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महिला वकीलों ने शराब की दुकानें खुलने पर जताई आपति
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चंडीगढ़। प्रशासन के कर्फ्यू हटाकर शराब के ठेके खोलने पर महिला वकीलों ने विरोध जताया है। महिला वकीलों का कहना है कि कर्फ्यू के कारण एक तरफ तो पहले ही घरेलू हिंसा के मामले बढ़ गए हैं। दूसरी तरफ प्रशासन ने ठेके और मार्केट खोलने का फैसला ले लिया है। यह फैसला वर्तमान स्थिति को और भी भयानक कर देगा। शहर में पहले ही कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे ना केवल कोरोना वायरस के मामले बढ़ेंगे, बल्कि घरेलू हिंसा केे मामलों में भी तेजी से वृद्धि होगी। प्रशासन को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
कोट
कर्फ्यू हटाना शहर के लिए साबित होगा घातक
चंडीगढ़ प्रशासन का कर्फ्यू खोलने का फैसला शहर के लिए घातक साबित हो सकता है। जब शहर में कम मामले थे तब सब बंद कर दिया गया और अब मामले सौ के करीब आने को हैं तो सब खोल दिया गया। कई एरिया अभी भी रेड जोन में हैं। यह कदम आम जनता के पक्ष में नहीं है। इसके परिणाम बहुत ही घातक होंगे। यह कर्फ्यू 17 मई तक तो रहना चाहिए। जहां लोगों ने इतना संघर्ष किया है वह 17 मई तक भी कर लेंगे। जनता कल्याण के बारे में सोचते हुए प्रशासन को इस फैसले पर विचार करना चाहिए ताकि अपने शहर को इस महामारी के खतरे से बचाया जा सके।
- सुप्रीत कौर बराड़, वकील जिला अदालत
ग्राहक के साथ-साथ दुकानदार को भी रहेगा खतरा
वर्तमान स्थिति को देखते हुए मैं प्रशासन के इस फैसले के बिल्कुल खिलाफ हूं। यह फैसला चंडीगढ़ के लिए और भी मुश्किलें पैदा कर देगा। कर्फ्यू के दौरान लोग घरों में नहीं रुक पाए जिसकी वजह से पुलिस को बिना काम के घूमने वाले लोगों को राउंडअप करना पड़ा। प्रशासन को केवल जरूरत के सामान की दुकानें ही खोलने की अनुमति देनी चाहिए थी। उसके लिए भी प्रशासन को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए हर दुकान पर पांच सदस्यों को खड़े होने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। यह फैसला ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदार के लिए भी खतरनाक है।
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- सुशीला भारद्वाज, वकील जिला अदालत
मामले बढ़ने पर प्रशासन की क्या है तैयारी
ठेके खुलने से सीमित पैसा शराब पर खर्च किया जाएगा, जिससे घरेलू झगड़े बढ़ेंगे। प्रशासन ने इतना बड़ा फैसला लिया है तो प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने मामले बढ़ने पर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं पर क्या तैयारी की है। हम सभी जानते हैं कि लॉकडाउन समस्या का समाधान नहीं है। यह एक विराम है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को दुरुस्त करके और लोगों को बचाव के प्रति जागरूक करके समस्या का समाधान हो सकता है। इस महामारी से निपटने के लिए सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन दोनों की कोई तैयारी नहीं है। युवाओं को बुजुर्गों और बच्चों को बचाने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
- मंजीत कौर संधू, वकील जिला अदालत
कोरोना और शराब दोनों से होता है फेफड़ों पर असर
तंबाकू, सिगरेट और शराब की दुकानें खुलने से घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी घातक प्रभाव पड़ेगा। तंबाकू, सिगरेट, शराब, और कोरोना का सीधा असर फेफड़ों पर होता है। इससे लोगों के लिए डबल खतरा उत्पन्न होगा। लॉकडाउन के चलते मेरे पास घरेलू हिंसा के 12 मामले आ चुके हैं। चंडीगढ़ से लगते मोहाली को भी कोरोना वायरस हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। ऐसे में चंडीगढ़ से कर्फ्यू हटाना खतरे से खाली नहीं है। इस समय डॉक्टर्स का जीवन भी खतरे में है। ऐसे में हमें अपनी और डॉक्टरों की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए अपने घरों में रहना चाहिए।
