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Chandigarh News: बीरेंद्र सिंह से कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी या बढ़ेगी अंदरूनी कलह?
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-दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकागुर्जन खरगे से की मुलाकात
-बोले, कांग्रेस किसी को सीएम का चेहरा नहीं बनाएगी, युवा और महिला नेताओं को मिलना चाहिए मौका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होते ही दो तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। एक तो यह है कि क्या वह प्रदेश में दो गुटों में बंटी कांग्रेस को एकजुट कर सकेंगे। ज्वाइनिंग के समय खुद बीरेंद्र सिंह ने कहा था कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनकी बुआ के छोरे हैं और रणदीप सुरजेवाला मामा के छोरे हैं, जबकि कुमारी सैलजा को बहन बताया था। जबकि दूसरा ये है कि क्या वह किसी एक गुट को समर्थन देंगे। क्योंकि हुड्डा के साथ उनकी कभी बात नहीं बनी और हुड्डा से नाराजगी के चलते ही वह पार्टी छोड़कर गए थे। पार्टी में ज्वाइनिंग करते ही बीरेंद्र सिंह अपने पुराने रंग में आने लगे हैं। उन्होंने खुलकर कहा है कि पार्टी में युवा और महिलाओं को आगे आना चाहिए। राजनीतिक लोग इसे कुमारी सैलजा का नाम आगे बढ़ाने की रणनीति करार दे रहे हैं।
बुधवार को बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के राजनीतिक हालातों को लेकर चर्चा की। बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बीरेंद्र सिंह ने गुटबाजी को लेकर कहा कि गुटबाजी तो छुड़ानी पड़ती है। जब तक नया क्षेत्र और नए लोग नई सोच के साथ आपकी पार्टी को मजबूती देंगे तो पुराने को भी महसूस होगा कि ये जो युवा ब्रिगेड आई है, उसे आगे बढ़ना चाहिए। पार्टी तभी मजबूत कर सकेंगे। वहीं, कांग्रेस हाईकमान द्वारा मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर हुड्डा का नाम घोषित करने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस ऐसा कभी नहीं करती। इसका लाभ भी मिलता है, जितने प्रयोग हो सकें, करने चाहिए। कांग्रेस बहुत बड़ी पार्टी है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा बदलाव ये होना चाहिए कि जो यंग नेता हैं उनकी उपस्थिति होनी चाहिए। उसमें चाहे महिलाएं हों या फिर यूथ। उनका पार्टी में जो प्रवेश होगा वो ही पार्टी की शक्ल बदलता है।
उधर, बताया जा रहा है कि बेशक बीरेंद्र सिंह ने पार्टी में ज्वाइनिंग के समय गुटबाजी को खत्म करने की जिम्मेदारी ली हो, लेकिन अब उनके बेबाक बयानों के कई मायने निकाले जा रहे हैं। क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा के साथ उनकी पहले भी नहीं बनी थी और हाल ही के दिनों में उनका एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह पूर्व सीएम हुड्डा की कार्यप्रणाली के बारे में बोल रहे थे। धीरे-धीरे बीरेंद्र सिंह खुलकर मैदान में आएंगे और खेलेंगे। देखना यह है कि वह पार्टी में गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश करेंगे या फिर एसआरके गुट कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी के गुट को मजबूत करेंगे।
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-बोले, कांग्रेस किसी को सीएम का चेहरा नहीं बनाएगी, युवा और महिला नेताओं को मिलना चाहिए मौका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होते ही दो तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। एक तो यह है कि क्या वह प्रदेश में दो गुटों में बंटी कांग्रेस को एकजुट कर सकेंगे। ज्वाइनिंग के समय खुद बीरेंद्र सिंह ने कहा था कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनकी बुआ के छोरे हैं और रणदीप सुरजेवाला मामा के छोरे हैं, जबकि कुमारी सैलजा को बहन बताया था। जबकि दूसरा ये है कि क्या वह किसी एक गुट को समर्थन देंगे। क्योंकि हुड्डा के साथ उनकी कभी बात नहीं बनी और हुड्डा से नाराजगी के चलते ही वह पार्टी छोड़कर गए थे। पार्टी में ज्वाइनिंग करते ही बीरेंद्र सिंह अपने पुराने रंग में आने लगे हैं। उन्होंने खुलकर कहा है कि पार्टी में युवा और महिलाओं को आगे आना चाहिए। राजनीतिक लोग इसे कुमारी सैलजा का नाम आगे बढ़ाने की रणनीति करार दे रहे हैं।
बुधवार को बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के राजनीतिक हालातों को लेकर चर्चा की। बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बीरेंद्र सिंह ने गुटबाजी को लेकर कहा कि गुटबाजी तो छुड़ानी पड़ती है। जब तक नया क्षेत्र और नए लोग नई सोच के साथ आपकी पार्टी को मजबूती देंगे तो पुराने को भी महसूस होगा कि ये जो युवा ब्रिगेड आई है, उसे आगे बढ़ना चाहिए। पार्टी तभी मजबूत कर सकेंगे। वहीं, कांग्रेस हाईकमान द्वारा मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर हुड्डा का नाम घोषित करने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस ऐसा कभी नहीं करती। इसका लाभ भी मिलता है, जितने प्रयोग हो सकें, करने चाहिए। कांग्रेस बहुत बड़ी पार्टी है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा बदलाव ये होना चाहिए कि जो यंग नेता हैं उनकी उपस्थिति होनी चाहिए। उसमें चाहे महिलाएं हों या फिर यूथ। उनका पार्टी में जो प्रवेश होगा वो ही पार्टी की शक्ल बदलता है।
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उधर, बताया जा रहा है कि बेशक बीरेंद्र सिंह ने पार्टी में ज्वाइनिंग के समय गुटबाजी को खत्म करने की जिम्मेदारी ली हो, लेकिन अब उनके बेबाक बयानों के कई मायने निकाले जा रहे हैं। क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा के साथ उनकी पहले भी नहीं बनी थी और हाल ही के दिनों में उनका एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह पूर्व सीएम हुड्डा की कार्यप्रणाली के बारे में बोल रहे थे। धीरे-धीरे बीरेंद्र सिंह खुलकर मैदान में आएंगे और खेलेंगे। देखना यह है कि वह पार्टी में गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश करेंगे या फिर एसआरके गुट कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी के गुट को मजबूत करेंगे।
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