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पंजाब कैबिनेट: मोहाली में बनेगी विश्वस्तरीय तकनीकी यूनिवर्सिटी, कई बड़े फैसले
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Sep 2017 09:17 AM IST
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Punjab Cabinate
- फोटो : File Photo
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मोहाली में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी। पंजाब कैबिनेट ने इसकेलिए ग्लोबल टेंडर बुलाने को स्वीकृति दे दी है। सरकार का दावा है कि इससे 2400 सीधी नौकरियां पैदा होंगी, जीडीपी में 6500 करोड़ की बढ़ोतरी होगी।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह यूनिवर्सिटी स्किल डेवलपमेंट पर आधारित होगी। जिसमें सूचना तकनीक आधारित सेवाओं, बायो प्रौद्योगिकी, बायो विज्ञान, मैटीरियल विज्ञान व नैनो प्रौद्योगिकी को तवज्जो दी जाएगी। इससे राजस्व में 600 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। इसके लिए खुले बाजार से प्रस्ताव लिए जाएंगे। आईटी कंपनियों केलिए पचास एकड़ जगह आरक्षित है, जोकि यूनिवर्सिटी केलिए दी जा सकती है।
आईटी सिटी मोहाली में प्लॉटों के अलॉटमेंट केयोग्यता मापदंडों में छूट देते हुए गैर सीएमएम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, जोकि लेवल 5 के होंगे, को तीन से 25 एकड़ तक प्लॉट अलॉट किए जाने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जो कंपनियां आईटी सिटी में अपने प्लॉट छोड़ना चाहती हैं, वे दस फीसदी रकम की कटौती के साथ अपने प्लॉट छोड़ सकती हैं। कैबिनेट ने घर-घर रोजगार योजना के तहत सभी जिलों में ब्यूरो ऑफ इंप्लायमेंट एंड एंटरप्राइजेज स्थापित करने को स्वीकृति दी। जो नौजवानों को रोजगार दिलाने को एक मंच के तौर पर काम करेंगे।
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सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह यूनिवर्सिटी स्किल डेवलपमेंट पर आधारित होगी। जिसमें सूचना तकनीक आधारित सेवाओं, बायो प्रौद्योगिकी, बायो विज्ञान, मैटीरियल विज्ञान व नैनो प्रौद्योगिकी को तवज्जो दी जाएगी। इससे राजस्व में 600 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। इसके लिए खुले बाजार से प्रस्ताव लिए जाएंगे। आईटी कंपनियों केलिए पचास एकड़ जगह आरक्षित है, जोकि यूनिवर्सिटी केलिए दी जा सकती है।
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आईटी सिटी मोहाली में प्लॉटों के अलॉटमेंट केयोग्यता मापदंडों में छूट देते हुए गैर सीएमएम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, जोकि लेवल 5 के होंगे, को तीन से 25 एकड़ तक प्लॉट अलॉट किए जाने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जो कंपनियां आईटी सिटी में अपने प्लॉट छोड़ना चाहती हैं, वे दस फीसदी रकम की कटौती के साथ अपने प्लॉट छोड़ सकती हैं। कैबिनेट ने घर-घर रोजगार योजना के तहत सभी जिलों में ब्यूरो ऑफ इंप्लायमेंट एंड एंटरप्राइजेज स्थापित करने को स्वीकृति दी। जो नौजवानों को रोजगार दिलाने को एक मंच के तौर पर काम करेंगे।
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सरकारी स्कूलों में शुरू होंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं
Punjab Cabinate meeting
- फोटो : File Photo
सरकारी स्कूलों के बच्चे अब निजी स्कूलों से मुकाबला कर सकेंगे। सरकारी स्कूलों में भी अगले सेशन से प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होंगी। पंजाब कैबिनेट ने इसको मंजूरी दे दी है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में अब सीनियर आईएएस ही चेयरमैन व वाइस चेयरमैन नियुक्त हो सकेंगे।
प्राइमरी स्कूलों में अब तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को दाखिला दिया जाएगा। जिनकी कक्षाएं अगले सेशन में शुरू होंगी। मौजूदा नियमों के मुताबिक प्राइमरी स्कूलों में छह साल से अधिक उम्र के बच्चों को ही दाखिला दिया जाता है। इससे छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मिलेगी, स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या को रोका जा सकेगा। सीएम ने पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक घटनाओं और महान नायकों को शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ा जा सके।
नवजोत सिद्धू ने अमीर विरसे और सभ्याचार से संबंधित विषयों को शामिल करने का सुझाव दिया। सरकारी प्रवक्ता ने बतया कि इस समय पंजाब में 6-10 साल के 24.47 लाख बच्चे हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में सिर्फ 9.6 लाख बच्चे ही दाखिल हैं।
छह साल से अधिक उम्र के बच्चों को ही दाखिला देने केनियम के चलते स्कूलों में बच्चों की संख्या घटती जा रही है। लेकिन माता-पिता अपने बच्चों को छह साल से पहले स्कूल भेजना चाहते हैं। 4-6 साल के बच्चों की अनुमानित संख्या 5.33 लाख है। लेकिन दाखिला न मिलने के कारण ये निजी स्कूलों के बच्चों की तुलना में पिछड़ जाते हैं। कैबिनेट ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एक्ट में संशोधन को मंजूरी दी।
जिससे बोर्ड में सीनियर वाइस चेयरमैन का पद खत्म हो जाएगा। संशोधन के बाद केंद्र व राज्य सरकार में गजेटेड पद पर 15 साल सेवा निभाने वाला अधिकारी ही चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नियुक्त हो सकेगा। आईएएस या पीसीएस अधिकारी को ही बोर्ड का सचिव बनाया जाएगा।
प्राइमरी स्कूलों में अब तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को दाखिला दिया जाएगा। जिनकी कक्षाएं अगले सेशन में शुरू होंगी। मौजूदा नियमों के मुताबिक प्राइमरी स्कूलों में छह साल से अधिक उम्र के बच्चों को ही दाखिला दिया जाता है। इससे छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मिलेगी, स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या को रोका जा सकेगा। सीएम ने पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक घटनाओं और महान नायकों को शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ा जा सके।
नवजोत सिद्धू ने अमीर विरसे और सभ्याचार से संबंधित विषयों को शामिल करने का सुझाव दिया। सरकारी प्रवक्ता ने बतया कि इस समय पंजाब में 6-10 साल के 24.47 लाख बच्चे हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में सिर्फ 9.6 लाख बच्चे ही दाखिल हैं।
छह साल से अधिक उम्र के बच्चों को ही दाखिला देने केनियम के चलते स्कूलों में बच्चों की संख्या घटती जा रही है। लेकिन माता-पिता अपने बच्चों को छह साल से पहले स्कूल भेजना चाहते हैं। 4-6 साल के बच्चों की अनुमानित संख्या 5.33 लाख है। लेकिन दाखिला न मिलने के कारण ये निजी स्कूलों के बच्चों की तुलना में पिछड़ जाते हैं। कैबिनेट ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एक्ट में संशोधन को मंजूरी दी।
जिससे बोर्ड में सीनियर वाइस चेयरमैन का पद खत्म हो जाएगा। संशोधन के बाद केंद्र व राज्य सरकार में गजेटेड पद पर 15 साल सेवा निभाने वाला अधिकारी ही चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नियुक्त हो सकेगा। आईएएस या पीसीएस अधिकारी को ही बोर्ड का सचिव बनाया जाएगा।