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पानी बचाने के लिए वाटर टैरिफ पॉलिसी जरूरी
अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sat, 21 Dec 2013 12:34 AM IST
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कंफेडेरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई), त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित वाटर कान्क्लेव में
जल संरक्षण पर मंथन हुआ। चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज सिंह पाटिल ने पानी की बचत के लिए सिंचाई के परंपरागत तरीके को छोड़कर डायनामिक मॉडल अपनाने पर जोर दिया। चंडीगढ़ के वित्त सचिव विजोय के सिंह ने नई वाटर टैरिफ पॉलिसी लागू करने का सुझाव दिया।
सीआईआई हेडक्वार्टर सेक्टर-31 में आयोजित कान्क्लेव में पाटिल ने कहा कि सरकार हो या समाज, जल संरक्षण सभी के लिए जरूरी है। उद्योग और खेती दोनों को पानी की जरूरत है। इसलिए पानी की बचत भी सभी को मिलकर करनी होगी। इस संबंध में इजराइल में रिसर्च और डवलपमेंट एडवांस स्टेज पर हैं।
वहां चिप, हाईटेक इक्युपमेंट, सॉफ्टवेयर, कंप्यूटराइज्ड ट्यूब और दूसरे उपकरणों को डेवलप किया जा रहा है। वहां मिट्टी का स्वभाव जानकार सिंचाई की जाती है। उन्होंने वाटर सेक्टर इनवेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी पर एक थीम पेपर भी रिलीज किया।
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वाटर मैनेजमेंट प्लांट बढ़ाने की जरूरत
चंडीगढ़ के वित्त सचिव विजोय के सिंह ने कहा कि नई वाटर टैरिफ पॉलिसी चाहिए। इससे कि पानी का संचय बढ़ाया जा सकता है और ट्रीटमेंट किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में टेेरीटरी वाटर मैनेजमेंट प्लांट की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता है। सीआईआई नॉर्दर्न रीजन कमेटी ऑफ वाटर के चेयरमैन और पेंटायर के कंट्री हेड मुकुंद वासुदेवन ने कहा पानी को रिचार्ज और रियूज करने पर जोर दिया।
जनसंख्या के अनुपात में देश में पानी कम
सीआईआई त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य निखिल साहनी ने कहा कि इंडस्ट्रियल डोमेस्टिक कंजप्शन बढ़ गया है।
पंजाब के चीफ टेक्निकल कोआर्डिनेटर एसआर अग्रवाल और सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के पूर्व चेयरमैन आरएम खन्ना ने कहा कि भारत में विश्व की 18 फीसदी आबादी रहती है। जबकि यहां सिर्फ 2.4 फीसदी जमीन और चार फीसदी पानी है।
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जल संरक्षण पर मंथन हुआ। चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज सिंह पाटिल ने पानी की बचत के लिए सिंचाई के परंपरागत तरीके को छोड़कर डायनामिक मॉडल अपनाने पर जोर दिया। चंडीगढ़ के वित्त सचिव विजोय के सिंह ने नई वाटर टैरिफ पॉलिसी लागू करने का सुझाव दिया।
सीआईआई हेडक्वार्टर सेक्टर-31 में आयोजित कान्क्लेव में पाटिल ने कहा कि सरकार हो या समाज, जल संरक्षण सभी के लिए जरूरी है। उद्योग और खेती दोनों को पानी की जरूरत है। इसलिए पानी की बचत भी सभी को मिलकर करनी होगी। इस संबंध में इजराइल में रिसर्च और डवलपमेंट एडवांस स्टेज पर हैं।
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वहां चिप, हाईटेक इक्युपमेंट, सॉफ्टवेयर, कंप्यूटराइज्ड ट्यूब और दूसरे उपकरणों को डेवलप किया जा रहा है। वहां मिट्टी का स्वभाव जानकार सिंचाई की जाती है। उन्होंने वाटर सेक्टर इनवेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी पर एक थीम पेपर भी रिलीज किया।
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वाटर मैनेजमेंट प्लांट बढ़ाने की जरूरत
चंडीगढ़ के वित्त सचिव विजोय के सिंह ने कहा कि नई वाटर टैरिफ पॉलिसी चाहिए। इससे कि पानी का संचय बढ़ाया जा सकता है और ट्रीटमेंट किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में टेेरीटरी वाटर मैनेजमेंट प्लांट की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता है। सीआईआई नॉर्दर्न रीजन कमेटी ऑफ वाटर के चेयरमैन और पेंटायर के कंट्री हेड मुकुंद वासुदेवन ने कहा पानी को रिचार्ज और रियूज करने पर जोर दिया।
जनसंख्या के अनुपात में देश में पानी कम
सीआईआई त्रिवानी वाटर इंस्टीट्यूट के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य निखिल साहनी ने कहा कि इंडस्ट्रियल डोमेस्टिक कंजप्शन बढ़ गया है।
पंजाब के चीफ टेक्निकल कोआर्डिनेटर एसआर अग्रवाल और सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के पूर्व चेयरमैन आरएम खन्ना ने कहा कि भारत में विश्व की 18 फीसदी आबादी रहती है। जबकि यहां सिर्फ 2.4 फीसदी जमीन और चार फीसदी पानी है।