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‘जीरो रनर’ ने जीएमएसएच 16 के फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट को बनाया हाइटेक, एक साथ कई फायदे
Wed, 18 Dec 2019 02:15 PM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 18 Dec 2019 02:15 PM IST
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जीरो रनर
- फोटो : अमर उजाला
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जीएमएसएच सेक्टर-16 चंडीगढ़ का फिजियोथैरेपी डिपार्टमेंट और भी हाइटेक हो गया है। यहां लगाई गई वर्ल्ड क्लास की हाइटेक मशीन ‘जीरो रनर’ मरीजों का दर्द दूर करने के साथ उन्हें अच्छे फिगर की सौगात भी दे रही है। इस मशीन से जहां एक ओर क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल की जा रही है, वहीं मोटापा जैसी समस्या का समाधान भी मिल रहा है।
डिपार्टमेंट में आने वाले मरीजों का कहना है कि साइक्लिंग और ट्रेडमिल मशीन से जो परिणाम महीनों में नहीं मिल पाया, उसे इस मशीन की मदद से चंद हफ्तों में हासिल कर लिया गया है। फिजियोथैरेपिस्ट नम्रता टांगरे ने बताया कि ‘जीरो रनर’ मशीन स्टेमिना बढ़ाने में बहुत कारगर है। इससे बहुत तेजी से कैलोरी बर्न होती हैं, जिसकी बदौलत तेजी से वजन नियंत्रित होता है।
इसके अलावा इसकी थिरैपी से जकड़ी हुई मांसपेशियां तेजी से एक्टिव होती हैं, जिससे गठिया के मरीजों को दर्द से राहत मिलती है। इस मशीन से घुटने और पैर के अन्य भागों से जुड़ी समस्याओं में फास्ट रिलीफ मिलता है। इससे पहले ऐसे मरीजों के लिए साइक्लिंग और ट्रेडमिल मशीन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन उसमें घुटने का मूवमेंट नहीं होता था। जीरो रनर पर घुटने के साथ पैर की सभी मांसपेशियों को मूवमेंट मिलती है।
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नम्रता के अनुसार, इस मशीन का इस्तेमाल 15 साल से लेकर 70 साल तक के लोग कर सकते हैं। इसकी शुरुआत 10 मिनट से की जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 मिनट तक हो सकती है। इसका निर्धारण मरीज की स्थिति और मर्ज का आकलन करने के बाद ही किया जाता है। इस मशीन के साथ ही डिपार्टमेंट में लेजर मशीन, अल्ट्रासोनिक और माइक्रोवेब डायथर्मी जैसी हाइटेक मशीनों से मरीजों के दर्द को दूर किया जा रहा है।
जीएमएसएच-16 के फिजीयोथैरेपी यूनिट में वर्ल्ड क्लास की हाइटेक मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं सरकारी अस्पताल में मुहैया हों। हाल ही में लगाई गई जीरो रनर मशीन का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अभी चंडीगढ़ में हमारे अस्पताल में ही इसकी सुविधा उपलब्ध है।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, जीएमएसएच-16
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डिपार्टमेंट में आने वाले मरीजों का कहना है कि साइक्लिंग और ट्रेडमिल मशीन से जो परिणाम महीनों में नहीं मिल पाया, उसे इस मशीन की मदद से चंद हफ्तों में हासिल कर लिया गया है। फिजियोथैरेपिस्ट नम्रता टांगरे ने बताया कि ‘जीरो रनर’ मशीन स्टेमिना बढ़ाने में बहुत कारगर है। इससे बहुत तेजी से कैलोरी बर्न होती हैं, जिसकी बदौलत तेजी से वजन नियंत्रित होता है।
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इसके अलावा इसकी थिरैपी से जकड़ी हुई मांसपेशियां तेजी से एक्टिव होती हैं, जिससे गठिया के मरीजों को दर्द से राहत मिलती है। इस मशीन से घुटने और पैर के अन्य भागों से जुड़ी समस्याओं में फास्ट रिलीफ मिलता है। इससे पहले ऐसे मरीजों के लिए साइक्लिंग और ट्रेडमिल मशीन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन उसमें घुटने का मूवमेंट नहीं होता था। जीरो रनर पर घुटने के साथ पैर की सभी मांसपेशियों को मूवमेंट मिलती है।
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नम्रता के अनुसार, इस मशीन का इस्तेमाल 15 साल से लेकर 70 साल तक के लोग कर सकते हैं। इसकी शुरुआत 10 मिनट से की जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 मिनट तक हो सकती है। इसका निर्धारण मरीज की स्थिति और मर्ज का आकलन करने के बाद ही किया जाता है। इस मशीन के साथ ही डिपार्टमेंट में लेजर मशीन, अल्ट्रासोनिक और माइक्रोवेब डायथर्मी जैसी हाइटेक मशीनों से मरीजों के दर्द को दूर किया जा रहा है।
जीएमएसएच-16 के फिजीयोथैरेपी यूनिट में वर्ल्ड क्लास की हाइटेक मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं सरकारी अस्पताल में मुहैया हों। हाल ही में लगाई गई जीरो रनर मशीन का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। अभी चंडीगढ़ में हमारे अस्पताल में ही इसकी सुविधा उपलब्ध है।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, जीएमएसएच-16