पीयू के साथ क्यों हो रहा है सौतेला व्यवहार : हाईकोर्ट
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पंजाब यूनिवर्सिटी के खस्ताहाल पर पीयू के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर ने यूजीसी को इसका जिम्मेदार ठहराया है। मामले में वीसी के बयान को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वत: संज्ञान पर सुनवाई के दौरान यह बात कही गई।
वीसी ने कहा कि देश में 8 डीम्ड यूनिवर्सिटी हैं, जिनमें कई केंद्रीय नहीं हैं। बावजूद इसके उनको दी जाने वाली ग्रांट में 15 प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी होती है। वहीं पीयू की ग्रांट को बढ़ाने से इसलिए इनकार कर दिया गया, क्योंकि पीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं है।
पीयू के कुलपति ने बेंच के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि इस माह का वेतन देने के लिए पीयू के पास पैसा तक नहीं है। जहां एक ओर सेंट्रल यूनिवर्सिटी न होने के चलते पीयू की ग्रांट नहीं बढ़ाई जा रही है, वहीं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, 3 संस्कृत विश्वविद्यालय और ऐसे ही कुछ अन्य शिक्षण संस्थान हैं, जोकि सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं हैं।
फिर भी उनकी वार्षिक ग्रांट 15 प्रतिशत बढ़ाई गई है। इन संस्थानों पर यूजीसी मेहरबान है। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने पूछा, क्यों न दी जाए सीधी ग्रांट
इस पर जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव, यूजीसी के चेयरमैन को 14 दिसंबर को प्रो ग्रोवर के साथ बैठक कर मामले में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि पीयू के प्रोफेसरों का वेतन, पेंशन और पीयू की अन्य जरूरतों के लिए तत्काल राशि जारी की जाए। 14 दिसंबर को बैठक के बाद 19 दिसंबर को हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा। बैठक में क्या निर्णय लिए गए और बैठक के मिनट्स केस की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को सौंपे जाने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने पूछा, क्यों न दी जाए सीधी ग्रांट
इससे पहले कोर्ट को बताया गया कि साल 2008 से पहले केंद्र सरकार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय से यूटी प्रशासन के जरिये राशि मिलती थी, तब तक स्थिति सही थी।
इसके बाद केंद्र ने यूजीसी के माध्यम से यूनिवर्सिटी को पैसा देना शुरू किया। तब से समस्या आरंभ हो गई। हाईकोर्ट ने इस पर पूछा है कि क्यों न सीधी ग्रांट पीयू को दी जाए।