- गीतांजलि वाधवा, वकील जिला अदालत
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कर्फ्यू हटाना शहर के लिए साबित होगा घातक
चंडीगढ़ प्रशासन का कर्फ्यू खोलने का फैसला शहर के लिए घातक साबित हो सकता है। जब शहर में कम मामले थे तब सब बंद कर दिया गया और अब मामले सौ के करीब आने को हैं तो सब खोल दिया गया। कई एरिया अभी भी रेड जोन में हैं। यह कदम आम जनता के पक्ष में नहीं है। इसके परिणाम बहुत ही घातक होंगे। यह कर्फ्यू 17 मई तक तो रहना चाहिए। जहां लोगों ने इतना संघर्ष किया है वह 17 मई तक भी कर लेंगे। जनता कल्याण के बारे में सोचते हुए प्रशासन को इस फैसले पर विचार करना चाहिए ताकि अपने शहर को इस महामारी के खतरे से बचाया जा सके।
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- सुप्रीत कौर बराड़, वकील जिला अदालत
ग्राहक के साथ-साथ दुकानदार को भी रहेगा खतरा
वर्तमान स्थिति को देखते हुए मैं प्रशासन के इस फैसले के बिल्कुल खिलाफ हूं। यह फैसला चंडीगढ़ के लिए और भी मुश्किलें पैदा कर देगा। कर्फ्यू के दौरान लोग घरों में नहीं रुक पाए जिसकी वजह से पुलिस को बिना काम के घूमने वाले लोगों को राउंडअप करना पड़ा। प्रशासन को केवल जरूरत के सामान की दुकानें ही खोलने की अनुमति देनी चाहिए थी। उसके लिए भी प्रशासन को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए हर दुकान पर पांच सदस्यों को खड़े होने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। यह फैसला ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदार के लिए भी खतरनाक है।
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- सुशीला भारद्वाज, वकील जिला अदालत
मामले बढ़ने पर प्रशासन की क्या है तैयारी
ठेके खुलने से सीमित पैसा शराब पर खर्च किया जाएगा, जिससे घरेलू झगड़े बढ़ेंगे। प्रशासन ने इतना बड़ा फैसला लिया है तो प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने मामले बढ़ने पर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं पर क्या तैयारी की है। हम सभी जानते हैं कि लॉकडाउन समस्या का समाधान नहीं है। यह एक विराम है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को दुरुस्त करके और लोगों को बचाव के प्रति जागरूक करके समस्या का समाधान हो सकता है। इस महामारी से निपटने के लिए सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन दोनों की कोई तैयारी नहीं है। युवाओं को बुजुर्गों और बच्चों को बचाने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
- मंजीत कौर संधू, वकील जिला अदालत
कोरोना और शराब दोनों से होता है फेफड़ों पर असर
तंबाकू, सिगरेट और शराब की दुकानें खुलने से घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी घातक प्रभाव पड़ेगा। तंबाकू, सिगरेट, शराब, और कोरोना का सीधा असर फेफड़ों पर होता है। इससे लोगों के लिए डबल खतरा उत्पन्न होगा। लॉकडाउन के चलते मेरे पास घरेलू हिंसा के 12 मामले आ चुके हैं। चंडीगढ़ से लगते मोहाली को भी कोरोना वायरस हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। ऐसे में चंडीगढ़ से कर्फ्यू हटाना खतरे से खाली नहीं है। इस समय डॉक्टर्स का जीवन भी खतरे में है। ऐसे में हमें अपनी और डॉक्टरों की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए अपने घरों में रहना चाहिए।
- गीतांजलि वाधवा, वकील जिला अदालत