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गेहूं गायब: कैग की रिपोर्ट में घपले के संकेत, कांग्रेस के तेवर तीखे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:30 AM IST
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रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस प्रवक्ता
- फोटो : file photo
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पंजाब के गोदामों से 12 हजार करोड़ रुपये का अनाज गायब होने को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि आरबीआई ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे पर 18 अप्रैल को बैंकों की बैठक बुलाई है।
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माहिरों का कहना है कि यह आंकड़ा बीस हजार करोड़ भी हो सकता है। सेंट्रल पूल में 114 लाख टन से ज्यादा गेहूं देने वाले पंजाब केलिए यह चिंता की बात है। इससे गेहूं की मौजूदा खरीद की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त और खेतीबाड़ी मंत्री तथा पंजाब के सीएम ने अभी तक इस पर चुप्पी साधी हुई है।
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कांग्रेस भवन में शुक्रवार को पत्रकार वार्ता के दौरान सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि कैग की रिपोर्ट में पहले ही घपले के संकेत मिल चुके हैं। कैग ने साल 2013-14 की रिपोर्ट में पिछले 7-8 साल की समीक्षा की थी। चार खरीद एजेंसियों पंजाब वेयरहाउस, पंजाब एग्रो, पनसप और पनग्रेन ने उन गाड़ियों केनंबर दिए थे, जिनमें अनाज की ट्रांसपोर्टेशन हुई। कैग ने 39 मंडियों के 3319 ट्रकों के नंबर खंगाले, तो 3232 गाड़ियां मिली ही नहीं। बाकी नंबर बाइक, कार, यहां तक कि ट्रैक्टर के थे।
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सुरजेवाला ने कहा कि कैग ने इन एजेंसियों के16 जिला दफ्तरों और 75 मंडियों का साल 2009-10 से 2013-14 का रिकार्ड चेक किया। सात दफ्तरों ने वाहनों के नंबर देने से इंकार कर दिया। बाकियों ने भी पूरे नंबर नहीं दिए। साल 1997-98 व 2000-01 के बीच ट्रांजिट के दौरान 805 करोड़ की गेहूं गुम हो गई। विभाग ने मंडियों से गोदामों तक जाते हुए 2232 करोड़ केअनाज की शॉर्टेज मानी।
पंजाब सरकार ने फूड सेक्टर के विकास के लिए केंद्र से 42 हजार करोड़ रुपये लिए, उसका क्या हुआ। साल 2001 में खरीद की निगरानी को केंद्र की ओर से नियुक्त किए जाने वाले 667 अधिकारी दागी थे, उनमें से 54 प्रतिशत पंजाब में तैनात रहे। 299 को फिर पोस्टिंग मिल गई, दो सौ ने तो पांच साल काम किया।
उन्होंने कहा कि पीएम, केंद्रीय वित्त व खेती मंत्री और पंजाब सीएम बताएं कि अब तक कितना अनाज गुम हुआ और उसकी कीमत क्या थी। पिछले दस सालों में कितना सब-स्टैंडर्ड अनाज खरीदा गया। उन्होंने मांग की कि मामले की सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जाए। पिछले दस साल के रिकार्ड का कोर्ट मॉनिटर्ड कैग ऑडिट कराया जाए। साथ ही केंद्र व राज्य सरकारें यह बनाएं कि गेहूं की खरीद में रुकावट न आए, किसानों को बारह घंटों में पेमेंट दिया जाए। प्रधानमंत्री आश्वासन दें कि खरीद में कोई समस्या नहीं आएगी।