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खुलासाः सरकारी खजाने के साथ खेला गया घोटाले का वर्ल्ड कबड्डी कप
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 30 Mar 2017 09:27 AM IST
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पंजाब के अकाउटेंट जरनल जगवंश सिंह
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पंजाब में पिछली सरकार ने विश्व कबड्डी कप करवाया, जिसमें उसमें बोगस बिलों पर भी अदायगी कर दी गई। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भी सामने आया कि जो बसों के नंबर दिए गए हैं, वह स्कूटर, मोटर साइकिल व ट्रक के निकले। कैग रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 2011 के विश्व कबड्डी कप में 1.68 लाख की अदायगी बोगस बिलों पर की गई। जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी बंठिडा के रिकार्ड की जांच में पाया गया कि 227 में से 47 बसों के बिल बोगस थे, क्योकि बिलों में दिखाए गए पंजीकृत नंबर स्कूटरों, मोटर साइकिलों, कारों और ट्रकों के थे।
कबड्डी कप दौरान 6 ट्रांसपोर्टरों से 227 बसों के इस्तेमाल के लिए प्रति बस 3500 रुपये अदा किए गए। एक ट्रांसपोर्टर से 7 इनोवा कारों की सेवाओं के लिए 1500 रुपये इनोवा कार अदायगी की गई, जिसमें से 2 पंजीकृत नंबर एक इंडिगो कार व एक ट्रैक्टर का था। इसी तरह डीएसओ मुक्तसर ने 58 बसें, 25 इनोवा कारें, 15 टवेरा कारों को 5वें विश्व कबड्डी कप की 20 दिसंबर 2014 को गांव बादल में हुए एक कार्यक्रम के लिए प्राइवेट ट्रांसपोर्ट को अदायगी करने के लिए डीटीओ मुक्तसर ने 1.50 लाख अदा किए। डीटीओ दफ्तर ने 2000, 750 व 600 रुपये की दर से प्रति बस, इनोवा कार, टवेरा कारों के लिए 1.50 लाख अदा किए।
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कबड्डी कप दौरान 6 ट्रांसपोर्टरों से 227 बसों के इस्तेमाल के लिए प्रति बस 3500 रुपये अदा किए गए। एक ट्रांसपोर्टर से 7 इनोवा कारों की सेवाओं के लिए 1500 रुपये इनोवा कार अदायगी की गई, जिसमें से 2 पंजीकृत नंबर एक इंडिगो कार व एक ट्रैक्टर का था। इसी तरह डीएसओ मुक्तसर ने 58 बसें, 25 इनोवा कारें, 15 टवेरा कारों को 5वें विश्व कबड्डी कप की 20 दिसंबर 2014 को गांव बादल में हुए एक कार्यक्रम के लिए प्राइवेट ट्रांसपोर्ट को अदायगी करने के लिए डीटीओ मुक्तसर ने 1.50 लाख अदा किए। डीटीओ दफ्तर ने 2000, 750 व 600 रुपये की दर से प्रति बस, इनोवा कार, टवेरा कारों के लिए 1.50 लाख अदा किए।
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कैग रिपोर्ट का खुलासा
डीटोओ मुक्तसर दफ्तर के 40 वाहनों के रिकार्ड की जांच में सामने आया कि 22 वाहनों में 7 स्कूटर, 2 टैक्टर, 3 ट्रक व 10 छोटी कारें थी। क्लेम किए गए वर्ग के अलावा अन्य के लिए पंजीकृत थी। डीटीओ ने 58 बसों का क्लेम पेश किया था। इसी तरह 58 बसों के क्लेम के लिए 1.16 लाख की प्रमाणिकता को लेखा परीक्षा में वेरीफाई नहीं किया जा सकता। इस तरह डीटीओ मुक्तसर की ओर से की गई 1.50 लाख की अदायगी झूठी लग रही है।
डीएसओ बठिंडा व लुधियाना के नवंबर 2011 व दिसंबर 2013 में हुए दूसरे व चौथे विश्व कप के रिकार्ड से पता चला कि जैसे नियमों अनुसार जरूरी था कि बिना कोटेशन टेंडर मांगने से अलग-अलग प्रंबध करने के लिए 1.78 करोड़ का खर्च किया गया। कोटेशन व टेंडर न मांगने के कोई कारण रिकार्ड पर नही थे।
सर्व शिक्षा अभियान के लिए नहीं दिया पूरा फंड
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में वर्ष 2011-16 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान को पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप इस अभियान का लाभ गरीब वर्ग के बच्चों तक नहीं पहुंच सका।
रिपोर्ट के अनुसार, किताबें और वर्दी खरीदने पर सरकार ने 14.76 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर डाले। सरकार ने 2011-16 के दौरान इस अभियान के लिए 1362.76 करोड़ रुपये का राशि कम जारी की बल्कि 2014-15 में तो केंद्र सरकार के हिस्से के 48.48 करोड़ रुपये भी जारी नहीं किए गए।
अभियान के तहत विशेष बच्चों के लिए नियुक्त किए जाने वाले रिसोर्स टीचरों की नियुक्ति में भी गड़बड़ी हुई। बच्चों की संख्या के अनुपात में टीचर नहीं लगाए गए। 1170 स्कूलों में केवल एक टीचर से ही काम चलाया गया जबकि 572 अपर प्राइमरी स्कूलों में टीचरों की संख्या तीन से कम रही। वर्ष 2011-16 के दौरान बच्चों को दो बार वर्दियां दी जानी थी लेकिन एक बार ही उपलब्ध कराई गई।
डीएसओ बठिंडा व लुधियाना के नवंबर 2011 व दिसंबर 2013 में हुए दूसरे व चौथे विश्व कप के रिकार्ड से पता चला कि जैसे नियमों अनुसार जरूरी था कि बिना कोटेशन टेंडर मांगने से अलग-अलग प्रंबध करने के लिए 1.78 करोड़ का खर्च किया गया। कोटेशन व टेंडर न मांगने के कोई कारण रिकार्ड पर नही थे।
सर्व शिक्षा अभियान के लिए नहीं दिया पूरा फंड
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में वर्ष 2011-16 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान को पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप इस अभियान का लाभ गरीब वर्ग के बच्चों तक नहीं पहुंच सका।
रिपोर्ट के अनुसार, किताबें और वर्दी खरीदने पर सरकार ने 14.76 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर डाले। सरकार ने 2011-16 के दौरान इस अभियान के लिए 1362.76 करोड़ रुपये का राशि कम जारी की बल्कि 2014-15 में तो केंद्र सरकार के हिस्से के 48.48 करोड़ रुपये भी जारी नहीं किए गए।
अभियान के तहत विशेष बच्चों के लिए नियुक्त किए जाने वाले रिसोर्स टीचरों की नियुक्ति में भी गड़बड़ी हुई। बच्चों की संख्या के अनुपात में टीचर नहीं लगाए गए। 1170 स्कूलों में केवल एक टीचर से ही काम चलाया गया जबकि 572 अपर प्राइमरी स्कूलों में टीचरों की संख्या तीन से कम रही। वर्ष 2011-16 के दौरान बच्चों को दो बार वर्दियां दी जानी थी लेकिन एक बार ही उपलब्ध कराई गई।