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वर्ल्ड किडनी डे: बीपी या शुगर हाई हो और ये 5 लक्षण दिखें तो सतर्क रहें, खराब हो सकती किडनी
Thu, 12 Mar 2020 10:15 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 12 Mar 2020 10:15 AM IST
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क्या आपको पता है कि आपका हाई ब्लड प्रेशर और शुगर आपकी किडनी को खराब कर सकता है। जानकारी के अभाव में बचाव का समय निकला जा रहा है। समय रहते इसकी जानकारी न होने के कारण लोग अपनी किडनी गंवा रहे हैं। नतीजन किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग का तेजी से बढ़ना और डायलिसिस के लिए वेटिंग डेट मिलना जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
पीजीआई रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. आशीष का कहना है कि अगर लोग अपने ब्लड प्रेशर और शुगर की समय पर जांच कराते रहे और संतुलित जीवन व संतुलित आहार लें तो किडनी खराब होने की स्थिति नहीं आएगी। लाइफ स्टाइल और खान-पान में हर स्तर पर लापरवाही की जा रही है। भागदौड़ की जिंदगी में व्यायाम, योग और मेडिटेशन के लिए समय नहीं निकाला जा रहा। फास्टफूड के हानिकारक पक्ष को ध्यान में रखे बिना धड़ल्ले से उसका सेवन किया जा रहा है। अगर अब भी लोग नहीं चेते तो स्थिति भयावह होगी।
हजारों को किडनी का इंतजार
पीजीआई में पंजीकृत 1967 किडनी फैल्योर के मरीजों को किडनी का इंतजार है। ये मरीज डायलिसिस के बल पर जिंदा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तेजी से किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं, उस क्रम में किडनी का दान नहीं हो रहा। एक साल में 500 से 800 नए मरीज पंजीकृत हो रहे हैं, जबकि डोनरों की संख्या लगभग 200 से 225 के बीच है। आंकड़ों पर गौर करें तो पीजीआई में 2016 में 350 नए पंजीकरण किए गए थे। यह संख्या 2017 में 450 और 2018 में 630 पर जा पहुंची। 2019 में 500 नये मरीज पंजीकृत किए गए।
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पीजीआई रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. आशीष का कहना है कि अगर लोग अपने ब्लड प्रेशर और शुगर की समय पर जांच कराते रहे और संतुलित जीवन व संतुलित आहार लें तो किडनी खराब होने की स्थिति नहीं आएगी। लाइफ स्टाइल और खान-पान में हर स्तर पर लापरवाही की जा रही है। भागदौड़ की जिंदगी में व्यायाम, योग और मेडिटेशन के लिए समय नहीं निकाला जा रहा। फास्टफूड के हानिकारक पक्ष को ध्यान में रखे बिना धड़ल्ले से उसका सेवन किया जा रहा है। अगर अब भी लोग नहीं चेते तो स्थिति भयावह होगी।
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हजारों को किडनी का इंतजार
पीजीआई में पंजीकृत 1967 किडनी फैल्योर के मरीजों को किडनी का इंतजार है। ये मरीज डायलिसिस के बल पर जिंदा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तेजी से किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं, उस क्रम में किडनी का दान नहीं हो रहा। एक साल में 500 से 800 नए मरीज पंजीकृत हो रहे हैं, जबकि डोनरों की संख्या लगभग 200 से 225 के बीच है। आंकड़ों पर गौर करें तो पीजीआई में 2016 में 350 नए पंजीकरण किए गए थे। यह संख्या 2017 में 450 और 2018 में 630 पर जा पहुंची। 2019 में 500 नये मरीज पंजीकृत किए गए।
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जिंदगी से है प्यार तो इससे करें इनकार
