीएस-जे का परिणाम घोषित हुआ तो आयुषी का परिवार खुशी से झूम उठा।
गंगाघाट के बिंदानगर निवासी धर्मेंद्र पांडेय कस्बे में ही इलेक्ट्रिक पार्ट्स की दुकान चलाते हैं। उनकी बड़ी बेटी आयुषी पांडेय (22) ने 2018 के दिसंबर माह में पीसीएस जे के प्रिलिम्स में हिस्सा लिया था। प्रिलिम्स पास करने के बाद उसने मेंस और बाद में इंटरव्यू में भी सफलता पाई। शनिवार को घोषित हुए परिणाम में आयुषी को 181वीं रैंक मिली। लखनऊ यूनिवर्सिटी से आयुषी ने एलएलबी ऑनर्स की पढ़ाई की थी।
2018 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी होने के बाद ही उन्होंने पीसीएस जे की परीक्षा दी और सफलता हासिल कर ली। आयुषी बताती हैं कि इंटर की परीक्षा देने के बाद ही उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। उन्होंने 10 से 12 घंटे तक दिन में पढ़ाई की। एलएलबी की पढ़ाई के साथ पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी थी। आयुषी ने कानपुर के आर्मी पब्लिक स्कूल से वर्ष 2013 में इंटर की पढ़ाई पूरी की थी।
गंगाघाट के बिंदानगर निवासी धर्मेंद्र पांडेय कस्बे में ही इलेक्ट्रिक पार्ट्स की दुकान चलाते हैं। उनकी बड़ी बेटी आयुषी पांडेय (22) ने 2018 के दिसंबर माह में पीसीएस जे के प्रिलिम्स में हिस्सा लिया था। प्रिलिम्स पास करने के बाद उसने मेंस और बाद में इंटरव्यू में भी सफलता पाई। शनिवार को घोषित हुए परिणाम में आयुषी को 181वीं रैंक मिली। लखनऊ यूनिवर्सिटी से आयुषी ने एलएलबी ऑनर्स की पढ़ाई की थी।
2018 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी होने के बाद ही उन्होंने पीसीएस जे की परीक्षा दी और सफलता हासिल कर ली। आयुषी बताती हैं कि इंटर की परीक्षा देने के बाद ही उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। उन्होंने 10 से 12 घंटे तक दिन में पढ़ाई की। एलएलबी की पढ़ाई के साथ पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी थी। आयुषी ने कानपुर के आर्मी पब्लिक स्कूल से वर्ष 2013 में इंटर की पढ़ाई पूरी की थी।