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वर्ल्ड चैंपियन पीवी सिंधु का स्वर्ण पदक बैडमिंटन इंडस्ट्री के लिए भी तोहफा, कारोबारी बोले- शुक्रिया
Wed, 28 Aug 2019 10:14 AM IST
खुशबू गोयल
सौरभ खन्ना, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सौरभ खन्ना, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 28 Aug 2019 10:14 AM IST
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पीएम मोदी के साथ सिंधु
- फोटो : एएनआई
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वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली खिलाड़ी पीवी सिंधु की वजह से जालंधर की बैडमिंटन इंडस्ट्री चमक उठी हैं। खेल उद्योग कारोबारी बेहद उत्साहित हैं। उनको यकीन है अब व्यापार पर छाए मंदी के बादल दूर होंगे। व्यापारियों को पूरा यकीन है कि आने वाले सर्दी के मौसम में बैडमिंटन और शटलकॉक का कारोबार पूरी तरह से गर्म होगा।
यही वजह है कि खेल उद्योग के कारोबारी तेजी के साथ माल तैयार कर डिमांड को पूरा करने में जुट गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जालंधर में बने बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक की भारत के अलावा विदेशों तक डिमांड हैं। लेकिन 8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी और जुलाई 2017 से शुरू हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने कारोबारियों की रीढ़ की हड्डी को तोड़ दिया था।
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यही वजह है कि खेल उद्योग के कारोबारी तेजी के साथ माल तैयार कर डिमांड को पूरा करने में जुट गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जालंधर में बने बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक की भारत के अलावा विदेशों तक डिमांड हैं। लेकिन 8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी और जुलाई 2017 से शुरू हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने कारोबारियों की रीढ़ की हड्डी को तोड़ दिया था।
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जालंधर में संचालित कई बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक बनाने वाली इंडस्ट्री भी बंद हो गई थी। कारोबारियों के मुताबिक इस साल के गर्मी के मौसम में भी बैडमिंटन इंडस्ट्री ठप ही रही। अब सर्दी के मौसम में यह स्पीड पकड़ेगी। क्योंकि पीवी सिंधु के वर्ल्ड चैंपियन बनने के कारण बैडमिंटन का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा हैं।
अब हालात बदले हैं और इंडस्ट्री में नई जान आ गई है। जालंधर की बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक की इंडस्ट्री को गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, यूपी, पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों से बड़े आर्डर मिल रहे हैं। व्यापारियों ने इन आर्डरों को आने वाली सर्दी तक पूरा करके देना है। इसलिए अब हर रोज फैक्ट्रियों में तेजी के साथ बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक बन रहे हैं।
अब हालात बदले हैं और इंडस्ट्री में नई जान आ गई है। जालंधर की बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक की इंडस्ट्री को गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, यूपी, पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों से बड़े आर्डर मिल रहे हैं। व्यापारियों ने इन आर्डरों को आने वाली सर्दी तक पूरा करके देना है। इसलिए अब हर रोज फैक्ट्रियों में तेजी के साथ बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक बन रहे हैं।
मीडियम क्वालिटी वाले रैकेट की सर्वाधिक मांग
बाजार में इस समय मीडियम क्वालिटी के रैकेट की मांग सर्वाधिक है। सिल्वर और लोहे का बना यह मध्यम दर्जे का रैकेट 100 रुपये से लेकर 400 रुपये तक में बिक रहा है। व्यापारियों को मीडियम क्वालिटी के रैकेट बनाने के आर्डर ज्यादा मिल रहे हैं। बेदी शटलकॉक इंडस्ट्री के मालिक जौली बेदी ने बताया कि व्यापारियों को डर था कि आने वाली सर्दी में भी व्यापार धीमा होगा।
लेकिन पीवी सिंधु के वर्ल्ड चैंपियन बनने से व्यापार ने रफ्तार पकड़ी है। अब इंडस्ट्री को आडर मिलने शुरु हुए हैं। सर्दी में इनडोर गेम्स की डिमांड बढ़ जाती है। इसलिए बैडमिंटन का व्यापार भी सर्दी के मौसम में बढ़ता है। यहां पर तैयार होने वाले रैकेट और शटलकॉक गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल इत्यादि राज्यों में भेजे जाते हैं।
लेकिन पीवी सिंधु के वर्ल्ड चैंपियन बनने से व्यापार ने रफ्तार पकड़ी है। अब इंडस्ट्री को आडर मिलने शुरु हुए हैं। सर्दी में इनडोर गेम्स की डिमांड बढ़ जाती है। इसलिए बैडमिंटन का व्यापार भी सर्दी के मौसम में बढ़ता है। यहां पर तैयार होने वाले रैकेट और शटलकॉक गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल इत्यादि राज्यों में भेजे जाते हैं।