टीका लगाते ही बिगड़ी नवजात की हालत: अंबिकापुर में जन्म के 10 घंटे बाद बच्चे की मौत, परिजनों ने किया हंगामा
परिजनों को एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं मिलने पर वे निजी वाहन की व्यवस्था कर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर पहुंचे। यहां एमसीएच के एनआईसीयू में बच्चे की जांच के बाद चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
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सरगुजा जिले के बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका लगाने के बाद 10 घंटे पहले जन्मे बच्चे की हालत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने बच्चे को मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बतौली अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। बतौली से मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के लिए उन्हें एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिल सकी। परिजनों ने कहा कि टीका लगाने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ी। बतौली अस्पताल में न तो बच्चे एवं प्रसूता को देखने के लिए नर्स उपलब्ध थे और न ही डॉक्टर।
मिली जानकारी के अनुसार बतौली ब्लॉक के ग्राम कोडकेल निवासी गर्भवती महिला दशमतिया पैकरा पति ननका राम पैकरा को प्रसव पीड़ा होने पर 14 सितंबर गुरूवार दोपहर परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल कराया था। शुक्रवार सुबह आठ बजे दशमतिया पैकरा ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिसका वजन दो किलो 800 ग्राम था। बच्चा सामान्य तरीके से रो रहा था एवं मां का दूध पी रहा था। शाम को बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका लगाया गया, जिसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। शाम करीब 7.30 बजे ड्यूटी डॉक्टर ने बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के लिए रेफर कर दिया।
परिजनों को एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं मिलने पर वे निजी वाहन की व्यवस्था कर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर पहुंचे। यहां एमसीएच के एनआईसीयू में बच्चे की जांच के बाद चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बच्चे को मृत घोषित करने पर परिजनों ने बतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक एवं स्टॉफ पर लापरवाही का आरोप लगा हंगामा कर दिया। चिकित्सकों की समझाइश पर वे मृत बच्चे को लेकर वापस घर चले गए। प्रसूता दशमतिया एवं उसके परिजनों को अस्पताल में अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। प्रसूता एवं परिजनों ने बताया कि न तो अस्पताल में बिजली थी और न ही पानी। इसके कारण उन्हें परेशान होना पड़ा। अस्पताल में देखरेख को लेकर भी चिकित्सा कर्मी गंभीर नहीं थे।
टीका लगाने से बिगड़ी हालत-
प्रसूता दशमतिया पैकरा एवं परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों एवं स्टाफ ने लापरवाही की है। जन्म के दौरान बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य था और टीका लगने के पूर्व 10 घंटे तक उसकी हालत सामान्य थी। टीका लगाने के बाद उसकी हालत बिगड़ी। चिकित्सक ने उसे अंबिकापुर रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस की भी व्यवस्था नहीं होने पर वे किसी तरह निजी वाहन से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। बच्चे की हालत बिगड़ने पर नर्स एवं चिकित्सक बुलाने पर कुछ देर में वहां पहुंचे।