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Chandigarh News: महिला उद्यमियों ने युवाओं के साथ साझा किए अपने अनुभव
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चंडीगढ़। पेक में शनिवार को दो दिवसीय ई-समिट की शुरुआत की गई। इस दौरान दोपहर के समय वुमन कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसका विषय ‘बाधाओं को पार कर सफल महिला उद्यमियों की दृढ़ता की कहानियां’ था। महिला उद्यमियों ने युवा दर्शकों के साथ अपने उद्देश्य, यात्रा और चुनौतियों को साझा किया। इस दौरान युवाओं को सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल और नई टेक्नोलॉजी का अपने काम के हित में उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान एक युवक ने प्रश्न पूछा, महिला होकर स्टार्ट अप करने में क्या आपको कोई परेशानी नहीं आई। इस पर वीमन मेड क्राफ्ट की सीईओ और युवा उद्यमी दृष्टि खरबंदा ने जवाब दिया कि महिला होकर स्टार्ट अप करने में कोई समस्या नहीं आती, स्टार्टअप एक कौशल है, जिसे महिला और पुरुष कोई भी कर सकता है। महिलाओं के लिए समस्या समाज के नजरिए को लेकर आती है। आप जब बाहर काम करने जाते हैं तो महिलाओं को हर फेज में छेड़छाड़ और स्टॉकिंग का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनके लिए परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। लेकिन एक पुरुष अगर जल्दी सुबह या देर रात काम के लिए बाहर जा रहा है या दूसरे लिंग के लोगों के साथ काम कर रहा है तो ये समस्या ना के बराबर होती है।
वुमन कॉन्क्लेव में बड़ी कैब्स एंड केअर की फाउंडर और सीईओ सरताज लाबां, माइंडकॉग की सीईओ कनिका राजदेव और काम इंडिया की सीईओ शायरा कंसल शामिल थीं। इस दौरान कनिका राजदेव ने बताया कि स्टार्ट-अप के लिए आपके विचार के साथ आप फंड कहां से एकत्रित करेंगे और बाजार में खुद को कैसे कायम रखेंगे, इसकी योजना होना जरूरी है। क्योंकि खाली पेट आप कुछ नहीं कर सकते हैं, आपकी रूचि के काम के लिए भी पैसा जरूरी है। अन्यथा आप ज्यादा समय बाजार में चल नहीं पाएंगे। सरताज लांबा ने युवाओं को बताया कि स्टार्ट-अप करने के लिए पहले आपकी इस क्षेत्र में रूचि होनी चाहिए। क्योंकि स्टार्ट-अप में आपको वित्तीय जोखिम भी उठाने पड़ते हैं। कई बार आप कमाई नहीं भी कर पाते हैं, लेकिन आपको हर समय स्वयं को प्रेरित करना पड़ता है कि मैं कर सकती हूं। पेक के एंटरप्रेन्योरशिप एंड इंक्यूबेशन सेल की ओर से आयोजित दो दिवसीय ई-समिट का उद्घाटन निदेशक डॉ बलदेव सेतिया की ओर से किया गया। इस दौरान युवाओं ने स्टार्ट-अप स्टॉल भी लगाए।
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वुमन कॉन्क्लेव में बड़ी कैब्स एंड केअर की फाउंडर और सीईओ सरताज लाबां, माइंडकॉग की सीईओ कनिका राजदेव और काम इंडिया की सीईओ शायरा कंसल शामिल थीं। इस दौरान कनिका राजदेव ने बताया कि स्टार्ट-अप के लिए आपके विचार के साथ आप फंड कहां से एकत्रित करेंगे और बाजार में खुद को कैसे कायम रखेंगे, इसकी योजना होना जरूरी है। क्योंकि खाली पेट आप कुछ नहीं कर सकते हैं, आपकी रूचि के काम के लिए भी पैसा जरूरी है। अन्यथा आप ज्यादा समय बाजार में चल नहीं पाएंगे। सरताज लांबा ने युवाओं को बताया कि स्टार्ट-अप करने के लिए पहले आपकी इस क्षेत्र में रूचि होनी चाहिए। क्योंकि स्टार्ट-अप में आपको वित्तीय जोखिम भी उठाने पड़ते हैं। कई बार आप कमाई नहीं भी कर पाते हैं, लेकिन आपको हर समय स्वयं को प्रेरित करना पड़ता है कि मैं कर सकती हूं। पेक के एंटरप्रेन्योरशिप एंड इंक्यूबेशन सेल की ओर से आयोजित दो दिवसीय ई-समिट का उद्घाटन निदेशक डॉ बलदेव सेतिया की ओर से किया गया। इस दौरान युवाओं ने स्टार्ट-अप स्टॉल भी लगाए।
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