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पीयू सीनेट में किसका होगा दबदबा, अभी तक नहीं हो पाया साफ
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में किसका दबदबा रहेगा, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया। कांग्रेस व भाजपा खेमा सदस्यों की जोड़-तोड़ में लगा है। सीनेट सदस्य भी अपना पत्ता नहीं खोल रहे हैं। माना जा रहा है कि दिसंबर में ही सीनेट की पहली बैठक होगी।
पीयू सीनेट के चुनाव हुए लगभग एक माह होने जा रहा है, मगर अब तक सीनेट नोटिफिकेशन नहीं हुआ। न ही बैठक के लिए दिन तय हुआ। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस व भाजपा के दिग्गजों ने अपनी पूरी टीम नहीं बनाई यानी कुछ न कुछ सदस्यों की कमी महसूस हो रही है जिससे बहुमत साबित नहीं हो पा रहा है। हालांकि आए दिन छोटे ग्रुपों व निर्दलीय सदस्यों के साथ दिग्गजों की बैठकें हो रही हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा खेमे के कुछ सीनेट सदस्य नाराज चल रहे हैं। वह अपने हिसाब से टीम बनाना चाहते हैं जो संभव नहीं हो पा रहा है।
दबदबा कायम करने के लिए 40 से अधिक सदस्य जरूरी
सीनेट में लंबे समय तक कांग्रेस खेमे का दबदबा रहा है। इस बार माहौल बदलने के लिए भाजपा खेमे ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन कामयाबी पूरी तरह नहीं मिल पाई। जानकारों का कहना है कि सीनेट के 92 सदस्य हैं, जिसमें से 40 से अधिक सदस्य जिस ग्रुप के पास होंगे, उसका दबदबा कायम होगा। इस संख्या के आसपास ग्रुप पहुंचे हैं। हालांकि कांग्रेसी खेेमे ने स्नातक चुनाव पूरा होने के बाद ही बता दिया था कि वह बहुमत में आएंगे। उनके पास सदस्यों की संख्या कम नहीं है। भाजपाई खेमे ने यह बात साफ नहीं की। उनका कहना था कि पीयू के लिए मिलजुलकर काम करेंगे।
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सिंडिकेट चुनाव की प्रक्रिया पर अभी बात नहीं
सीनेट की पहली बैठक के साथ ही सिंडिकेट का गठन होगा लेकिन अभी इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। सिंडिकेट का बनना जरूरी है। पीयू के हर दिन इसी के जरिए लिए जाते हैं। उम्मीद है कि दिसंबर में सिंडिकेट का गठन होगा। मालूम हो कि सिंडिकेट में 15 सदस्य होते हैं। इसमें भी बहुमत के मुताबिक ग्रुप काम करते हैं। कांग्रेसी खेमे का बहुमत अब तक इसमें रहा है।
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पीयू सीनेट के चुनाव हुए लगभग एक माह होने जा रहा है, मगर अब तक सीनेट नोटिफिकेशन नहीं हुआ। न ही बैठक के लिए दिन तय हुआ। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस व भाजपा के दिग्गजों ने अपनी पूरी टीम नहीं बनाई यानी कुछ न कुछ सदस्यों की कमी महसूस हो रही है जिससे बहुमत साबित नहीं हो पा रहा है। हालांकि आए दिन छोटे ग्रुपों व निर्दलीय सदस्यों के साथ दिग्गजों की बैठकें हो रही हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा खेमे के कुछ सीनेट सदस्य नाराज चल रहे हैं। वह अपने हिसाब से टीम बनाना चाहते हैं जो संभव नहीं हो पा रहा है।
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दबदबा कायम करने के लिए 40 से अधिक सदस्य जरूरी
सीनेट में लंबे समय तक कांग्रेस खेमे का दबदबा रहा है। इस बार माहौल बदलने के लिए भाजपा खेमे ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन कामयाबी पूरी तरह नहीं मिल पाई। जानकारों का कहना है कि सीनेट के 92 सदस्य हैं, जिसमें से 40 से अधिक सदस्य जिस ग्रुप के पास होंगे, उसका दबदबा कायम होगा। इस संख्या के आसपास ग्रुप पहुंचे हैं। हालांकि कांग्रेसी खेेमे ने स्नातक चुनाव पूरा होने के बाद ही बता दिया था कि वह बहुमत में आएंगे। उनके पास सदस्यों की संख्या कम नहीं है। भाजपाई खेमे ने यह बात साफ नहीं की। उनका कहना था कि पीयू के लिए मिलजुलकर काम करेंगे।
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सिंडिकेट चुनाव की प्रक्रिया पर अभी बात नहीं
सीनेट की पहली बैठक के साथ ही सिंडिकेट का गठन होगा लेकिन अभी इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। सिंडिकेट का बनना जरूरी है। पीयू के हर दिन इसी के जरिए लिए जाते हैं। उम्मीद है कि दिसंबर में सिंडिकेट का गठन होगा। मालूम हो कि सिंडिकेट में 15 सदस्य होते हैं। इसमें भी बहुमत के मुताबिक ग्रुप काम करते हैं। कांग्रेसी खेमे का बहुमत अब तक इसमें रहा है।