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मिसाल: उम्र भी नहीं आई आड़े, 31 साल पहले छूटी पढ़ाई, अब बेटे संग परीक्षा दे रहीं 46 वर्षीय रजनी

Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना ( पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
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Woman participated in 12th class exam with her son in Ludhiana
बेटे संग रजनी साथी। - फोटो : अमर उजाला

लोहारा इलाके की सुंदर नगर कालोनी में रहने वाली 46 वर्षीय रजनी साथी इन दिनों अपने 18 साल के बेटे की क्लासमेट बनकर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओपन स्कूल कैटेगिरी में 12 वीं क्लास की परीक्षा दे रही है। पारिवारिक परेशानी के चलते वह 1990 में दसवीं क्लास की परीक्षा नहीं दे सकी।

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दो साल पहले पति राजकुमार साथी की प्रेरणा से दोबारा पढ़ाई शुरू की। 2018 में उसने अपने बेटे दीपक साथी के साथ ही दसवीं की परीक्षा पास की थी और मंगलवार दोबारा दोनों मां-बेटा एक साथ 12वीं की परीक्षा में पंजाबी लाजमी का पेपर देने पहुंचे।
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रजनी ने बताया कि वह पढ़ना चाहती थी। 1989 में उसने तरनतारन के आर्य गर्ल्स हाईस्कूल से नवीं कक्षा तो पास कर ली। परिवार में चल रही समस्या के कारण दसवीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी थी। दो बेटियां ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी हैं और बेटा दीपक उसके साथ ही 12वीं की परीक्षा दे रहा है।
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वह बताती हैं कि पति राजकुमार साथी पिछले कई साल से उसे अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए समझा रहे थे। वर्ष 2018 में उसने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओपन कैटेगिरी में दसवीं की परीक्षा पास की। वह बेटे दीपक के साथ ही ट्यूशन पढ़ती और घर में भी बेटे के साथ परीक्षा की तैयारी करती।

लुधियाना के सिविल अस्पताल में पिछले पांच साल से पार्ट टाइम वार्ड अटेडेंट के तौर पर तैनात रजनी कहती हैं कि पढ़-लिख जाऊंगी तो नौकरी रेगुलर होने का मौका मिल सकता है। दसवीं की परीक्षा पास करने पर उसकी काफी सराहना हुई थी और इसी ने उसे आगे भी पढ़ने के लिए उत्साहित किया।

रजनी बताती हैं कि जब दो साल पहले पढ़ाई दोबारा से शुरू की तो ट्यूशन सेंटर में छोटे बच्चों के बीच बैठकर पढ़ना थोड़ा अजीब लगता था लेकिन आज वह अपने फैसले से बेहद खुश है। पढ़ाई से लेकर घर के काम तक में पति पूरा सहयोग दे रहे हैं। मेरी सास सुमित्रा देवी भले ही खुद पढ़ी लिखी नहीं हैं, लेकिन पढ़ाई में मेरा पूरा सहयोग करतीं हैं। अस्पताल में स्टाफ से लेकर एसएमओ तक मुझे पढ़ाई में पूरा सहयोग देते हैं।

मोतियाबिंद का 3 फरवरी को कराया ऑपरेशन
रजनी ने बताया आंखों की रोशनी कम हो गई थी। इस कारण उसे नजदीक पड़ी चीज भी धुंधली दिखाई देती थी। इससे वह पढ़ भी नहीं पा रही थी। उसने 3 फरवरी को एक आंख की सर्जरी कराई और आज ठीक एक महीने बाद वह 12वीं की परीक्षा देने पहुंची।

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