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Chandigarh News: आसमान में दिखे न दिखे, स्मार्ट एआई मॉडल बताएगा ड्रोन है या पक्षी
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चंडीगढ़। आसमान में कोई उड़ने वाली चीज दिखाई न दे तो अब उसकी आवाज से पता लगाया जा सकेगा कि वहां ड्रोन उड़ रहा है, हेलिकॉप्टर है या पक्षी। सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने एक छोटा और स्मार्ट एआई मॉडल तैयार किया है, जो उड़ने वाली चीजों की आवाज पहचान सकता है। खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए बड़े और महंगे कंप्यूटर की जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने इस मॉडल का नाम LAiT रखा है। यह आवाज को पहले स्पेक्ट्रोग्राम यानी आवाज की तस्वीर में बदलता है। इसके बाद एआई आवाज के पैटर्न का विश्लेषण कर पहचान करता है। ड्रोन के पंखों की आवाज, हेलिकॉप्टर की गूंज और पक्षियों की चहचहाहट के अलग-अलग पैटर्न को मॉडल पहचान सकता है।
टेस्टिंग के दौरान सामान्य माहौल में मॉडल ने 97.49 फीसदी तक सही पहचान की। ट्रैफिक और दूसरी आवाजों वाले वातावरण में भी इसकी जांच की गई। 10 डेसिबल के शोर में इसकी सटीकता 85.82 फीसदी रही, जबकि 5 डेसिबल की अधिक शोर वाली स्थिति में भी 73.14 फीसदी पहचान दर्ज की गई।
9270 आवाज नमूनों का किया अध्ययन
मॉडल की टेस्टिंग के लिए चार तरह के ड्रोन, हेलिकॉप्टर, पक्षियों और आसपास के वातावरण की आवाजों की रिकॉर्डिंग ली गई। वैज्ञानिकों ने करीब 9270 आवाज नमूनों का अध्ययन किया। मॉडल का आकार सिर्फ 0.92 एमबी है। कम आकार के कारण इसे भविष्य में छोटे निगरानी उपकरणों में लगाया जा सकता है। यह तकनीक ड्रोन निगरानी, हवाई सुरक्षा, वन्यजीवों पर नजर रखने और पर्यावरण की आवाजों की पहचान में उपयोगी हो सकती है। यह तकनीक सीएसआईओ के वैज्ञानिक अनुज कुमार मिश्रा और डॉ. रिपुल घोष ने विकसित की है। वैज्ञानिक अब इसे और बेहतर बनाकर छोटे उपकरणों में रियल टाइम इस्तेमाल की दिशा में काम करेंगे।
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ऐसे काम करता है LAiT
LAiT आवाज के छोटे हिस्सों और पूरी आवाज के बड़े पैटर्न, दोनों को एक साथ समझता है। इसके आधार पर यह तय करता है कि सुनाई देने वाली आवाज ड्रोन, हेलिकॉप्टर, पक्षी या सामान्य वातावरण की है।
इन जगहों पर मिल सकता है फायदा
सीमा और संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध उड़ने वाली वस्तुओं की शुरुआती जानकारी।
एयरपोर्ट के आसपास अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों पर नजर।
जंगलों और पक्षी अभयारण्यों में आवाज के आधार पर जीवों की गतिविधियों का अध्ययन।
रात और कम दृश्यता में निगरानी को बेहतर बनाने में मदद।
स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में कैमरे के साथ अतिरिक्त पहचान तकनीक।
भविष्य में रियल टाइम अलर्ट सिस्टम विकसित करने में उपयोग।
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टेस्टिंग के दौरान सामान्य माहौल में मॉडल ने 97.49 फीसदी तक सही पहचान की। ट्रैफिक और दूसरी आवाजों वाले वातावरण में भी इसकी जांच की गई। 10 डेसिबल के शोर में इसकी सटीकता 85.82 फीसदी रही, जबकि 5 डेसिबल की अधिक शोर वाली स्थिति में भी 73.14 फीसदी पहचान दर्ज की गई।
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9270 आवाज नमूनों का किया अध्ययन
मॉडल की टेस्टिंग के लिए चार तरह के ड्रोन, हेलिकॉप्टर, पक्षियों और आसपास के वातावरण की आवाजों की रिकॉर्डिंग ली गई। वैज्ञानिकों ने करीब 9270 आवाज नमूनों का अध्ययन किया। मॉडल का आकार सिर्फ 0.92 एमबी है। कम आकार के कारण इसे भविष्य में छोटे निगरानी उपकरणों में लगाया जा सकता है। यह तकनीक ड्रोन निगरानी, हवाई सुरक्षा, वन्यजीवों पर नजर रखने और पर्यावरण की आवाजों की पहचान में उपयोगी हो सकती है। यह तकनीक सीएसआईओ के वैज्ञानिक अनुज कुमार मिश्रा और डॉ. रिपुल घोष ने विकसित की है। वैज्ञानिक अब इसे और बेहतर बनाकर छोटे उपकरणों में रियल टाइम इस्तेमाल की दिशा में काम करेंगे।
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ऐसे काम करता है LAiT
LAiT आवाज के छोटे हिस्सों और पूरी आवाज के बड़े पैटर्न, दोनों को एक साथ समझता है। इसके आधार पर यह तय करता है कि सुनाई देने वाली आवाज ड्रोन, हेलिकॉप्टर, पक्षी या सामान्य वातावरण की है।
इन जगहों पर मिल सकता है फायदा
सीमा और संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध उड़ने वाली वस्तुओं की शुरुआती जानकारी।
एयरपोर्ट के आसपास अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों पर नजर।
जंगलों और पक्षी अभयारण्यों में आवाज के आधार पर जीवों की गतिविधियों का अध्ययन।
रात और कम दृश्यता में निगरानी को बेहतर बनाने में मदद।
स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में कैमरे के साथ अतिरिक्त पहचान तकनीक।
भविष्य में रियल टाइम अलर्ट सिस्टम विकसित करने में उपयोग।