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लॉकडाउन में काम लिया, अब 20 कर्मियों को बिना नोटिस दिए निकाला और सैलरी भी नहीं दी
Tue, 09 Jun 2020 01:11 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 01:11 PM IST
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नौकरी से निकाले गए कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ कोरोना का कहर दूसरी तरफ बेरोजगारी का संकट। शहर में सैकड़ों लोगों पर यह दोहरी मार पड़ रही है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित एक्सप्रेसबीस नाम की कंपनी ने सोमवार को बिना नोटिस दिए कुल 20 कर्मचारियों को निकाल दिया।
नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारी कंपनी के बाहर ही बैठे रहे और कभी पुलिस को तो कभी मीडिया से मदद की गुहार लगाते रहे। आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान भी कंपनी ने काम लिया लेकिन जब जरूरत खत्म हो गई तो कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनमें से कई कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली है।
कंपनी के बाहर मायूस बैठे कर्मचारियों ने कहा कि वह लोग पिछले कई वर्षों से यहां पर काम कर रहे हैं। निकाले गए कई कर्मचारी एक दिन पहले भी काम पर गए थे। पूरे दिन की ड्यूटी करने के बाद जैसे ही वह घर पहुंचे, कंपनी के मैनेजर संदीप की तरफ से उन्हें फोन आया और कहा गया कि कल से मत आना।
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वजह पूछा तो परफॉर्मेंस की बात कहकर टाल दिया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान भी कंपनी बंद नहीं रही। कर्मचारियों के मुताबिक, शटर बंद कर रात में भी यहां पर काम चलता रहा। पास रहने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर रात में बुलाया जाता था और फिर सुबह उजाला होने से पहले उन्हें पैदल घर भेज दिया जाता था।
कर्मचारियों ने बताया कि उस समय कंपनी में पार्सल प्रोसेसिंग का काम बहुत था। अब जब सारा काम हो चुका है तो कंपनी से सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारी कंपनी के बाहर ही बैठे रहे और कभी पुलिस को तो कभी मीडिया से मदद की गुहार लगाते रहे। आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान भी कंपनी ने काम लिया लेकिन जब जरूरत खत्म हो गई तो कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इनमें से कई कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली है।
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कंपनी के बाहर मायूस बैठे कर्मचारियों ने कहा कि वह लोग पिछले कई वर्षों से यहां पर काम कर रहे हैं। निकाले गए कई कर्मचारी एक दिन पहले भी काम पर गए थे। पूरे दिन की ड्यूटी करने के बाद जैसे ही वह घर पहुंचे, कंपनी के मैनेजर संदीप की तरफ से उन्हें फोन आया और कहा गया कि कल से मत आना।
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वजह पूछा तो परफॉर्मेंस की बात कहकर टाल दिया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान भी कंपनी बंद नहीं रही। कर्मचारियों के मुताबिक, शटर बंद कर रात में भी यहां पर काम चलता रहा। पास रहने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर रात में बुलाया जाता था और फिर सुबह उजाला होने से पहले उन्हें पैदल घर भेज दिया जाता था।
कर्मचारियों ने बताया कि उस समय कंपनी में पार्सल प्रोसेसिंग का काम बहुत था। अब जब सारा काम हो चुका है तो कंपनी से सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
पुलिस भी कुछ न कर पाई, अब लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सैलरी भी नहीं दी गई है। कई कर्मचारियों ने कहा कि उनकी सैलरी इंस्टॉलमेंट में दी जा रही है। इसके अलावा मार्च के बाद से कर्मचारियों का पीएफ भी नहीं कटा है। कंपनी ने निकालने के लिए कोई कारण भी नहीं बताया है। ऐसे में सभी चिंतित हैं। कहा कि अब न तो मैनेजर संदीप फोन उठा रहा है और न ही उन्हें जवाब दे रहा है। ऐसे में अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। वर्तमान समय में नौकरी मिलना भी मुश्किल है।
कर्मचारियों ने 112 नंबर पर भी फोन किया और पुलिस आई लेकिन वह भी कोई मदद नहीं कर पाए। इसके बाद सोमवार को ही यह सभी कर्मचारी लेबर कोर्ट भी पहुंचे। जहां इन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें वापस रखा जाए क्योंकि वर्तमान समय में नई नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है। वह अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगे। अमर उजाला ने भी कंपनी के मैनेजर संदीप को फोन किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
