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हमारे कर्मियों को मकान अलॉट करने का जिम्मा हमको ही क्यों नहीं सौंप देता प्रशासन: हाईकोर्ट

Thu, 03 Jul 2025 08:24 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 08:24 PM IST
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Why doesn't the administration give us the responsibility of allotting houses to our employees: High Court
-अलॉटमेंट कमेटी में केवल एक ज्यूडिशियल मेंबर होने पर भी मांगा जवाब
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-चंडीगढ़ व हाईकोर्ट कर्मियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची पर प्रशासन के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने कर्मचारियों को अलॉट सरकारी मकानों की बदहाली और अलॉटमेंट के दौरान भेदभाव पर लिए संज्ञान मामले में यूटी प्रशासन के जवाब पर असंतोष जताते हुए नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमारे कर्मियों को मकान अलॉट करने की जिम्मेदारी हमें ही क्यों नहीं सौंप दी जाती। हाईकोर्ट के कर्मियों के लिए अलग से पूल बनाने पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि हाउस अलॉटमेंट के लिए बनी छह सदस्यीय कमेटी में ज्यूडिशियल मेंबर केवल एक ही क्यों है। क्यों नहीं रजिस्ट्रार जनरल को इस कमेटी का सदस्य बनाया जाए। साथ ही यह भी पूछा है कि हाउस अलॉटमेंट के लिए यूटी प्रशासन के कर्मियों और हाईकोर्ट के कर्मियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची क्यों है।
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एक अखबार में प्रकाशित समाचार के अनुसार हाईकोर्ट के कर्मचारियों को जो मकान अलॉट किए गए हैं, उनमें टूटी दीवारें, उखड़ा पेंट और प्लास्टर हर जगह देखा जा सकता है। सेक्टर-22, 24, 27, 29, 33 और अन्य में मौजूद इन सरकारी आवासों की छतें ढहने की कगार पर हैं। इससे यहां रहने वालों पर सीमेंट की धूल बरस रही है। दरवाजे और खिड़कियों के फ्रेम, जो कभी मजबूत हुआ करते थे, अब दीमक ने उन्हें तबाह कर दिया है।
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आवास के आसपास जंगली घास
आवास के आसपास जंगली घास इतनी घनी है कि यह सांपों और अन्य खतरनाक जीवों का घर बन गई है। इससे कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि सिस्टम की सेवा करने वाले लोगों को खुद ही सम्मानजनक जीवन जीने के बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा है कि जैसे चंडीगढ़ में तैनात ज्यूडिशियल ऑफिसर के लिए 45 आवास हैं, उसी तर्ज पर हाईकोर्ट के लिए अलग से पूल बनाकर मकानों की अलॉटमेंट होनी चाहिए।
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