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Year Ender 2024 : चंडीगढ़ में बदला पूरा प्रशासनिक चेहरा, मेट्रो पर लगी ब्रेक, अनिल मसीह कांड से हुआ नाम बदनाम

Sat, 28 Dec 2024 01:28 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sat, 28 Dec 2024 01:28 PM IST
सार

वर्ष 2024 के चंद दिन शेष हैं। इसके साथ ही नए साल 2025 का आगाज होने जा रहा है। साल  2024 में चंडीगढ़ में कई तरह के बदलाव हुए। राजनीति से लेकर प्रशासनिक फेरबदल हुआ। वहीं नगर निगम चुनाव में अनिल मसीह कांड जो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। 

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Year Ender 2024 Entire administrative officials change in Chandigarh metro project dismiss Anil Masih incident
अनिल मसीह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 2024 चंडीगढ़ प्रशासन के लिए बड़े बदलावों का साल साबित हुआ। प्रशासक से लेकर डीसी, गृह-वित्त सचिव, नगर निगम आयुक्त से लेकर डीसी तक प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण चेहरे बदल गए। हालांकि, इन बदलावों के बावजूद प्रशासन ठोस फैसले लेने में विफल रहा। स्टार्टअप नीति अभी भी लंबित है और मेट्रो प्रोजेक्ट पर लगभग ब्रेक लग गई है।

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वहीं, डंपिंग ग्राउंड हटाने के काम ने जरूर गति पकड़ी, लेकिन अनिल मसीह कांड जैसी घटनाओं ने चंडीगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा भी किया।

मेयर चुनाव ने कराई किरकिरी

शहर के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 18 जनवरी को रखा गया था। सुबह 11 बजे से मेयर का चुनाव होना था लेकिन आधा घंटा पहले चुनाव को टाल दिया गया। इसके बाद 30 जनवरी को तय हुआ। चुनाव के दौरान ही मनोनीत पार्षद व पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर बैलेट पेपर पर निशान लगाकर गठबंधन के वोटों को रद्द करने का आरोप लगा। उन्होंने 8 वोट रद्द करके भाजपा के मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया। आप ने मामले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल मसीह को दोषी पाया और गठबंधन के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित किया। इन सब से भाजपा और चंडीगढ़ की पूरे देश में काफी किरकिरी हुई।

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इस साल बदल गया पूरा प्रशासनिक चेहरा

पंजाब के पूर्व राज्यपाल व चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने अचानक तीन फरवरी को इस्तीफा दे दिया। निजी कारण बताया लेकिन राष्ट्रपति ने मंजूरी नहीं दी। 31 जुलाई को गुलाबचंद कटारिया को ये जिम्मेदारी सौंपी गई। इस साल प्रशासक के पूर्व सलाहकार धर्मपाल की सेवानिवृत्ति के बाद राजीव वर्मा नियुक्त हुए। गृह सचिव नितिन कुमार यादव की जगह मनदीप सिंह बराड़ बने। वित्त सचिव भी बदले। विजय नामदेवराव जड़े की जगह दीप्रवा लाकड़ा नियुक्त हुए। विनय प्रताप सिंह की जगह डीसी निशांत कुमार यादव बने। आनिंदिता मित्रा की जगह नगर निगम आयुक्त अमित कुमार बने। इसके अलावा भी प्रशासन में कई फेरबदल हुए।

Year Ender 2024 Entire administrative officials change in Chandigarh metro project dismiss Anil Masih incident
जीत के बाद सांसद मनीष तिवारी, एचएल लक्की और बीच में डॉ एसएस आहलूवालिया - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव में तिवारी-टंडन के बीच शहर ने देखा मुकाबला

भाजपा ने शहर में 10 साल सांसद रही किरण खेर का टिकट काट दिया और वरिष्ठ नेता संजय टंडन को लोकसभा चुनाव में मैदान में उतारा। 10 अप्रैल को टिकट की घोषणा हुई। इसके बाद संजय टंडन सीधे किरण खेर के पास पहुंचे और जीत का दम भरा। चार दिन बाद कांग्रेस ने भी पवन बंसल का टिकट काटकर मनीष तिवारी को टिकट दे दिया। दोनों नेता पहली बार चंडीगढ़ के मैदान में आमने-सामने उतरे। तिवारी को टिकट देने के बाद कांग्रेस में काफी खलबली मची। कई नेताओं ने इस्तीफा दिया। कई प्रदर्शन भी हुए लेकिन प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की, अन्य नेताओं के सहारे और तिवारी की रणनीति से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। हालांकि, इसमें आम आदमी पार्टी का अहम रोल रहा, क्योंकि चुनाव इस बार गठबंधन में लड़ा गया था।

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पार्किंग मुफ्त करने का वादा लेकिन नहीं हुआ पूरा

पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने दिवाली के दिन घोषणा कर दी कि एक दिसंबर से शहर के सभी पार्किंग में दोपहिया वाहन चालकों को पैसे नहीं खर्च करने होंगे। इसकी खूब चर्चा हुई लेकिन वह वादा नहीं पूरा कर पाए। नगर निगम और प्रशासन के अधिकारी मेयर की घोषणा से खुश नहीं थे इसलिए पार्किंग मुफ्त नहीं हुई। इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी मेयर को घेरा। मेयर पर सदन की बैठकों में आम आदमी पार्टी के पार्षदों को सबसे ज्यादा बार निलंबित करने का भी आरोप लगा। पार्षदों ने कई बार सवाल उठाया कि अनूप गुप्ता सदन की बैठकों को समय पर बुलाने में असफल रहे।