दर्द की दवाइयां ज्यादा लेना, पेशाब देर तक रोके रहना, पानी कम मात्रा में पीना, बहुत ज्यादा नमक का सेवन, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर के इलाज में लापरवाही, मांसाहार का ज्यादा सेवन, ज्यादा शराब पीना।
ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
भूख न लगना, उल्टी आना, थकावट और कमजोरी, नींद न आना, पेशाब की मात्रा कम होना, मांसपेशियों में खिंचाव, पैरों और टखने में सूजन।
अंगदान के प्रति लोग हो रहे जागरूक
अंगदान के लिए पंजीकृत होने वालों में सबसे ज्यादा संख्या किडनी के मरीजों की ही है। वहीं अंगदान करने वालों में भी किडनी वाले डोनर ज्यादा हैं। डॉ. आशीष का कहना है कि लोग अपनों को खोने के दुख को झेलते हुए दूसरों को जीवनदान देने के लिए आगे आ रहे हैं।
पीजीआई के नाम देश के सबसे कम उम्र के किडनी डोनर का ट्रांसप्लांट करने का रिकार्ड है। इसका उदाहरण पिछले दिनों एक दंपती द्वारा अपने 68 घंटे केनवजात का अंगदान करना है। उस नवजात से मिली दोनों किडनी को एक वयस्क मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया है।
ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
भूख न लगना, उल्टी आना, थकावट और कमजोरी, नींद न आना, पेशाब की मात्रा कम होना, मांसपेशियों में खिंचाव, पैरों और टखने में सूजन।
अंगदान के प्रति लोग हो रहे जागरूक
अंगदान के लिए पंजीकृत होने वालों में सबसे ज्यादा संख्या किडनी के मरीजों की ही है। वहीं अंगदान करने वालों में भी किडनी वाले डोनर ज्यादा हैं। डॉ. आशीष का कहना है कि लोग अपनों को खोने के दुख को झेलते हुए दूसरों को जीवनदान देने के लिए आगे आ रहे हैं।
पीजीआई के नाम देश के सबसे कम उम्र के किडनी डोनर का ट्रांसप्लांट करने का रिकार्ड है। इसका उदाहरण पिछले दिनों एक दंपती द्वारा अपने 68 घंटे केनवजात का अंगदान करना है। उस नवजात से मिली दोनों किडनी को एक वयस्क मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया है।
ससुर ने बहू को किडनी देकर पेश की मिसाल
आमतौर पर सास-ससुर द्वारा बहू को प्रताड़ित करने की सूचनाएं सामने आती हैं। वहीं करनाल जिले के तरावड़ी के मोहन लाल काठपाल (65) ने अपनी बहू प्रियंका काठपाल (33) को अपनी किडनी देकर मिसाल पेश की है। फरवरी में हुए किडनी ट्रांसप्लांट के बाद ससुर और बहू दोनों की स्थिति सामान्य है। ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. राका कौशल ने कहा कि ज्यादातर मामलों में हमने देखा है कि जब अपने प्रियजनों को किडनी डोनेट करने की बात आती है तो खून और प्यार के बंधन टूट जाते हैं। वहीं इस मामले में मोहन ने अपनी बहू को अपनी किडनी देकर एक मिसाल कायम की ।
पीजीआई में इतनों को मिली किडनी
वर्ष किडनी ट्रांसप्लांट
2011 175
2012 188
2013 200
2014 207
2015 251
2016 229
2017 233
2018 221
2019 224
2020 मार्च 47
किडनी फैल्योर केमामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर अब भी लोग इसे लेकर सुचेत नहीं हुए तो स्थिति भयावह होगी।
- डॉ. आशीष, एचओडी, रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी
पीजीआई में इतनों को मिली किडनी
वर्ष किडनी ट्रांसप्लांट
2011 175
2012 188
2013 200
2014 207
2015 251
2016 229
2017 233
2018 221
2019 224
2020 मार्च 47
किडनी फैल्योर केमामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर अब भी लोग इसे लेकर सुचेत नहीं हुए तो स्थिति भयावह होगी।
- डॉ. आशीष, एचओडी, रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी