वायु प्रदूषण: हरियाणा में विंटर एक्शन प्लान लागू, टूटी सड़कों की मरम्मत और साफ सफाई पर विशेष ध्यान
एचएसपीसीबी के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने बताया कि हरियाणा में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। इन दिनों में मौसम के बदलाव और पराली जलाने की वजह से प्रदूषण के कण बढ़ते हैं। प्रत्येक जिले के पिछले तीन साल के पीएम 2.5 और पीएम 10 के आंकड़ों को विश्लेषण किया गया है।
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सर्दी के मौसम में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने राज्य में विंटर एक्शन प्लान लागू कर दिया है। इस प्लान के तहत सड़कों की साफ-सफाई आधुनिक मशीनों से की जाएगी। सड़कों में धूल के कणों को दबाने के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा। सर्दियों से पहले टूटी सड़कों की मरम्मत व पेच वर्क लगाने के लिए निगमों को निर्देश जारी किए गए हैं। निर्माण स्थल पर एंटी-स्मॉग गन तैनात होगी। वहीं, खुले में कूड़ा जलाने, होटलों और खुले भोजनालयों में कोयले और लकड़ी के उपयोग को भी रोकने का निर्देश जारी किया गया है।
एचएसपीसीबी के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने बताया कि हरियाणा में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। इन दिनों में मौसम के बदलाव और पराली जलाने की वजह से प्रदूषण के कण बढ़ते हैं। प्रत्येक जिले के पिछले तीन साल के पीएम 2.5 और पीएम 10 के आंकड़ों को विश्लेषण किया गया है। इसमें देखा गया कि पीएम 2.5 का वार्षिक औसत 71 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है, जो राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) की तय सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा है। वहीं, तीन सालों में पीएम 10 का वार्षिक औसत 153 माइक्रोग्राम रहा है।
यह भी राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि एक्शन प्लान को हरियाणा के सभी उपायुक्त, निगम आयुक्त, एसपी और प्रदूषण बोर्ड के सभी स्थानीय अधिकारियों को एक्शन प्लान भेज दिया गया और इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
टूटी सड़कें व धूल: वायु प्रदूषण बढ़ाने में सड़कों की धूल का काफी अहम रोल होता है। टूटी सड़कों में अक्सर धूल जमा हो जाती है। वाहनों की आवाजाही से यह धूल उड़ती रहती है। एचएसपीसीबी ने नगर पालिकाओं से कहा है कि सर्दियां शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करें। परिवहन विभाग को यातायात से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर ट्रैफिक को नियंत्रित करने का निर्देश जारी किया। नगर पालिका प्राधिकरण को सड़कों की साफ-सफाई के लिए अतिरिक्त मशीनें व स्प्रिंकलर की व्यवस्था करने को कहा है। यह भी निर्देश दिया है कि जरूरी हो तो किराये पर लेकर उसका व्यापक इस्तेमाल शुरू कर दें।
निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां: भवन निर्माण संबंधी जानकारियां प्रदूषण बोर्ड के डस्ट पोर्टल में पंजीकृत कराना जरूरी होगा। पांच हजार स्कावयर मीटर से 10 हजार स्कावायर मीटर तक के निर्माण के लिए एक एंटी-स्मॉग गन, दस से 15 हजार स्कवायर मीटर के लिए दो, 15 से 20 हजार स्कवायर मीटर के लिए तीन और 20 हजार स्कवायर मीटर से ऊपर के लिए एंटी-स्मॉग गन लगाने का निर्देश दिया है।
पटाखों पर रोक: हरियाणा सरकार ने एक नवंबर से 31 जनवरी 2024 तक पटाखों के निर्माण, बेचने और खरीदने पर प्रतिबंध लगाया है। सिर्फ ग्रीन पटाखे की चलाने की अनुमति होगी।
वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम: हरियाणा में 29 रियल टाइम निगरानी सिस्टम है। 32 मैन्युअल निगरानी सिस्टम हैं। 23 अतिरिक्त वास्तविक समय निगरानी स्टेशनों की खरीद का
प्रस्ताव विचाराधीन है। चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ में पांच-पांच रियल टाइम निगरानी सिस्टम लगाए जाने हैं। इसकी खरीद की तैयारी चल रही है। इसके अलावा पांच जिले रेवाड़ी, झज्जर, चरखी दादरी, रोहतक और जींद में प्रदूषण के स्रोत को जानने के लिए स्टडी करवाई जाएगी, ताकि उन स्रोतों पर लगाम कसी जा सके।
कूड़ा जलाने पर रोक: कूड़े की आग से निकला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने में काफी जिम्मेदार माना जाता है। एक्शन प्लान में शहरी निकायों को निर्देश दिया गया है कि खुले में अनाधिकृत रूप से जलाए जाने वाले कचरे की निगरानी करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।