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हरियाणा में लगातार 9वें साल मानसून कमजोर, 14 जिले रह गए प्यासे, विदा होने की राह पर बरसात

Sun, 15 Sep 2019 11:34 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 15 Sep 2019 11:34 AM IST
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Weather Update, Less rainfall In 14 districts of Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

मानसून हरियाणा से विदा होने की राह पर चल पड़ा है। अगले पांच दिनों में बारिश की संभावना नहीं है। सावन-भादो के बीतने के बावजूद मानसून सीजन के 106 दिनों में प्रदेश में औसतन 41 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है।

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पड़ोसी राज्य राजस्थान में औसत से ज्यादा बारिश हुई है तो हरियाणा में मानसून लगातार नौवें साल भी कमजोर साबित हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश में 14 जिलों में जमीन प्यासी रह गई है। खेतों में लगी खरीफ फसलों पर इसका असर पड़ने लगा है। 
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भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक एक जून से शुरू हुए मानसून सीजन में देश में जहां सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं हरियाणा में 41 प्रतिशत कम मेध बरसे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। भूजल स्तर और कम होने से डार्क जोन की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्योंकि आमतौर पर 15 सितंबर तक प्रदेश से विदा होने वाला मानसून अब सुस्त पड़ चुका है। 
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2009, 2012, 2014 और 2015 में भी कमोबेश मानसून की यही स्थिति थी। पिछले कई दिनों से किसानों को बारिश का इंतजार है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले पांच दिनों तक प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। शनिवार को भी प्रदेश के किसी भी हिस्से में बारिश दर्ज नहीं की गई। भिवानी में सबसे अधिक दिन का तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 27.2 डिग्री दर्ज किया गया।

ऐसे हालात में खासकर गैर सिंचिंत इलाकों में फसलों का उत्पादन घटने की आशंका है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. रोहताश सिंह का कहना है कि सामान्य से कम बारिश होने से किसानों को फसल को सूखे से बचाने के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। कम बारिश का सबसे ज्यादा असर धान व बाजरे के उत्पादन पर पड़ेगा। 

सौ से अधिक गांव डार्क जोन की जद में 
फतेहाबाद जिले का टोहाना कई सालों से डार्क जोन में शामिल है। लाख प्रयत्नों के बावजूद सरकार टोहाना को डार्क जोन से बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो सकी है। ऐसे में कमजोर मानसून ने जिले के दो और ब्लॉक भट्टू और नागपुर के सौ से अधिक गांवों को भी इसी मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
 
किसानों को दोहरा नुकसान
कम बारिश होने से किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई जिलों में धान, ग्वार, बाजरा और कपास की फसलें सूख रही हैं। दूसरी तरफ किसानों को धान की फसल पर दोगुना कीटनाशक का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। मोटर चलाने से बिजली और डीजल का खर्च बढ़ा है, जिससे फसलों की लागत बढ़ गई है।

11 साल में हरियाणा में मानसून का प्रदर्शन (कम या ज्यादा बारिश प्रतिशत में)

2019     41 अब तक 
2018    5
2017    23
2016    26
2015    36
2014    57
2013    22
2012    39    
2011    19
2010    21 (ज्यादा)
2009    35 (स्रोत स्काईमेट)

किस जिले में कितनी कम बारिश (प्रतिशत में)
रोहतक       71
पंचकूला     65
फतेहाबाद   60
पानीपत     60
झज्जर      57  
सोनीपत    54
जींद         48
कैथल      48 
महेंद्रगढ़   47
मेवात      46 
गुरुग्राम   45
फरीदाबाद 45 
भिवानी   43
पलवल   43 (स्रोत आईएमडी)

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