हरमोहन धवन-छाबड़ा के निधन पर शहर हुआ दुखी

शहर ने इस साल अपने कई चहेतों को भी खो दिया। साल के शुरू में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का निधन हो गया। उनका निधन 83 वर्ष की उम्र में 27 जनवरी 2024 को हुआ। वरिष्ठ नेता प्रदीप छाबड़ा की लंबी बीमारी के बाद 9 जुलाई 2024 को देहांत हो गया। दोनों नेताओं की अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग जुटे। साल का अंत होते-होते चंडीगढ़ से जुड़े देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और देश की शान रह चुकीं इंटरनेशनल मास्टर एथलीट बीबी मान कौर के बेटे मास्टर एथलीट गुरदेव सिंह का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरदेव सिंह ने 90 वर्ष की उम्र में अपनी मां मान कौर को एथलेटिक्स के मैदान में उतारा था, जिसके बाद उन्होंने कई मेडल जीते थे।

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मेट्रो - फोटो : अमर उजाला

प्रशासन नहीं ले पाया कोई ठोस फैसला, मेट्रो भी चलते-चलते रुकी

इस साल कोई बड़ा फैसला प्रशासन की तरफ से नहीं लिया गया। साल की शुरुआत में मेट्रो को लेकर काफी हलचल हुई। मेट्रो चलाने के लिए पुरानी फाइलों को निकाला गया। दोबारा कसरत शुरू हुई लेकिन प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के आने के बाद स्थितियां बदलने लगीं। मेट्रो को लेकर एक बैठक में प्रशासक ने इसकी व्यवहार्यता पर सवाल उठा दिया। उन्होंने उन शहरों से तुलना करने के आदेश दे दिए जहां पर मेट्रो चल रही है और जो चंडीगढ़ के आकार के हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने भी मेट्रो की राइडरशिप और बनाने में आने वाले हजारों करोड़ के खर्च पर सवाल उठाया। उन्होंने पॉड टैक्सी का नया विकल्प रख दिया और जाते-जाते कहा कि इस पर भी विचार किया जा सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि धीरे-धीरे मेट्रो चंडीगढ़ से दूर होती जा रही है।

आम आदमी पार्टी का वादा भी निकला जुमला

आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनाव में वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आएंगे तो 20 हजार लीटर पानी और पार्किंग मुफ्त करेंगे। 2024 में पहली बार चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी का मेयर बना। मेयर के टर्म का सिर्फ एक महीना बाकी रह गया है लेकिन अब तक शहर में न 20 हजार लीटर पानी मुफ्त कर पाए हैं और न ही पार्किंग मुक्त हुआ है। आम आदमी पार्टी का यह वादा भी एक जुमला ही साबित हुआ। हालांकि, पार्टी के अधिकारियों का हमेशा यह कहना होता है कि उन्होंने नगर निगम के सदन से प्रस्ताव पास करके प्रशासक को भेजा है। वह ही इसे मंजूर नहीं कर रहे हैं। दूसरी तरफ, प्रशासन का कहना है कि नगर निगम पहले ही घाटे में है। पानी और पार्किंग को मुफ्त कर दिया जाएगा तो नगर निगम पूरी तरह से ठप हो जाएगा।

अब तक का सबसे भीषण वित्तीय संकट झेल रहा नगर निगम

वर्ष 2024 नगर निगम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। नगर निगम अब तक के सबसे भीषण वित्तीय संकट से जूझ रहा है। नगर निगम करीब 200 करोड़ के घाटे में है। पिछले 7 से 8 महीने से कोई विकास कार्यों नहीं हो रहा है। सभी काम ठप पड़े हैं। पेमेंट नहीं मिलने की वजह से ठेकेदारों ने कई काम बीच में ही छोड़ दिए हैं। सड़क टूटी हैं लेकिन उन्हें बनाने का पैसा नहीं है। नगर निगम, प्रशासन से पैसे मांग रहा है लेकिन प्रशासन ने भी फिलहाल अतिरिक्त ग्रांट देने से मना कर दिया है। प्रशासन ने नगर निगम को अपने राजस्व के साधन तलाशने के आदेश दिए हैं। फरवरी और मार्च महीने में नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के जितना भी पैसा नहीं बचेगा।

न मंडी शिफ्ट हुई, न स्टार्टअप नीति लागू कर पाया प्रशासन

स्टार्टअप नीति की पूरे साल चर्चा होती रही। प्रशासन ने सितंबर 2022 में ही ड्राफ्ट जारी कर दिया लेकिन आज तक इसकी अधिसूचना नहीं जारी हो पाई है। इसका असर यह है कि चंडीगढ़, स्टार्टअप इंडिया की रैंकिंग में लगातार पिछड़ता जा रहा है। वहीं, सेक्टर-26 की मंडी को सेक्टर-39 में शिफ्ट करने को लेकर काफी चर्चा हुई लेकिन पूरा साल खत्म हो गया, मंडी शिफ्टिंग का काम पूरा होना तो दूर शुरू भी नहीं हुआ। सेक्टर-26 में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं लेकिन प्रशासन मंडी शिफ्ट करने पर ध्यान ही नहीं दे रहा। आढ़ती मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन के अधिकारी उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं।

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