Asian Games 2023: कौन हैं हरमिलन बैंस? घुंघराले बाल, क्वीन की पहचान, माता-पिता के बाद रोशन किया देश का नाम
हरमिलन के पिता ने बताया कि उसने बचपन में ही अपनी मां अर्जुन अवॉर्डी माधुरी के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया था। हरमिलन ने सीबीएसई स्कूल गेम्स में दौड़ना शुरू किया था। 2018 में 12वीं कक्षा में हरमिलन ने 800 और 1500 मीटर में राष्ट्रीय सीबीएसई गेम्स में रिकॉर्ड कायम किए। ये दो रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम हैं।
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पंजाब के होशियारपुर जिले के माहिलपुर कस्बे की रहने वालीं भारतीय एथलीट हरमिलन बैंस की सोशल मीडिया पर पहचान क्वीन की है। उन्होंने चीन में एशियाई खेलों में 1500 मीटर में रजत पदक जीतकर अपने परिवार की विरासत को जीवित रखा है। हरमिलन के पिता अमनदीप सिंह ने 1996 में एसएएफ (साउथ एशियन फेडरेशन) खेलों में 1500 मीटर में रजत पदक जीता था जबकि उनकी मां माधुरी ने 2002 में बुसान एशियाई खेलों में 800 मीटर में रजत पदक जीता था और 2004 में पाकिस्तान में आयोजित एसएएफ खेलों में 1500 मीटर और 800 मीटर में स्वर्ण पदक जीता था। हरमिलन देश की एक मात्र महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने दो स्पर्धाओं के लिए क्वालिफाई किया है।
बेटी के प्रदर्शन से पिता अमनदीप सिंह बहुत खुश थे। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह तो बस शुरुआत है, उसे 800 मीटर ट्रैक पर आने दो और फिर देखो। "मैंने उससे बात की है और 1500 मीटर में रजत पदक जीतने के बाद 800 मीटर जीतने पर आश्वस्त है। यह न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे देश के लिए खुशी का क्षण है।
हरमिलन के पिता ने बताया कि उसने बचपन में ही अपनी मां अर्जुन अवॉर्डी माधुरी के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया था। हरमिलन ने सीबीएसई स्कूल गेम्स में दौड़ना शुरू किया था। 2018 में 12वीं कक्षा में हरमिलन ने 800 और 1500 मीटर में राष्ट्रीय सीबीएसई गेम्स में रिकॉर्ड कायम किए। ये दो रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम हैं।
उनके नाम ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेलो में भी रिकॉर्ड हैं। 2021 में 4:05.39 मिनट के साथ उन्होंने सुनीता रानी के 4:06.03 मिनट के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा था। यह जानकारी उनके पिता अमनदीप ने दी। हरमिलन वर्तमान में चंडीगढ़ में आरबीआई में क्लास वन अधिकारी के रूप में तैनात हैं।
वह अपने पिता के साथ 1500 मीटर और अपनी मां के साथ 800 मीटर की प्रैक्टिस करती हैं। एशियाई खेलों से पहले वह चार महीने तक प्रैक्टिस के लिए यूके गईं और वहीं रहकर अपनी ट्रेनिंग की। वहां से लौटकर वह इंडिया कैंप में शामिल हुईं और एशियन गेम्स में पदक जीता।