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सुखना वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार दिखी जंगली बिल्ली और बार्किंग डियर

Sat, 29 Jan 2022 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 02:00 AM IST
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Wild cat and barking deer seen for the first time in Sukhna Wildlife Sanctuary
चंडीगढ़। शहर में 2600 हेक्टेयर में फैली सुखना वन्यजीव अभयारण्य में जंगली बिल्ली व बार्किंग डियर जैसे जंगली जीवों की मौजूदगी मिली है। सुखना के जंगल में सांभर बहुतायत में मौजूद हैं। यह खुलासा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सर्वे में हुआ है। सर्वे के अनुसार अभयारण्य में पहले से जंगली जानवरों की संख्या बढ़ गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार राजाजी टाइगर रिजर्व के बराबर चंडीगढ़ में सांभर की मौजूदगी है। सुखना वन्यजीव अभयारण्य में 290 से 763 के बीच सांभर मौजूद हैं। अभयारण्य में तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गोल्डन जेकॉल, इंडिया ग्रे मोंगूज, चीतल, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, इंडियन पैंगोलिन, इंडियन पॉर्क्यूपाइन के अलावा भारतीय मोर, लाल मोर जैसी पक्षियों की प्रजातियां भी मौजूद हैं। मुख्य वन संरक्षक देबेंद्र दलाई ने बताया कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून (डब्ल्यूआईआई) ने वाइल्डलाइफ सर्वे में इसका खुलासा किया है।
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स्ट्रे डॉग्स भी मौजूद, जिनके प्रबंधन की आवश्यकता
डब्ल्यूआईआई देहरादून ने यह भी सिफारिश की है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव आवास संबंधों को समझने के लिए आवास लक्षण वर्णन और वनस्पति समुदाय संरचना पर विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए। पक्षियों की प्रजातियों व कुछ अन्य जानवरों के सर्वे के दौरान सामने आया कि यहां करीब 16 प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें से 13 मैमेलियन प्रजातियां हैं, जिसमें मांसाहारी व शाकाहारी दोनों मौजूद हैं। अन्य वाइल्ड स्पीशीज में यहां फीरल कैटल व फ्री रेंजिंग स्ट्रे डॉग्स भी मौजूद हैं, जिन्हें समय पर प्रबंधन हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
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वर्ष 2010 के बाद वर्ष 2021 में हुआ सर्वे
चंडीगढ़ के वन वन्यजीव विभाग ने सुखना वन्यजीव अभयारण्य का मई 2021 में डिटेल सर्वे किया था। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून ने इसमें तकनीकी सहयोग दिया था। 5 से 9 मई तक चले सर्वे में कई जानकारियां सामने आईं। डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट के अनुसार सुखना वन्यजीव अभयारण्य का क्षेत्रफल छोटा है, लेकिन बावजूद इसके यहां बायोलॉजिकल डायवर्सिटी है। इसे एक महत्वपूर्ण वाइल्डलाइफ व बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन एरिया के तौर पर माना जा सकता है। बता दें इससे पहले वर्ष 2010 में सर्वे कराया गया था। तब ये वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य एनजीओ के सहयोग से करवाया गया था।
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