Suicide Prevention Day: चंडीगढ़ में हर 58 घंटे में एक व्यक्ति कर रहा खुदकुशी, ऐसे पहचाने लक्षण और रहें सावधान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर साल 10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। यह आज के समय की मांग है क्योंकि आजकल आत्महत्या के केस बढ़ रहे हैं। चंडीगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक 88 लोगों ने आत्महत्या की। यानी हर 58वें घंटे में चंडीगढ़ का रहने वाला एक शख्स तनाव के कारण खुदकुशी कर रहा है। मार्च महीने से अब तक तनाव के चलते 65 लोग जान गंवा चुके हैं, जोकि पूरे आत्महत्या के आंकड़ों का 75 फीसदी है।
इसके अलावा बीते सप्ताह आई राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में 2019 में चंडीगढ़ में 131 लोगों ने फंदा लगाया था। इनमें सबसे ज्यादा 35 फीसदी लोगों ने पारिवारिक कलह के तनाव से जूझकर खुदकुशी की है। चंडीगढ़ पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 जनवरी से अब तक सिटी ब्यूटीफुल के अलग-अलग हिस्सों में कुल 88 लोगों ने खुदकुशी की है। इनमें करीब 70 फीसदी की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है। खुदकुशी करने वालों में ज्यादातर मामले कॉलोनी के हैं। धनास, हल्लोमाजरा, रामदरबार, सेक्टर-25 कॉलोनी, बापूधाम के अलावा अन्य सेक्टर एरिया भी शामिल है। 2017 में 113 और 2018 में 160 लोगों ने आत्महत्या की है।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने ज्यादा की आत्महत्या
इस वर्ष हुए आत्महत्या के मामलों में महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा है। चंडीगढ़ पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, करीब 15 फीसदी महिलाओं ने आत्महत्या की है। मानसिक रोग से जुड़े विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना काल में कई लोग घर में बैठकर मानसिक तनाव से जूझते रहे। वहीं कई की नौकरी चली गई। इसकी वजह से आत्महत्या के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। लोगों को तनाव से दूर होना पड़ेगा वरना आत्महत्या के मामले दिनोंदिन बढ़ते रहेंगे।
आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर करें काम
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का थीम है ‘आत्महत्या को रोकने को लेकर मिलकर काम करना’ है। सबसे अहम रोल पुलिस, संस्थाओं समेत अन्य सभी को अच्छा आपसी तालमेल बनाकर रखना होगा। हम सभी मिलकर मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करें तो काफी हद तक समस्या कम हो जाएगी। इसके अलावा अगर किसी को इस तरह की दिक्कत आती है तो वह नजदीकी डॉक्टर से सलाह लें। आत्महत्या को रोकना किसी एक के वश की बात नहीं है, यही वजह है कि सभी को एक साथ मिलकर काम करना होगा। -डॉ. सुबोध बीएन, मानोचिकित्सक पीजीआई
लक्षण को इस तरह पहचाने
- हमेशा लोगों से दूरियां बनाकर रहना।
- अक्सर बातों को अनसुना कर देना।
- हर वक्त नकारात्मक बातें करना।
- हरदम कुछ न कुछ सोचते रहना।
- किसी भी बात को लेकर गुस्सा करना।
- बार-बार आत्महत्या करने करने की बात कहना।
- ज्यादा नींद आना या फिर देर देर रात जागना।
- अचानक से स्वभाव बदल जाना।
आत्महत्या के ख्याल पर इन बातों पर रखें ध्यान
- ड्रग्स और शराब के सेवन से बचें।
- खुद को रोकने के लिए खुद से वादा करें।
- अपने पास से ऐसी चीज को हटा दें जो आपको नुकसान पहुंचा सकती है।
- आत्महत्या का विचार आने पर अपने दोस्तों और परिवार से घुले-मिले।
- ऐसी जगह जाएं जहां आप खुद को सुरक्षित महसूस करें।
महीना आत्महत्या के केस
- जनवरी 08
- फरवरी 14
- मार्च 11
- अप्रैल 06
- मई 11
- जून 17
- जुलाई 07
- अगस्त 13
- सितंबर 01