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उधारी बढ़ी तो छात्राओं ने दुकानदार पर लगाया छेड़छाड़ का झूठा आरोप, 4 साल बाद बरी
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छेड़छाड़ का आरोपी दुकानदार चार साल बाद बरी
सबहेड
उधारी मांगने पर छात्राओं ने लगाया था झूठा आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चार साल पुराने छेड़छाड़ के केस में वीरवार को सेक्टर-10 निवासी मदनलाल को जसप्रीत सिंह मिन्हास की अदालत ने ने बरी कर दिया। जिला अदालत में मदनलाल की तरफ से पेश वकील अमर सिंह चहल और दिलशेर सिंह जंडियाल ने दलील दी कि युवतियों की ओर से उनके मुवक्किल पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। घटना के 27 घंटे बाद छात्राओं ने पुलिस को जानकारी दी थी। मामले में सेक्टर-3 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था।
वकील ने अदालत को बताया कि मदनलाल की सेक्टर-10 में कन्फेक्शनरी की दुकान है, जहां से छात्राएं खाने-पीने का सामान लेती थीं और जब बिल चार हजार रुपये से ज्यादा का हो गया तो मदनलाल ने रुपये मांगे। इससे चिढ़कर छात्राओं ने उन पर छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया। इसके अगले दिन ही उन्होंने मदनलाल के साथ मारपीट भी की। इस संबंध में छात्राओं ने हॉस्टल वार्डन और प्रिंसिपल को भी जानकारी नहीं दी। डीएवी कॉलेज के स्टूडेंट्स काउंसिल के दबाव में आकर सेक्टर-3 थाना पुलिस ने बिना कोई जांच के ही केस दर्ज कर लिया। मदनलाल ने अदालत को बताया कि छात्र-छात्राओं की हालत को देखते हुए कई बार उन्होंने 500 से एक हजार रुपये तक माफ किए थे। दलील सुनने के बाद अदालत ने मदनलाल को बरी कर दिया।
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उधारी मांगने पर छात्राओं ने लगाया था झूठा आरोप
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चंडीगढ़। चार साल पुराने छेड़छाड़ के केस में वीरवार को सेक्टर-10 निवासी मदनलाल को जसप्रीत सिंह मिन्हास की अदालत ने ने बरी कर दिया। जिला अदालत में मदनलाल की तरफ से पेश वकील अमर सिंह चहल और दिलशेर सिंह जंडियाल ने दलील दी कि युवतियों की ओर से उनके मुवक्किल पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। घटना के 27 घंटे बाद छात्राओं ने पुलिस को जानकारी दी थी। मामले में सेक्टर-3 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था।
वकील ने अदालत को बताया कि मदनलाल की सेक्टर-10 में कन्फेक्शनरी की दुकान है, जहां से छात्राएं खाने-पीने का सामान लेती थीं और जब बिल चार हजार रुपये से ज्यादा का हो गया तो मदनलाल ने रुपये मांगे। इससे चिढ़कर छात्राओं ने उन पर छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया। इसके अगले दिन ही उन्होंने मदनलाल के साथ मारपीट भी की। इस संबंध में छात्राओं ने हॉस्टल वार्डन और प्रिंसिपल को भी जानकारी नहीं दी। डीएवी कॉलेज के स्टूडेंट्स काउंसिल के दबाव में आकर सेक्टर-3 थाना पुलिस ने बिना कोई जांच के ही केस दर्ज कर लिया। मदनलाल ने अदालत को बताया कि छात्र-छात्राओं की हालत को देखते हुए कई बार उन्होंने 500 से एक हजार रुपये तक माफ किए थे। दलील सुनने के बाद अदालत ने मदनलाल को बरी कर दिया।
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