फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Workshop on Cancer in PGI, Chandigarh

कैंसर होने के कारणों पर चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 01 Sep 2014 01:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 01 Sep 2014 01:39 PM IST
विज्ञापन
Workshop on Cancer in PGI, Chandigarh

सीटी स्कैन के दौरान निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर के चांस को सिरे से खारिज कर दिया गया है। इस पर पीजीआई में इमरजेंसी रेडियोलॉजी की तीन दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें इस क्षेत्र के पितामह कहे जाने वाले अमेरिकी प्रांत स्थित इलिनोएस की रस यूनिवर्सिटी मेडिकल के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलाजी के प्रोफेसर लियोनार्ड बर्लिन भी पहुंचे।

विज्ञापन


उनका कहना है कि अब तक ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है, जिससे माना जाए कि सीटी स्कैन के डोज से कैंसर का खतरा रहता है। यह सब एक मनगढ़ंत कहानी है। इसे यूएस मीडिया के एक दो घरानों ने ही फैला रखा है।
विज्ञापन


यह जरूर है कि जब भी रेडिएशन प्लांट में एक्सीडेंट जैसी कुछ घटनाएं होगी, तभी कैंसर होने की संभावना रहेगी। प्लांट से रेडिएशन लीक होने पर लोग ल्यूकेमिया, थायराइड व ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ सकते हैं। जापान में लंग्स कैंसर के भी सुबूत मिले हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं मिले रेडिएशन से कैंसर के सबूत

Workshop on Cancer in PGI, Chandigarh

प्रोफेसर लियोनार्ड बर्लिन ने बताया कि सीटी स्कैन के दौरान रेडिएशन के बहुत ही कम डोज दिए जाते हैं। यदि किसी मरीज का तीन से चार बार सीटी स्कैन हो तब भी उसके रेडिएशन का डोज उस स्थिति तक नहीं पहुंच सकता, जिससे कैंसर होने को खतरा हो।

सिर के सीटी स्कैन में पांच एमएल सीव्रत का प्रयोग होता है, जबकि चेस्ट में 10 एमएल सीव्रत तो पेट के लिए 10-15 सीव्रत का इस्तेमाल किया जाता है।

शून्य से लेकर 100 एमएल सीव्रत डोज तक किसी भी तरह के कैंसर का कोई खतरा नहीं है। इस तरह से कैंसर होने के अब तक कोई भी प्रमाण भी नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि रेडिएशन से चिकित्सकों को भी कोई खतरा नहीं है।

साल 1960-70 के बाद से कोई भी ऐसी सूचना नहीं मिली है, जिससे किसी डाक्टर को रेडिएशन से खतरा पैदा हुआ हो। सीटी स्कैन करते वक्त डाक्टरों को सुरक्षा को पूरा इंतजाम करना चाहिए।

रेडियोलाजिस्ट का विकल्प है टेलीरेडियोलॉजी

Workshop on Cancer in PGI, Chandigarh

न्यू डेली आपरेशन सेंटर की डायरेक्टर डॉ. अंजलि अग्रवाल के मुताबिक, भारत में एक लाख लोगों पर एक रेडियोलाजिस्ट है, जबकि अमेरिका में दस हजार पर एक। रेडियोलाजिस्ट की बेहद कमी है। ऐसे में टेलीरेडियोलाजी का कंसेप्ट काम कर सकता है।

धीरे-धीरे यह काफी सक्सेस होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि दूर-दराज गांवों में इमेजिंग सेंटर तो हैं, लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं मिलते। ऐसे में टेलीरेडियोलाजी के तहत वे इमेजिंग भेजकर रेडियोलाजिस्ट आईपैड या लैपटॉप में आसानी से देख सकता है।

एम्स सहित कई इंस्टीट्यूट इस टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं। इस तकनीक के तहत रेडियोलाजिस्ट 24 घंटे 365 दिन मौजूद रह सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed