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हरियाणा में धान की ज्यादा नमी बनी टेंशन, सड़कों पर सुखाया जा रही फसल, मंडियों में जगह नहीं

Wed, 30 Sep 2020 11:07 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 30 Sep 2020 11:07 AM IST
सार

  • किसान नमी वाला धान लेकर पहुंच रहे
  • भार व दरों में कटौती नहीं करेगी सरकार
  • 17 प्रतिशत नमी पर होगी धान की खरीद

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Wet Paddy problem in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

धान खरीद के दौरान फसल की ज्यादा नमी किसानों के लिए बड़ी टेंशन बन रही है। मंडियों में किसान अपनी धान लेकर पहुंच रहे हैं। मगर उनकी धान में निर्धारित से ज्यादा मात्रा में नमी है। जिस वजह से किसानों को धान बेचने के लिए मंडियों में ही इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं धान को सुखाने के लिए किसान अपना धान मंडियों में और बाहर सड़कों पर सुखा रहे हैं।
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दूसरी ओर, प्रदेश सरकार ने भी साफ कर दिया है कि सरकार धान की खरीद 17 प्रतिशत नमी पर ही खरीदेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार किसानों की धान खरीद के दौरान प्राइस व भार कट नहीं करेगी। मगर किसानों से भी अपील की जा रही है कि वे फसल अच्छी तरह सुखाकर ही मंडियों में लाएं। ताकि उन्हें न तो दिक्कतों का सामना करना पड़े और न ही फसल बेचने के लिए उसे कई दिनों तक इंतजार करना पड़े।
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किसान एक ही दिन में मंडी में फसल बेचकर अपने घर जाएं। हरियाणा सरकार ने 26 सितंबर से प्रदेश की कुछ मंडियों में धान की खरीद शुरू कर दी है। 1 अक्तूबर से ये खरीद और गति पकड़ेगी। सभी मंडियों और खरीद केंद्रों को क्षमता के अनुसार तैयार किया जा रहा है। सरकार ने इस बार भी गेहूं की तरह एसएमएस सिस्टम से ही किसानों को अनाज मंडियों में फसल बिक्री के लिए बुलाने का सिस्टम बनाया है। ताकि महामारी के इस दौर में किसानों के स्वास्थ्य को कोई खतरा न हो।
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मगर बहुत से किसान पहले ही नमी वाला धान लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। जो कि टेंशन का विषय बना हुआ है। धान में नमी भी 17 प्रतिशत से अधिक है। जिस वजह से अभी इस धान की खरीद नहीं हो पा रही हैं। अधिकतर मंडियां सुखाए जाने वाली धान से ही फुल पड़ी हैं। जिस वजह से अन्य फसल मंडियों में लाने की जगह नहीं मिल रही है।

सूखी होगी फसल तो एक दिन में बेचकर घर जाएंगे किसान

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने बताया कि इस बार भी हम किसानों को एसएमएस के जरिये ही मंडियों में धान बिक्री के लिए बुलाएंगे। इसलिए किसानों से अपील है कि विभिन्न प्रकार की दिक्कतों से बचने के लिए किसान अपना धान सुखाकर लाएं। नमी के नाम पर सरकार प्राइस कट और भार कट नहीं करना चाहती। इसलिए किसान भी सहयोग करें।

एसएमएस मिलने पर मंडी में अपना सूखा धान लेकर पहुंचे और उसी दिन फसल बेचकर वापस जाए। दास के अनुसार सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला ही धान खरीदेगी और इतनी ही नमी वाला धान राइस मिलरों को देगी। ताकि सीएमआर के दौरान उचित मात्रा में सरकार को चावल प्राप्त हो। एसीएस पीके दास ने बताया कि प्रदेश में बाजरे और मूंग की दाल का भी एक-एक दाना सरकार एमएसपी पर खरीदेगी। इसकी भी तैयारियां भी हमने कर ली है।

सुबह ओस से गीली हो रही धान, सरकार दे राहत
प्रगतिशील किसान परमजीत सिंह बड़ौला, हरबंस सिंह धुरकड़ा, अमरजीत सिंह मोहड़ी, जय सिंह जलबेड़ा, हरपाल सिंह धन्यौड़ा, जगतार सिंह बलाना व जसबीर सिंह ने बताया कि दरअसल ध् न सुबह के माहौल में पड़ रही ज्यादा ओस की वजह से गीली हो रही है। साथ ही फसल कटाई के दौरान कुछ दाने कच्चे रह जाते हैं। जिनमें नमी की ज्यादा मात्रा होती है। इसलिए धान में नमी की मात्रा में बढ़ने की संभावना रहती है।

किसानों ने बताया कि इस फसल को सुखाने का उचित प्रबंध नहीं किया जा सकता। इसलिए किसान मंडियों में ही आकर अपनी धान को सूखाने को मजबूर है और अत्यधिक नमी की वजह से फसल की खरीद नहीं हो पा रही है। किसानों ने सरकार से मांग की कि सरकार राहत देते हए निर्धारित नमी की मात्रा को बढ़ाए, ताकि किसानों की फसल समय पर बिक सके और फसल का पूरा दाम मिले।
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