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मनेंद्रगढ़ में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: अगस्त में 268 लोग डॉग बाइट के शिकार, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Fri, 04 Sep 2026 02:48 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Fri, 04 Sep 2026 02:48 PM IST
सार

मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय सिविल अस्पताल की अगस्त माह की रिपोर्ट में डॉग बाइट के 268 मामले सामने आए हैं। अस्पताल में कुल 615 मरीज भर्ती हुए। इसके अलावा सर्पदंश, पॉइजनिंग, भालू/फॉक्स बाइट और अन्य गंभीर मामलों में भी मरीज अस्पताल पहुंचे।

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615 Patients Admitted at Manendragarh Civil Hospital in August, 268 Dog-Bite Cases Raise Concern; Stray Dog Me
220 विस्तरीय शासकीय सिविल अस्पताल की फ़ोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय सिविल अस्पताल की अगस्त माह की रिपोर्ट ने शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल में अगस्त महीने के दौरान कुल 615 मरीज भर्ती हुए, जिनमें 268 मामले डॉग बाइट के दर्ज किए गए। यानी भर्ती होने वाले मरीजों में एक बड़ी संख्या कुत्ते के काटने से प्रभावित लोगों की रही। डॉग बाइट के इतने अधिक मामले सामने आने के बाद शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और इनके नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में डॉग बाइट के अलावा 17 सर्पदंश, 10 पॉइजनिंग, 2 भालू/फॉक्स बाइट, 1 बर्न, 1 हैंगिंग और 1 डूबने का मामला भी सामने आया। वहीं स्वास्थ्य संबंधी मामलों में 10 पीलिया, 3 CKD और 3 CVA के मरीज दर्ज किए गए। रिपोर्ट में स्टिल बर्थ और I.U.F.D. के मामले शून्य रहे। हालांकि इसी अवधि में अस्पताल में 21 मौतें दर्ज की गईं। अस्पताल में भर्ती मरीजों में सामान्य बीमारियों के साथ सड़क दुर्घटना, सर्पदंश, विषाक्तता, पशु काटने और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मरीज भी शामिल रहे। गंभीर स्थिति वाले कुछ मरीजों को बेहतर उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया गया।
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अगस्त में सामने आए 268 डॉग बाइट के मामले शहर में आवारा कुत्तों की समस्या की गंभीरता को सामने रखते हैं। लगातार बढ़ते मामलों के बीच सवाल यह उठ रहा है कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इनके कारण बच्चों और बुजुर्गों के साथ राहगीरों के लिए भी खतरा बना रहता है। कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार और एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
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अस्पताल की रिपोर्ट ने डॉग बाइट के मामलों को आंकड़ों के जरिए सामने रख दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और संबंधित स्थानीय निकाय इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएंगे। लगातार सामने आ रहे डॉग बाइट के मामलों को देखते हुए लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर है। शहरवासियों का कहना है कि समस्या बढ़ने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय समय रहते प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।

 

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