परिवार कैसे चलेगा इसकी बहुत चिंता हो रही
मैं यहां पिछले 3 साल से काम कर रहा था। लॉकडाउन में भी हमें काम के लिए बुलाया गया लेकिन अब जब उनका काम खत्म हो गया तो हमें बिना कारण बताए नौकरी से निकाल दिया गया। घर पर मां, पत्नी, भाई और छोटा बच्चा है। पिता की मृत्यु हो गई है। ऐसे में अब समझ नहीं आ रहा कि परिवार कैसे चलेगा। कंपनी ने अप्रैल में भी सैलरी नहीं दी है।
- कुलदीप, कर्मचारी
किसी को नौकरी से न निकाला जाए
घर में 7 लोग हैं। इस कंपनी में पिछले दो साल से ज्यादा काम करते हो गया है। कंपनी ने अप्रैल में मुझे सिर्फ 680 रुपये दिए हैं, उसके बाद से कुछ नहीं मिला है। आज के समय में कहीं भी नई नौकरी नहीं मिल रही है। ऐसे में अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। हम मांग कर रहे हैं कि किसी को भी नौकरी से नहीं निकाला जाए और हमें यही पर काम दिया जाए।
- पंकज, कर्मचारी
कर्मचारियों ने 112 नंबर पर भी फोन किया और पुलिस आई लेकिन वह भी कोई मदद नहीं कर पाए। इसके बाद सोमवार को ही यह सभी कर्मचारी लेबर कोर्ट भी पहुंचे। जहां इन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें वापस रखा जाए क्योंकि वर्तमान समय में नई नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है। वह अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगे। अमर उजाला ने भी कंपनी के मैनेजर संदीप को फोन किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
परिवार कैसे चलेगा इसकी बहुत चिंता हो रही
मैं यहां पिछले 3 साल से काम कर रहा था। लॉकडाउन में भी हमें काम के लिए बुलाया गया लेकिन अब जब उनका काम खत्म हो गया तो हमें बिना कारण बताए नौकरी से निकाल दिया गया। घर पर मां, पत्नी, भाई और छोटा बच्चा है। पिता की मृत्यु हो गई है। ऐसे में अब समझ नहीं आ रहा कि परिवार कैसे चलेगा। कंपनी ने अप्रैल में भी सैलरी नहीं दी है।
- कुलदीप, कर्मचारी
किसी को नौकरी से न निकाला जाए
घर में 7 लोग हैं। इस कंपनी में पिछले दो साल से ज्यादा काम करते हो गया है। कंपनी ने अप्रैल में मुझे सिर्फ 680 रुपये दिए हैं, उसके बाद से कुछ नहीं मिला है। आज के समय में कहीं भी नई नौकरी नहीं मिल रही है। ऐसे में अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। हम मांग कर रहे हैं कि किसी को भी नौकरी से नहीं निकाला जाए और हमें यही पर काम दिया जाए।
- पंकज, कर्मचारी
कंपनी के मैनेजर ने फोन कर मना किया
मुझे यहां काम करते हुए 2 साल से ज्यादा का समय हो गया है। 16 मई को मुझे कंपनी की तरफ से सिर्फ 1020 रुपये मिले थे। नौकरी जाने के बाद से बहुत चिंता बढ़ गई है। कंपनी के मैनेजर का फोन आया था कि अब से काम पर नहीं आना है। जब कारण पूछा तो कहा कि परफॉर्मेंस का मामला है। इसके बाद कोई जवाब नहीं दिया।
- रोहित, कर्मचारी
कोई मदद नहीं कर रहा
मैं यहां पर एक साल से काम कर रहा हूं। ऐसे समय पर जब सभी को एक दूसरे का साथ देना चाहिए तो कंपनी ने हम सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि हम अपना परिवार कैसे चलाएंगे। अब कंपनी का मैनेजर फोन भी नहीं उठाता है। बहुत बुरी स्थिति है। एक साथ इतने लोगों को निकाल दिया है कोई मदद नहीं कर रहा।
- धर्मेंद्र, कर्मचारी
मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। आप कंपनी के मैनेजर संदीप से बात करें। हालांकि हमने सभी कर्मचारियों को पहले ही बता दिया था कि इस कंपनी का कुछ हिस्सा अंबाला में शिफ्ट हो रहा है। अगर वह काम करना चाहते हैं तो वहां जाकर काम कर सकते हैं। रात में यहां पर कोई काम नहीं होता था। सिक्योरिटी गार्ड इसका गवाह है।
- रवीश, एरिया हेड, एक्सप्रेसबीस
- रोहित, कर्मचारी
कोई मदद नहीं कर रहा
मैं यहां पर एक साल से काम कर रहा हूं। ऐसे समय पर जब सभी को एक दूसरे का साथ देना चाहिए तो कंपनी ने हम सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि हम अपना परिवार कैसे चलाएंगे। अब कंपनी का मैनेजर फोन भी नहीं उठाता है। बहुत बुरी स्थिति है। एक साथ इतने लोगों को निकाल दिया है कोई मदद नहीं कर रहा।
- धर्मेंद्र, कर्मचारी
मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। आप कंपनी के मैनेजर संदीप से बात करें। हालांकि हमने सभी कर्मचारियों को पहले ही बता दिया था कि इस कंपनी का कुछ हिस्सा अंबाला में शिफ्ट हो रहा है। अगर वह काम करना चाहते हैं तो वहां जाकर काम कर सकते हैं। रात में यहां पर कोई काम नहीं होता था। सिक्योरिटी गार्ड इसका गवाह है।
- रवीश, एरिया हेड, एक्सप्रेसबीस