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Hindi News ›   Chandigarh ›   Winter session of Haryana Legislative Assembly begins

हरियाणा विधानसभा: शीतकालीन सत्र प्रारंभ, पहले दिन छाया किसानों का मुद्दा, जमकर हंगामा भी हुआ

Fri, 17 Dec 2021 02:21 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 17 Dec 2021 02:21 PM IST
सार

हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को शुरू हुआ। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शोक प्रस्ताव पढ़ा। जलभराव की समस्या को लेकर सदन में हंगामा हुआ। वहीं कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने मेवात में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। 

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Winter session of Haryana Legislative Assembly begins
हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

विधानसभा शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में किसानों का मुद्दा छाया रहा। विपक्षी दल कांग्रेस, इनेलो समेत निर्दलीय विधायकों ने आंदोलन के दौरान मृत किसानों को शहीद का दर्जा, परिवार को नौकरी और मुआवजा देने की पैरवी की। तौशाम से विधायक किरण चौधरी द्वारा एमएसपी पर कानून बनाने को लेकर दिए गए प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने से खूब हंगामा हुआ।

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सदन की शुरुआत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिवंगत आत्माओं के लिए शोक संदेश पढ़े। इसी दौरान, इनेलो विधायक अभय चौटाला ने कहा कि शोक संदेश में आंदोलन में मृत किसानों को भी श्रद्धांजलि दी जाए। बाद में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मृत किसानों को श्रद्धांजलि दी। सदन की शुरुआत से लेकर समाप्त होने तक किसानों को मुद्दा छाया रहा। 
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विधायक किरण चौधरी द्वारा दिए गए एमएसपी पर कानून के प्रस्ताव को स्पीकर द्वारा नामंजूर किए जाने पर हंगामा हुआ। स्पीकर ने तर्क दिया कि ये मामला प्रदेश का नहीं बल्कि केंद्र का है। इस पर किरण चौधरी का पक्ष लेते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पिछले सत्र में तीन कृषि कानूनों के समर्थन में प्रस्ताव पास किया गया था वो भी तो केंद्र का मामला था। इसमें क्या दिक्कत है। हुड्डा के साथ साथ कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी इसका समर्थन किया और कहा कि अब तीन कानून रद्द हो चुके हैं। इसलिए एमएसपी पर कानून बनाने को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके इसे केंद्र के पास भेजा जाए। इसको लेकर स्पीकर और कांग्रेस नेताओं में तीखी बहस भी हुई। 
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डीएपी किल्लत समेत जलभराव के मुद्दे भी उठे
सदन में डीएपी किल्लत समेत खेती के दौरान किसानों जलभराव और कम सिंचाई पानी मिलने के मुद्दे उठाए गए। महम से निर्दलीय बलराज कुंडू, गीता भुक्कल ने खेतों में जलभराव की समस्या रखी। चिरंजीव राव, बलबीर सिंह, प्रदीप चौधरी ने किसानों की समस्याओं को सदन में रखा। विधायक जोगी राम ने खेतों में जाने वाले 20 साल पुराने खालों को तैयार करने की मांग रखी।


अब माफी मांगें मुख्यमंत्री : चौटाला
इनेलो विधायक अभय चौटाला ने किसानों के मुद्दे पर सरकार पर जमकर निशाने साधे। आंदोलन में मृत किसानों की मांगों की पैरवी करते हुए किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने और मुआवजे समेत शहीद हुए 715 किसानों के लिए स्मारक बनाने की मांग रखी। चौटाला ने कहा कि तीन कानूनों के समर्थन में मुख्यमंत्री स्वयं दो लाइन का एक समर्थन प्रस्ताव लेकर आए थे। उस समय मुख्यमंत्री ने सदन में ठोक कर कहा था कि ये कानून रद्द नहीं होंगे, ये कानून रहेंगे, रहेंगे, रहेंगे। अब प्रधानमंत्री को किसानों से माफी मांगी है तो सीएम भी मांफी मांगे। जैसे सरकार ने किसान आंदोलन में सरेंडर किया वैसे ही उस प्रस्ताव को भी वापस ले।

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