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छत्तीसगढ़: 20 साल से घर में रह रहे नक्सल पीड़ितों का फूटा गुस्सा, पट्टे की मांग को लेकर नगरपालिका का घेराव
Tue, 01 Sep 2026 05:45 PM IST
बीजापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 05:45 PM IST
सार
दो दशक से अधिक समय से शहर के अलग-अलग वार्डों में घर बनाकर रह रहे नक्सल पीड़ित परिवारों ने मंगलवार को स्थायी राजस्व पट्टे की मांग को लेकर नगर पालिका कार्यालय का घेराव किया।
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नगर पालिका का घेराव करते विधायक और अन्य की फ़ोटो
विस्तार
नक्सली हिंसा से प्रभावित होकर वर्ष 2005 में बीजापुर शहर आकर बसे परिवारों का सब्र अब जवाब देने लगा है। दो दशक से अधिक समय से शहर के अलग-अलग वार्डों में घर बनाकर रह रहे नक्सल पीड़ित परिवारों ने मंगलवार को स्थायी राजस्व पट्टे की मांग को लेकर नगर पालिका कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम बीजापुर को ज्ञापन सौंपकर जल्द पट्टा देने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नक्सली हिंसा के दौर में अपनी जान बचाकर वे बीजापुर पहुंचे थे। इसके बाद वार्ड क्रमांक 1, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 में घर बनाकर परिवार के साथ बस गए। इन बीस वर्षों में उनके बच्चे भी यहीं बड़े हुए और परिवार मजदूरी व छोटे-मोटे काम कर जीवन चला रहे हैं। बावजूद इसके आज तक उन्हें स्थायी पट्टा नहीं मिल सका है।
परिवारों का आरोप है कि कई बार उनके घरों को अवैध कब्जा बताकर बेदखली और तोड़फोड़ के नोटिस दिए जाते हैं। इससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वर्षों से जहां उनका घर-परिवार बस चुका है, वहां से उन्हें आखिर कहां जाना होगा।
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ज्ञापन में मांग की गई कि संबंधित वार्डों में लंबे समय से निवासरत नक्सल पीड़ित परिवारों को तत्काल राजस्व पट्टा दिया जाए। साथ ही पट्टा मिलने तक किसी भी घर को तोड़ने या बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी परिवारों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि ये गरीब और मजदूर परिवार नक्सली हिंसा के कारण वर्ष 2005 में यहां आकर बसे थे। उन्होंने सरकार से मानवीय आधार पर तत्काल स्थायी पट्टा देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नक्सली हिंसा के दौर में अपनी जान बचाकर वे बीजापुर पहुंचे थे। इसके बाद वार्ड क्रमांक 1, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 में घर बनाकर परिवार के साथ बस गए। इन बीस वर्षों में उनके बच्चे भी यहीं बड़े हुए और परिवार मजदूरी व छोटे-मोटे काम कर जीवन चला रहे हैं। बावजूद इसके आज तक उन्हें स्थायी पट्टा नहीं मिल सका है।
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परिवारों का आरोप है कि कई बार उनके घरों को अवैध कब्जा बताकर बेदखली और तोड़फोड़ के नोटिस दिए जाते हैं। इससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वर्षों से जहां उनका घर-परिवार बस चुका है, वहां से उन्हें आखिर कहां जाना होगा।
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ज्ञापन में मांग की गई कि संबंधित वार्डों में लंबे समय से निवासरत नक्सल पीड़ित परिवारों को तत्काल राजस्व पट्टा दिया जाए। साथ ही पट्टा मिलने तक किसी भी घर को तोड़ने या बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी परिवारों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि ये गरीब और मजदूर परिवार नक्सली हिंसा के कारण वर्ष 2005 में यहां आकर बसे थे। उन्होंने सरकार से मानवीय आधार पर तत्काल स्थायी पट्टा देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।