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Womens Day: 'मैंने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए छोड़ दी प्रोफेसर की नौकरी...और बन गई आईपीएस'
Sun, 08 Mar 2020 02:31 PM IST
खुशबू गोयल
अमित गुप्ता, चंडीगढ़
अमित गुप्ता, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 08 Mar 2020 02:31 PM IST
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आईपीएस नेहा यादव
- फोटो : अमर उजाला
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बचपन दिल्ली में बीता, पिता गवर्नमेंट टीचर हैं...उन्हें देखकर प्रोफेसर बनने की ऐसी ललक जगी और एक दिन दिल्ली यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर बन गईं। लेकिन भ्रष्टाचार देखकर मन में पुलिस ऑफिसर बनने की इच्छा जागी और तैयारी में लग गई। दिन रात पढ़ाई कर आईपीएस बन गई। इस शख्सियत का नाम है नेहा यादव। जो आजकल चंडीगढ़ पुलिस में बतौर एएसपी जिम्मा संभाल रही हैं।
आईपीएस नेहा यादव बताती हैं, ‘वह वेस्ट दिल्ली की रहने वाली हैं। उनकी मां हाउस वाइफ औरपिता गवर्नमेंट टीचर हैं। एक छोटा भाई है।’ नेहा ने इकोनॉमिक्स सब्जेक्ट से अपनी पढ़ाई जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से पूरी की है। वर्ष 2012 में पढ़ाई पूरी होने के अगले साल 2013 में उनका दिल्ली यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हो गया। करीब दो साल वह प्रोफेसर के पद पर बनी रही।
उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि देश भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। इसके बाद से ही उन्होंने पुलिस ऑफिसर बनने की सोची और दिन रात पढ़ाई कर आईपीएस की तैयारी शुरू कर दी। दिक्कतें उस वक्त आनी शुरू हुई, जब पापा को पता लगा कि उनकी बेटी पुलिस ऑफिसर बनना चाहती है। लेकिन मम्मी इस बात से बहुत खुश हुई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा और वर्ष 2015 में एजीएमयूटी कैडर में उनका सेलेक्शन हो गया। इसके बाद उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा और पापा भी काफी खुश हुए।
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आईपीएस नेहा यादव बताती हैं, ‘वह वेस्ट दिल्ली की रहने वाली हैं। उनकी मां हाउस वाइफ औरपिता गवर्नमेंट टीचर हैं। एक छोटा भाई है।’ नेहा ने इकोनॉमिक्स सब्जेक्ट से अपनी पढ़ाई जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से पूरी की है। वर्ष 2012 में पढ़ाई पूरी होने के अगले साल 2013 में उनका दिल्ली यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हो गया। करीब दो साल वह प्रोफेसर के पद पर बनी रही।
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उन्होंने बताया कि उन्हें लगा कि देश भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। इसके बाद से ही उन्होंने पुलिस ऑफिसर बनने की सोची और दिन रात पढ़ाई कर आईपीएस की तैयारी शुरू कर दी। दिक्कतें उस वक्त आनी शुरू हुई, जब पापा को पता लगा कि उनकी बेटी पुलिस ऑफिसर बनना चाहती है। लेकिन मम्मी इस बात से बहुत खुश हुई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा और वर्ष 2015 में एजीएमयूटी कैडर में उनका सेलेक्शन हो गया। इसके बाद उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा और पापा भी काफी खुश हुए।
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सबसे सेंसेटिव जोन में है पोस्टिंग
आईपीएस में सेलेक्शन होने के बाद शुरुआती दौर में उनकी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस में पोस्टिंग हुई। इसके बाद वर्ष 2018 में उनका तबादला चंडीगढ़ में हुआ। जनवरी वर्ष 2019 में उन्हें साउथ डिविजन एरिया में एएसपी का पदभार सौंपा गया। बता दें कि चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा क्राइम साउथ डिविजन के एरिया में ही होता है। ऐसे में नेहा की बेहतरीन सुपर विजन में काफी हद तक क्राइम कम हुआ है।
बच्चियों को देखने का समाज का अलग नजरिया
नेहा यादव कहतीं हैं कि बच्चियों को समाज एक अलग नजरिए से देखता है। ऐसे में जब कभी उनके पास पोक्सो के केस आते हैं, तो बहुत ज्यादा दुख होता है। इसके अलावा महिलाओं को एकजुट रहने की जरूरत है। हर किसी का अपना सपना पूरा करने का अधिकार है। कोई भी मेहनत की बदौलत अपने सपनों को साकार कर सकता है।
बच्चियों को देखने का समाज का अलग नजरिया
नेहा यादव कहतीं हैं कि बच्चियों को समाज एक अलग नजरिए से देखता है। ऐसे में जब कभी उनके पास पोक्सो के केस आते हैं, तो बहुत ज्यादा दुख होता है। इसके अलावा महिलाओं को एकजुट रहने की जरूरत है। हर किसी का अपना सपना पूरा करने का अधिकार है। कोई भी मेहनत की बदौलत अपने सपनों को साकार कर सकता है।