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Chhattisgarh: स्मार्ट मीटर नहीं, ज्यादा बिजली खपत बढ़ा रही बिल; विभाग ने बताया पूरा गणित, पढ़ें पूरी खबर

Thu, 16 Jul 2026 08:14 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 16 Jul 2026 08:14 PM IST
सार

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि केवल वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है।

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Not smart meters, but high electricity consumption is driving up bills; department explains the math
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि केवल वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है तो उसका प्रमुख कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर। स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उपभोक्ता को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध कराता है। मोर बिजली ऐप के माध्यम से उपभोक्ता हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन-से विद्युत उपकरण सबसे अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और किन उपायों से खपत कम की जा सकती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार पहले उपभोक्ताओं को केवल महीने के अंत में बिजली बिल मिलने पर ही खपत का पता चलता था, जबकि स्मार्ट मीटर में उपभोक्ता पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग पर नियंत्रण संभव होता है और बिल भी कम किया जा सकता है। बिजली विभाग ने बताया कि प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के अनुसार लागू होती हैं। शून्य से 100 यूनिट तक 4.40रुपये प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये प्रति यूनिट 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये,601 यूनिट से अधिक पर 8.80रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित हैं। जैसे ही बिजली खपत बढ़कर अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।
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विभाग के अनुसार इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी के कारण अधिकांश घरों में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा। इसी वजह से बिजली की खपत बढ़ी और कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह स्थिति मौसम और खपत से जुड़ी है, न कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली से। स्मार्ट मीटर का एक बड़ा लाभ यह भी है कि उपभोक्ता अपनी मासिक खपत को 400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना पहले से बना सकते हैं। इससे उन्हें राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहता है। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो योजना का लाभ प्रभावित होता है और बिल बढ़ जाता है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता को समय रहते ऐसी स्थिति से बचने का अवसर देता है।
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बिजली विभाग ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच में अधिकांश मामलों में मीटर सही पाया गया। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर संबंधी कोई शिकायत हो तो वह 1912 पर संपर्क कर सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करें, बिजली की खपत पर नियमित निगरानी रखें तथा ऊर्जा संरक्षण अपनाकर बिजली बिल कम करें। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घररू मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल को और कम अथवा शून्य करने का लाभ भी लिया जा सकता है।
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