फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Wild animals in punjab Malnourished

पंजाब में जंगली जानवर हो रहे हैं कुपोषण का शिकार, गर्भधारण की समस्या 

Wed, 17 Feb 2021 02:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 17 Feb 2021 02:01 AM IST
विज्ञापन
Wild animals in punjab Malnourished
बारहसिंगा.. - फोटो : अमर उजाला

पंजाब के जंगली जानवर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। इस कारण करीब 70 फीसदी मादाएं गर्भ धारण नहीं कर पा रही हैं। जानवर पौष्टिक आहार की तलाश में खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। विभाग की रिसर्च में नर जानवरों के शुक्राणु कमजोर हो रहे हैं जबकि मादा जानवरों के अंडाणु भी मजबूत नहीं हैं। जो आबादी बढ़ रही है वह संख्या काफी कम हो गई है। यह भविष्य के खतरे को दर्शा रहा है। बारिश का न होना और फलदार वृझों की कमी के कारण इन पर आधारित जानवरों की प्रजनन शक्ति कम हो रही है। 

विज्ञापन


नतीजा यह हो रहा है कि जानवर खेतों की ओर पोषण पाने के लिए रुख कर रहे हैं और गर्भाधान के समय भी अधिक दूरी से बचने के लिए खेतों के आस-पास ही रह रहे हैं। जिसके कारण प्रसव भी खेतों में ही हो रहे हैं। अब वन विभाग के अधिकारियों को इन जानवरों के बचाने की चिंता और बढ़ गई है, जिस पर मंथन चल रहा है। 
विज्ञापन


जानवरों के इस बदले व्यवहार को लेकर वन अधिकारी खासे चिंतित हैं। वह जानवरों के व्यवहार में आए इस बदलाव का अध्ययन कर रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि जंगलों में जानवरों के लिए पौष्टिक आहार की कमी हो रही है। पंजाब में 2015 के बाद 0.13 प्रतिशत का  जंगलों में  भले ही इजाफा हुआ है, लेकिन इनमें रहने वाले जानवरों के व्यवहार में परिवर्तन आने लगे हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


नील गाय, हिरन, सांभर, बारहसिंगा आदि जानवरों के सामने यह संकट आ रहा है। अकेले पंजाब वन विभाग की फ्लोर डिवीजन की यदि बात करें तो यहां दो साल पहले 2018 में इन दिनों रोज जानवरों के आने की पांच या छह सूचनाएं रिहायशी लोगों या किसानों के द्वारा दी जाती थीं, लेकिन 2018 के बाद अब रिहाइश और खेतों में आने की 50-60 शिकायतें आ रही हैं। 

हैरानी तो तब हो रही है जब ये जानवर खेतों और रिहाइश के आस-पास बच्चे पैदा कर रहे हैं। ऐसे में रिहाइश और खेतों में वह दुर्घटनाओं का भी शिकार हो रहे हैं। वनकर्मियों को उन्हे रेस्क्यू करने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं। खेतों में ऐसे हालात को लेकर किसान भी खासे चिंतित हैं।

कभी-कभी भूख और कुपोषण के प्रभाव से कुपोषित मादाएं गर्भ धारण नहीं कर पातीं, इसलिए भी जानवरों के व्यवहार में यह बदलाव आ सकता है। वह पौष्टिक खाने की तलाश में जंगलों से खेतों और रिहाइश की ओर रुख करते हैं।

-विनोद कुमार (सोनू), अध्यक्ष, चंडीगढ़ पेट्स लवर्स एसोसिएशन

जानवरों के इस व्यवहार को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शीत ऋतु और बसंत ऋतु के प्रारंभ में जंगलों में भोजन का अभाव होने लगता है। पिछले साल बारिश भी कम हुई थी, जिस कारण जंगलों में चारे की भी कमी हुई है। पौष्टिक खाने की तलाश में ही जानवर खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
-आरके मिश्रा, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, पंजाब

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed